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Gurugram News: जैकबपुरा में बना देश का पहला स्वतंत्र माता पद्मावती मंदिर
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जैन परंपरा में 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की रक्षिका यक्षिणी मानी जाती हैं माता पद्मावती
नंबर गेम- 800 किलो की मूर्ति स्थापित की गई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में जैकबपुरा ने एक नया इतिहास रचा है। यहां स्थित 1008 पार्श्वनाथ प्राचीन मंदिर के समीप देश का पहला स्वतंत्र माता पद्मावती मंदिर बनकर तैयार हो गया है। 1008 चंद्र प्रभु प्राचीन अतिशय क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा निर्मित यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बन गया है।
मंदिर कमेटी के संयोजक मनोज जैन ने बताया कि जैन मंदिरों में इनकी मूर्ति होती है, लेकिन यह देश का पहला ऐसा स्थान है जहां माता का एक अलग और पूर्णतः स्वतंत्र मंदिर बनाया गया है। इस नवनिर्मित मंदिर में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की रक्षिका (शासन देवी) माता पद्मावती की 51 इंच ऊंची और करीब 800 किलो वजन की भव्य अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की गई है।
मंदिर की दीवारों पर जैन धर्म के पवित्र प्रतीक चिन्ह, बेहद खूबसूरत नक्काशी और णमोकार महामंत्र को भव्यता से उकेरा गया है। मुख्य प्रतिमा के साथ ही यहां माता पद्मावती और धरणेंद्र देव की छोटी मूर्तियां भी लगाई गई हैं, जिन पर नाग का छत्र सुशोभित है। जैन पौराणिक कथा के अनुसार, पूर्व जन्म में भगवान पार्श्वनाथ ने जलती लकड़ी से एक नाग-नागिन के जोड़े को बचाया था, जिससे वे अगले जन्म में स्वर्ग के देव-देवी (धरणेंद्र और पद्मावती) बने। जब कमठ ने भगवान पर मूसलाधार बारिश का उपसर्ग (अत्याचार) किया, तब इन्होंने ही नाग छत्र तानकर प्रभु की रक्षा की थी। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सुबह 5:30 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 10:30 बजे तक खुलता है। हाल ही में यहां सावन मास में माता की गोद भराई की पूजा धूमधाम से संपन्न हुई।
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नंबर गेम- 800 किलो की मूर्ति स्थापित की गई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में जैकबपुरा ने एक नया इतिहास रचा है। यहां स्थित 1008 पार्श्वनाथ प्राचीन मंदिर के समीप देश का पहला स्वतंत्र माता पद्मावती मंदिर बनकर तैयार हो गया है। 1008 चंद्र प्रभु प्राचीन अतिशय क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा निर्मित यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बन गया है।
मंदिर कमेटी के संयोजक मनोज जैन ने बताया कि जैन मंदिरों में इनकी मूर्ति होती है, लेकिन यह देश का पहला ऐसा स्थान है जहां माता का एक अलग और पूर्णतः स्वतंत्र मंदिर बनाया गया है। इस नवनिर्मित मंदिर में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की रक्षिका (शासन देवी) माता पद्मावती की 51 इंच ऊंची और करीब 800 किलो वजन की भव्य अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की गई है।
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मंदिर की दीवारों पर जैन धर्म के पवित्र प्रतीक चिन्ह, बेहद खूबसूरत नक्काशी और णमोकार महामंत्र को भव्यता से उकेरा गया है। मुख्य प्रतिमा के साथ ही यहां माता पद्मावती और धरणेंद्र देव की छोटी मूर्तियां भी लगाई गई हैं, जिन पर नाग का छत्र सुशोभित है। जैन पौराणिक कथा के अनुसार, पूर्व जन्म में भगवान पार्श्वनाथ ने जलती लकड़ी से एक नाग-नागिन के जोड़े को बचाया था, जिससे वे अगले जन्म में स्वर्ग के देव-देवी (धरणेंद्र और पद्मावती) बने। जब कमठ ने भगवान पर मूसलाधार बारिश का उपसर्ग (अत्याचार) किया, तब इन्होंने ही नाग छत्र तानकर प्रभु की रक्षा की थी। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर सुबह 5:30 से दोपहर 1:00 बजे और शाम 4:00 से रात 10:30 बजे तक खुलता है। हाल ही में यहां सावन मास में माता की गोद भराई की पूजा धूमधाम से संपन्न हुई।
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