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Gurugram News: पूर्व सैनिकों का भी खौला था खून, मोर्चाें पर भेजने की मांगी थी इजाजत

Fri, 06 Jun 2025 11:13 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jun 2025 11:13 PM IST
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The blood of the ex-soldiers was also boiling, they had asked for permission to send them to the fronts
ऑपरेशन सिंदूर : गुरुग्राम समेत विभिन्न राज्यों से सेना प्रमुख को पूर्व अफसरों व जवानों ने भेजे थे पत्र
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- पूर्व सैनिकों के ''''स्वयं से पहले सेवा'''' जज्बे पर गर्व करते हुए अब सेना ने किया उनका आभार व्यक्त



मोहित धुपड़

गुरुग्राम। जय हिंद... नायब सूबेदार भोपाल सिंह चाैधरी मेरा नाम है, तीन युद्ध लड़ चुका हूं, अभी भी लड़ सकता हूं वतन के लिए... आप बोलेंगे यह लोग क्या करेंगे युद्ध में ? अरे हम क्या नहीं करेंगे... दुश्मन का बम अपने सीने पर ओटेंगे, उसे धरती मां के कलेजे पर नहीं गिरने देंगे... सेवानिवृत्त हो चुके नायब सूबेदार चाैधरी का यह जज्बा इस बात को दर्शाता है कि एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता।

इसी जज्बे से ओतप्रोत कई पत्र ऑपरेशन सिंदूर के दाैरान गुरुग्राम समेत देश के विभिन्न राज्यों से सेना प्रमुख को भेजे गए थे। इस ऑपरेशन के चलते जहां भारत और पाकिस्तान के बीच भारी तनाव और टकराव की स्थिति बनी हुई थी, वहीं उन परिस्थितियों के मद्देनजर पूर्व सैनिकों का खून भी खाैल रहा था। सेना प्रमुख को भेजे गए पत्रों में पूर्व सैनिकों ने खुद को उपयुक्त व सक्षम बताते हुए मोर्चे पर भेजे जाने की इजाजत मांगी थी।
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पूर्व सैनिकों के जज्बे पर गर्व करते हुए सेना ने अब उनका आभार व्यक्त किया है। उनकी हिम्मत को सलाम करते हुए सेना ने उनके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे बहादुर दिग्गजों की अदम्य भावना देखने को मिली, जो कि पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल है, क्योंकि वे एक बार फिर मातृभूमि की रक्षा व सेवा करने के लिए आगे बढ़े हैं। उनका अटूट समर्पण ''''स्वयं से पहले सेवा'''' का प्रतीक है, जो कि देशवासियों को प्रेरित कर रहा है। साथ ही हर दिल में आशा भी जगा रहा है। भारतीय सेना हमेशा गर्वित रहेगी, हमेशा आभारी रहेगी - क्योंकि उनके बलिदान की भावना हमारे ''''राष्ट्र प्रथम'''' भावना की नींव है।
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सेना प्रमुख तक पहुंचे सेवानिवृत्त हो चुके अफसरों व सैनिकों के कुछ पत्रों में मोहाली से कैप्टन अमरजीत ने कहा कि सैनिक मरते दम तक अपनी सर्विस से सेवानिवृत्त नहीं होता। वे वर्ष 1971 के युद्ध में भाग ले चुके हैं और अभी 75 वर्ष के हैं। वे मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट हैं, लिहाजा उन्हें मोर्चों पर भेजकर उनके अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है। वे अकेले नहीं हैं, उनके साथ अन्य सेवानिवृत्त सैनिक भी हैं, जो मोर्चों पर डटने को तैयार हैं।

दिल्ली से कर्नल रमेश खत्री ने लिखा कि भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे टकराव और सैन्य बलों की तैनाती के मद्देनजर वे खुद को किसी भी असाइनमेंट में भेजे जाने के लिए ऑफर देते हैं। ऐसा होने पर वे खुद को भाग्यशाली व गाैरवान्वित मानेंगे। गुरुग्राम से लेफ्टिनेंट जनरल एमके मग्गू ने पत्र में कहा है कि पहलगाम में आतंकी घटना के बाद सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ जो एक्शन लिया है, वह उचित है और गर्व करने योग्य है। वे सेना प्रमुख से आग्रह करते हैं कि उन्हें किसी भी क्षमता में फिर से राष्ट्र की रक्षा व सेवा करने का मौका दिया जाए। इसकी एवज में उन्हें कुछ नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें किसी भी मोर्चे पर तैनात किया जा सकता है।


इसी तरह कई सेवानिवृत्त जवानों और अफसरों के पत्र सेना प्रमुख के पास पहुंचे, जिनमें उन्होंने देश पर मर मिटने का जज्बा दिखाते हुए फिर से सेवा का मौका मांगा है। फिलहाल ऑपरेशन सिंदूर को स्थगित कर दिया गया है लेकिन सेना को अपने इन पूर्व सैनिकों पर पूरी तरह नाज है, जिसके चलते अब उनका आभार व्यक्त किया जा रहा है।
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