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Gurugram News: सरकारी स्कूलों के खेल मैदान बदहाल, निजी स्कूलों पर बढ़ी निर्भरता
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-54 जिला स्तरीय खेल स्पर्धाओं में सिर्फ छह सरकारी स्कूलों में हुए मुकाबले, 31 प्रतियोगिताओं की मेजबानी निजी स्कूलों ने की
शिवम राजपूत
गुरुग्राम। जिले में स्कूली खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के दावों के बीच सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। इस बार आयोजित 54 जिला स्तरीय खेल स्पर्धाओं में सरकारी स्कूलों में महज छह खेलों के मुकाबले ही कराए जा सके। वहीं, 31 खेल प्रतियोगिताओं के लिए शिक्षा विभाग को 22 निजी स्कूलों के खेल परिसरों पर निर्भर रहना पड़ा। इससे सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं की कमी और निजी स्कूलों पर बढ़ती निर्भरता सामने आई है।
आंकड़ों के अनुसार, जिला स्तरीय 54 खेल स्पर्धाओं में 17 प्रतियोगिताएं खेल विभाग के 10 स्टेडियम और खेल नर्सरियों में हुईं। वहीं छह सरकारी स्कूलों में केवल छह खेलों के मुकाबले आयोजित हो सके। इसके मुकाबले 22 निजी स्कूलों में 31 खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी की गई। यानी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों वाले सरकारी स्कूल जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन में ही पीछे रह गए।
सुविधाओं के अंतर का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर-
खेल मैदान और सुविधाओं का अंतर अब खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जिला स्तरीय मुकाबलों में 70 प्रतिशत से अधिक पदक और ट्रॉफियां निजी स्कूलों के खिलाड़ियों के खाते में जा रही हैं। निजी स्कूलों में आधुनिक ट्रैक, कवर्ड इंडोर हॉल, सिंथेटिक कोर्ट और नियमित कोचिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके विपरीत कई सरकारी स्कूलों में मैदानों के रखरखाव, खेल उपकरण और नियमित अभ्यास के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है।
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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कई खिलाड़ी ग्रामीण और सामान्य परिवारों से आते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर वे जिला स्तर तक पहुंचते हैं। लेकिन प्रतियोगिताओं में उन्हें बेहतर खेल सुविधाओं और नियमित प्रशिक्षण हासिल करने वाले खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ता है। ऐसे में संसाधनों का अंतर उनके प्रदर्शन पर भी असर डालता है। संवाद
बारिश ने भी बढ़ाई परेशानी-
एईओ जगदीश अहलावत ने बताया कि बारिश के कारण कई सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों में पानी भर गया था। इससे वहां प्रतियोगिताएं कराना संभव नहीं हो सका। सरकारी स्कूलों के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। जहां सुविधाओं की कमी है, वहां निदेशालय को मांग भेजी जा रही है।
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शिवम राजपूत
गुरुग्राम। जिले में स्कूली खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के दावों के बीच सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। इस बार आयोजित 54 जिला स्तरीय खेल स्पर्धाओं में सरकारी स्कूलों में महज छह खेलों के मुकाबले ही कराए जा सके। वहीं, 31 खेल प्रतियोगिताओं के लिए शिक्षा विभाग को 22 निजी स्कूलों के खेल परिसरों पर निर्भर रहना पड़ा। इससे सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं की कमी और निजी स्कूलों पर बढ़ती निर्भरता सामने आई है।
आंकड़ों के अनुसार, जिला स्तरीय 54 खेल स्पर्धाओं में 17 प्रतियोगिताएं खेल विभाग के 10 स्टेडियम और खेल नर्सरियों में हुईं। वहीं छह सरकारी स्कूलों में केवल छह खेलों के मुकाबले आयोजित हो सके। इसके मुकाबले 22 निजी स्कूलों में 31 खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी की गई। यानी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों वाले सरकारी स्कूल जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन में ही पीछे रह गए।
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सुविधाओं के अंतर का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर-
खेल मैदान और सुविधाओं का अंतर अब खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जिला स्तरीय मुकाबलों में 70 प्रतिशत से अधिक पदक और ट्रॉफियां निजी स्कूलों के खिलाड़ियों के खाते में जा रही हैं। निजी स्कूलों में आधुनिक ट्रैक, कवर्ड इंडोर हॉल, सिंथेटिक कोर्ट और नियमित कोचिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके विपरीत कई सरकारी स्कूलों में मैदानों के रखरखाव, खेल उपकरण और नियमित अभ्यास के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है।
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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कई खिलाड़ी ग्रामीण और सामान्य परिवारों से आते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर वे जिला स्तर तक पहुंचते हैं। लेकिन प्रतियोगिताओं में उन्हें बेहतर खेल सुविधाओं और नियमित प्रशिक्षण हासिल करने वाले खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ता है। ऐसे में संसाधनों का अंतर उनके प्रदर्शन पर भी असर डालता है। संवाद
बारिश ने भी बढ़ाई परेशानी-
एईओ जगदीश अहलावत ने बताया कि बारिश के कारण कई सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों में पानी भर गया था। इससे वहां प्रतियोगिताएं कराना संभव नहीं हो सका। सरकारी स्कूलों के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। जहां सुविधाओं की कमी है, वहां निदेशालय को मांग भेजी जा रही है।