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Gurugram News: बैंक ने खाते से अवैध रूप से काटे थे रुपये, अब मुआवजे के साथ देने होंगे
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-दो बार में खाते से कट गए थे 53,614 रुपये, खाता धारक ने बैंक से भी की थी शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से खाताधारक के खाते से बिना किसी कारण के 53,614 रुपये काटने पर बैंक को ब्याज समेत रुपये वापस देने होंगे। यह आदेश जिला उपभोक्ता आयोग की सदस्य खुशविंदर कौर ने दिया है। सेक्टर-23 निवासी प्रशांत मिश्रा ने उपभोक्ता आयोग में दायर की याचिका में बताया कि जुलाई और सितंबर 2020 में उनके बैंक खाते से बिना किसी पूर्व सूचना, मांग या नोटिस के दो बार में 26,807 और 26,807 रुपये कट गए। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बैंक अधिकारियों को कई बार शिकायत देने और लीगल नोटिस भेजने के बावजूद रकम वापस नहीं की गई।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बैंक की ओर से ईमेल के माध्यम से स्वयं यह स्वीकार किया गया था कि रकम गलत तरीके से कटी है और पांच कार्य दिवस में रिफंड का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। आयोग ने इसे बैंक की गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी माना। आयोग ने 45 दिनों के भीतर पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर 20 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 11 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से खाताधारक के खाते से बिना किसी कारण के 53,614 रुपये काटने पर बैंक को ब्याज समेत रुपये वापस देने होंगे। यह आदेश जिला उपभोक्ता आयोग की सदस्य खुशविंदर कौर ने दिया है। सेक्टर-23 निवासी प्रशांत मिश्रा ने उपभोक्ता आयोग में दायर की याचिका में बताया कि जुलाई और सितंबर 2020 में उनके बैंक खाते से बिना किसी पूर्व सूचना, मांग या नोटिस के दो बार में 26,807 और 26,807 रुपये कट गए। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बैंक अधिकारियों को कई बार शिकायत देने और लीगल नोटिस भेजने के बावजूद रकम वापस नहीं की गई।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बैंक की ओर से ईमेल के माध्यम से स्वयं यह स्वीकार किया गया था कि रकम गलत तरीके से कटी है और पांच कार्य दिवस में रिफंड का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। आयोग ने इसे बैंक की गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी माना। आयोग ने 45 दिनों के भीतर पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर 20 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 11 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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