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करोड़ो की चोरी मामले में दिन भर इंतजार करती रही एसटीएफ 19-39-18
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गुरुग्राम। पांच माह पहले वाटिका सिटी से अल्फा बिल्डर के ठिकाने पर हुई करोड़ों की चोरी के मामले में एसटीएफ ने कमिश्नरी में तैनात रहे आईपीएस अधिकारी धीरज सेतिया को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा है। नोटिस के अनुसार आईपीएस अधिकारी को सोमवार को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। एसटीएफ के अधिकारी दिन भर इंतजार करते रहे मगर सेतिया जांच में शामिल होने नहीं पहुंचे।
बता दें कि अल्फा कंपनी के ठिकाने पर दो अगस्त को चोरी हुई थी। जिसमें दिल्ली के गैंगेस्टर विकास लगरपुरिया का नाम आया था। पहले तो कंपनी की ओर से इसे मामूली चोरी बताकर 20 दिन बाद खेड़की दौला थाने में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया। कंपनी की ओर से पुलिस को कुछ बताया भी नहीं गया। बाद में लाखों की चोरी की बात सामने आई। इसके बाद मामले की जांच सीआईए-31 को दी गई। तब चोरी में दिल्ली के गैंगेस्टर विकास लगरपुरिया का हाथ होने का खुलासा हुआ। साथ ही दिल्ली क्राइम ब्रांच के एएसआई विकास गुलिया को गिरफ्तार किया गया। बाद में पता चला कि चोरी लाखों की नहीं करोड़ों की है। उसके बाद पुलिस महानिदेशक पी के अग्रवाल ने जांच एसटीएफ को सौंप दी।
एसटीएफ की ओर से जांच शुरू होते ही दिल्ली के दो फाइनेंसरों ने एक करोड़ 90 रुपये, तीन किलो सोना व 50 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा के साथ एसटीएफ के सामने सरेंडर कर दिया। इनसे पूछताछ में तीन डॉक्टरों का नाम सामने आया। दिल्ली के द्वारका के रहने वाले डॉक्टर के साथ गुरुग्राम के दो डॉ. सचिन्द्र जैन व डॉ. जेपी सिंह को गिरफ्तार किया गया। तीनों डॉक्टर न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल में हैं। इसी मामले की जांच के चलते एसटीएफ ने कमिश्नरी में तैनात रहे डीसीपी धीरज सेतिया को नोटिस भेजा है। सात दिन पहले भेजे गए नोटिस के तहत सोमवार को उन्हें आना था, मगर वह जांच में शामिल होने नहीं आए।
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बता दें कि अल्फा कंपनी के ठिकाने पर दो अगस्त को चोरी हुई थी। जिसमें दिल्ली के गैंगेस्टर विकास लगरपुरिया का नाम आया था। पहले तो कंपनी की ओर से इसे मामूली चोरी बताकर 20 दिन बाद खेड़की दौला थाने में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया। कंपनी की ओर से पुलिस को कुछ बताया भी नहीं गया। बाद में लाखों की चोरी की बात सामने आई। इसके बाद मामले की जांच सीआईए-31 को दी गई। तब चोरी में दिल्ली के गैंगेस्टर विकास लगरपुरिया का हाथ होने का खुलासा हुआ। साथ ही दिल्ली क्राइम ब्रांच के एएसआई विकास गुलिया को गिरफ्तार किया गया। बाद में पता चला कि चोरी लाखों की नहीं करोड़ों की है। उसके बाद पुलिस महानिदेशक पी के अग्रवाल ने जांच एसटीएफ को सौंप दी।
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एसटीएफ की ओर से जांच शुरू होते ही दिल्ली के दो फाइनेंसरों ने एक करोड़ 90 रुपये, तीन किलो सोना व 50 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा के साथ एसटीएफ के सामने सरेंडर कर दिया। इनसे पूछताछ में तीन डॉक्टरों का नाम सामने आया। दिल्ली के द्वारका के रहने वाले डॉक्टर के साथ गुरुग्राम के दो डॉ. सचिन्द्र जैन व डॉ. जेपी सिंह को गिरफ्तार किया गया। तीनों डॉक्टर न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल में हैं। इसी मामले की जांच के चलते एसटीएफ ने कमिश्नरी में तैनात रहे डीसीपी धीरज सेतिया को नोटिस भेजा है। सात दिन पहले भेजे गए नोटिस के तहत सोमवार को उन्हें आना था, मगर वह जांच में शामिल होने नहीं आए।
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