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Gurugram News: आधुनिक तकनीक से होगी बरसाती नालों की निगरानी, लगेंगे सेंसर
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5.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में जलभराव की स्थिति पर प्रभावी निगरानी और बरसाती नालों में पानी के बहाव का सटीक आकलन करने के लिए जीएमडीए प्रमुख नालों पर रडार आधारित सेंसर लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत मास्टर ड्रेन लेग-1, 2, 3, 4 और मानेसर ड्रेन पर रडार लेवल सेंसर व सरफेस वेलोसिटी सेंसर लगाए जाएंगे। इस पर करीब 5.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।
सेंसर के माध्यम से नालों में पानी के फ्लो वॉल्यूम, जलस्तर और बहाव की गति (वेलोसिटी) समेत अन्य मानकों की निगरानी की जाएगी। इससे बारिश के दौरान नालों में बढ़ रहे पानी के स्तर और बहाव की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से इसके लिए सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। वर्तमान में शहर के प्रमुख बरसाती नालों में बारिश के दौरान पानी के बहाव और जलस्तर की निगरानी के लिए कर्मचारियों को मौके पर निरीक्षण करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सेंसर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नालों की स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। इससे जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक कदम उठाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
जीएमडीए अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के तहत प्रमुख ड्रेनों पर आधुनिक तकनीक से पानी के बहाव का डाटा जुटाया जाएगा। इससे भविष्य में बरसाती पानी की निकासी की क्षमता का आकलन करने और ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। इस परियोजना में पांच साल के ऑपरेशन और मेंटेनेंस का कार्य भी शामिल है।
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शहर के प्रमुख बरसाती नाले
जीएमडीए के चार प्रमुख बरसाती नाले हैं, जो शहर के बरसाती पानी को नजफगढ़ नाले तक ले जाते हैं। लेग-1 (सिकंदरपुर से पालम विहार वाया नजफगढ़), लेग-2 (सेक्टर 42 हुडा सिटी सेंटर से नजफगढ़) और लेग-3 (घाटा गांव से वाटिका चौक, हीरो होंडा चौक, सेक्टर 99 से नजफगढ़ ड्रेन) जिसे बादशाहपुर ड्रेन भी कहा जाता है। वाटिका चौक से एसपीआर के साथ एनएच 48 तक लेग-4 है।
बरसाती नालों में पानी के बहाव की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए जीएमडीए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगा। प्रमुख बरसाती नालों पर रडार आधारित सेंसर लगाए जाएंगे। इन सेंसर के जरिए नालों में पानी के स्तर और बहाव की गति की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी।
- विक्रम सिंह, कार्यकारी अभियंता, जीएमडीए
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मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में जलभराव की स्थिति पर प्रभावी निगरानी और बरसाती नालों में पानी के बहाव का सटीक आकलन करने के लिए जीएमडीए प्रमुख नालों पर रडार आधारित सेंसर लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत मास्टर ड्रेन लेग-1, 2, 3, 4 और मानेसर ड्रेन पर रडार लेवल सेंसर व सरफेस वेलोसिटी सेंसर लगाए जाएंगे। इस पर करीब 5.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।
सेंसर के माध्यम से नालों में पानी के फ्लो वॉल्यूम, जलस्तर और बहाव की गति (वेलोसिटी) समेत अन्य मानकों की निगरानी की जाएगी। इससे बारिश के दौरान नालों में बढ़ रहे पानी के स्तर और बहाव की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से इसके लिए सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। वर्तमान में शहर के प्रमुख बरसाती नालों में बारिश के दौरान पानी के बहाव और जलस्तर की निगरानी के लिए कर्मचारियों को मौके पर निरीक्षण करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सेंसर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नालों की स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। इससे जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक कदम उठाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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जीएमडीए अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के तहत प्रमुख ड्रेनों पर आधुनिक तकनीक से पानी के बहाव का डाटा जुटाया जाएगा। इससे भविष्य में बरसाती पानी की निकासी की क्षमता का आकलन करने और ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। इस परियोजना में पांच साल के ऑपरेशन और मेंटेनेंस का कार्य भी शामिल है।
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शहर के प्रमुख बरसाती नाले
जीएमडीए के चार प्रमुख बरसाती नाले हैं, जो शहर के बरसाती पानी को नजफगढ़ नाले तक ले जाते हैं। लेग-1 (सिकंदरपुर से पालम विहार वाया नजफगढ़), लेग-2 (सेक्टर 42 हुडा सिटी सेंटर से नजफगढ़) और लेग-3 (घाटा गांव से वाटिका चौक, हीरो होंडा चौक, सेक्टर 99 से नजफगढ़ ड्रेन) जिसे बादशाहपुर ड्रेन भी कहा जाता है। वाटिका चौक से एसपीआर के साथ एनएच 48 तक लेग-4 है।
बरसाती नालों में पानी के बहाव की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए जीएमडीए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करेगा। प्रमुख बरसाती नालों पर रडार आधारित सेंसर लगाए जाएंगे। इन सेंसर के जरिए नालों में पानी के स्तर और बहाव की गति की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी।
- विक्रम सिंह, कार्यकारी अभियंता, जीएमडीए