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Gurugram News: सूरत नगर में कुत्तों का आतंक, सहमे लोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सूरत नगर फेज एक के वासी इन दिनों कॉलोनी की गली नंबर 19 और 19ए में घूम रहे लावारिस कुत्तों के आतंक से सहमे हैं। लोगों के दिल में कुत्तों का डर इस कदर घर कर गया है कि कोई जरूरी काम हो तभी पूरे सुरक्षा उपकरणों (डंडे या लाठी) के साथ घर से बाहर निकल रहे हैं। स्कूल आने जाने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोग पूरी एहतियात बरत रहे हैं।
गली में निकलने से पहले कुत्तों के बारे में जांच पड़ताल (कहीं बैठा या नहीं) करते हैं, उसके बाद ही बच्चों को बाहर लेकर निकलते हैं। ये कुत्ते अभी तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। पिछले एक सप्ताह से कुत्तों से डर का आलम यह है कि दूध और अखबार डालने आने वालों ने कॉलोनी में आना बंद कर दिया है।
आशिष द्विवेदी ने बताया कि वह कॉलोनी में काम करने आया था, उसे कुत्ते ने काट लिया। उसे अब काम छोड़कर इलाज कराना पड़ रहा है। पवन कुमार शर्मा, महेंद्र चावला और नंदलाल जयसवाल ने कहा कि गली में 10 से 12 कुत्ता कोई छोड़ गया। ये कुत्ते आते-जाते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अभी तक 10 से अधिक लोगों को कट चुके हैं। नगर निगम में शिकायत भी की, लेकिन कोई हल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के साथ छोटे बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। बच्चों का खेलना और बुजुर्गों का पार्कों तक जाना बंद हो गया है। इन लोगों ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी इतने लापरवाह हैं कि न तो मिल रहे हैं और न ही फोन उठा रहे हैं। निगम के मेडिकल ऑफिसर ने इससे अपना पल्ला झाड़ लिया और संयुक्त आयुक्त डॉ. नरेश कुमार कोई जवाब नहीं दे रहे। डॉ. नरेश कुुमार से संपर्क किया तो उन्होंने देर तक कोई जवाब नहीं दिया। बाद में फोन ही काट दिया।
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गुरुग्राम। सूरत नगर फेज एक के वासी इन दिनों कॉलोनी की गली नंबर 19 और 19ए में घूम रहे लावारिस कुत्तों के आतंक से सहमे हैं। लोगों के दिल में कुत्तों का डर इस कदर घर कर गया है कि कोई जरूरी काम हो तभी पूरे सुरक्षा उपकरणों (डंडे या लाठी) के साथ घर से बाहर निकल रहे हैं। स्कूल आने जाने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोग पूरी एहतियात बरत रहे हैं।
गली में निकलने से पहले कुत्तों के बारे में जांच पड़ताल (कहीं बैठा या नहीं) करते हैं, उसके बाद ही बच्चों को बाहर लेकर निकलते हैं। ये कुत्ते अभी तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। पिछले एक सप्ताह से कुत्तों से डर का आलम यह है कि दूध और अखबार डालने आने वालों ने कॉलोनी में आना बंद कर दिया है।
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आशिष द्विवेदी ने बताया कि वह कॉलोनी में काम करने आया था, उसे कुत्ते ने काट लिया। उसे अब काम छोड़कर इलाज कराना पड़ रहा है। पवन कुमार शर्मा, महेंद्र चावला और नंदलाल जयसवाल ने कहा कि गली में 10 से 12 कुत्ता कोई छोड़ गया। ये कुत्ते आते-जाते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अभी तक 10 से अधिक लोगों को कट चुके हैं। नगर निगम में शिकायत भी की, लेकिन कोई हल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के साथ छोटे बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। बच्चों का खेलना और बुजुर्गों का पार्कों तक जाना बंद हो गया है। इन लोगों ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी इतने लापरवाह हैं कि न तो मिल रहे हैं और न ही फोन उठा रहे हैं। निगम के मेडिकल ऑफिसर ने इससे अपना पल्ला झाड़ लिया और संयुक्त आयुक्त डॉ. नरेश कुमार कोई जवाब नहीं दे रहे। डॉ. नरेश कुुमार से संपर्क किया तो उन्होंने देर तक कोई जवाब नहीं दिया। बाद में फोन ही काट दिया।
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