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Gurugram News: रोका था क्षतिग्रस्त ट्रक का क्लेम, अब ब्याज समेत देने होंगे 11.18 लाख रुपये
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उपभोक्ता आयोग से
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बीमा कंपनी ने क्षतिग्रस्त हुए ट्रक के क्लेम को हादसे के दौरान दूसरा चालक होने के नाम पर रोक दिया। इसके खिलाफ ट्रक चालक ने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आयोग ने 11.18 लाख रुपये के क्लेम को ब्याज समेत देने का आदेश सुनाया है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
रेवाड़ी के तहसील कोसली के नाहड़ गांव निवासी राम निवास ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि आठ जून 2018 को राजस्थान के जिला पाली में अपना ट्रक चला रहे थे। उसी दौरान सड़क पर एक गाय आ गई। उसको बचाने के चलते ट्रक अनियंत्रित होकर ट्रेलर से भिड़ गया। वह अपने क्षतिग्रस्त ट्रक को रेवाड़ी के एक वर्कशाप में लेकर आए। वहां पर ट्रक को ठीक करने के लिए 11.18 लाख रुपये का खर्च बताया गया। उन्होंने बीमा कंपनी में क्षतिग्रस्त ट्रक को ठीक कराने की राशि के क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि हादसे के समय राम निवास ट्रक को नहीं चला रहे थे। उस समय सुधीर कुमार ट्रक को चला रहे थे। तथ्य को छुपाने पर बीमा पॉलिसी की शर्तें की अवहेलना की गई है।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि हादसे के समय ट्रक को राम निवास ही चला रहे थे। उन्होंने पुलिस को हादसे की जानकारी दी थी। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 11.18 लाख रुपये नौ प्रतिशत के ब्याज दर से दें। साथ ही शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी होने पर एक लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बीमा कंपनी ने क्षतिग्रस्त हुए ट्रक के क्लेम को हादसे के दौरान दूसरा चालक होने के नाम पर रोक दिया। इसके खिलाफ ट्रक चालक ने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आयोग ने 11.18 लाख रुपये के क्लेम को ब्याज समेत देने का आदेश सुनाया है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
रेवाड़ी के तहसील कोसली के नाहड़ गांव निवासी राम निवास ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि आठ जून 2018 को राजस्थान के जिला पाली में अपना ट्रक चला रहे थे। उसी दौरान सड़क पर एक गाय आ गई। उसको बचाने के चलते ट्रक अनियंत्रित होकर ट्रेलर से भिड़ गया। वह अपने क्षतिग्रस्त ट्रक को रेवाड़ी के एक वर्कशाप में लेकर आए। वहां पर ट्रक को ठीक करने के लिए 11.18 लाख रुपये का खर्च बताया गया। उन्होंने बीमा कंपनी में क्षतिग्रस्त ट्रक को ठीक कराने की राशि के क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि हादसे के समय राम निवास ट्रक को नहीं चला रहे थे। उस समय सुधीर कुमार ट्रक को चला रहे थे। तथ्य को छुपाने पर बीमा पॉलिसी की शर्तें की अवहेलना की गई है।
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आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि हादसे के समय ट्रक को राम निवास ही चला रहे थे। उन्होंने पुलिस को हादसे की जानकारी दी थी। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 11.18 लाख रुपये नौ प्रतिशत के ब्याज दर से दें। साथ ही शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी होने पर एक लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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