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Gurugram News: कोई आईएएस बनना चाहता है तो कोई सीए, डीएसपी
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मेधावी सम्मान पाने वाले छात्र-छात्रओं ने बताए अपने सपने
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अमर उजाला की ओर से शनिवार को पंचकुला स्थित इंद्र धनुष ऑडिटोरियम में जिले के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सम्मान पाने वाले जिले के विद्यार्थियों के चेहरे खिले नजर आए।
विद्यार्थियों ने भविष्य की योजनाएं साझा कीं। किसी ने कहा, मुझे आईएएस बनना है तो किसी ने अपना लक्ष्य डीएसपी बताया। कुछ छात्रों ने कहा कि उन्हें शिक्षक और सीए बनना है। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों की प्रतिभा और उपलब्धि पर बहुत गर्व है उनके अनुसार बच्चों के सपनों को पंख लग चुके हैं।
मैं टीचर बनना चाहती हूं। मेरी इस सफलता के पीछे मेरे माता पिता के साथ साथ गणित अध्यापक रामपाल का बड़ा योगदान है।-निधी, कक्षा-10
मुझे चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना है। पढ़ाई में सबसे ज्यादा सहयोग मेरे माता-पिता और अध्यापकों का रहा है। मां रेशमा आदर्श हैं। -सानिया, कक्षा-10
मैं आईएएस बनकर ने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। माता-पिता और अध्यापकों का सबसे ज्यादा सहयोग रहा है। -निधि, कक्षा-12
मुझे भविष्य में डीएससी बनना है। इसके लिए मैं अभी से तैयारी कर रहा हूं। पढ़ाई में सबसे ज्यादा सहयोग मेरे माता-पिता का रहा है।- हितेश, कक्षा-12
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अमर उजाला की ओर से शनिवार को पंचकुला स्थित इंद्र धनुष ऑडिटोरियम में जिले के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सम्मान पाने वाले जिले के विद्यार्थियों के चेहरे खिले नजर आए।
विद्यार्थियों ने भविष्य की योजनाएं साझा कीं। किसी ने कहा, मुझे आईएएस बनना है तो किसी ने अपना लक्ष्य डीएसपी बताया। कुछ छात्रों ने कहा कि उन्हें शिक्षक और सीए बनना है। अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों की प्रतिभा और उपलब्धि पर बहुत गर्व है उनके अनुसार बच्चों के सपनों को पंख लग चुके हैं।
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मैं टीचर बनना चाहती हूं। मेरी इस सफलता के पीछे मेरे माता पिता के साथ साथ गणित अध्यापक रामपाल का बड़ा योगदान है।-निधी, कक्षा-10
मुझे चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना है। पढ़ाई में सबसे ज्यादा सहयोग मेरे माता-पिता और अध्यापकों का रहा है। मां रेशमा आदर्श हैं। -सानिया, कक्षा-10
मैं आईएएस बनकर ने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। माता-पिता और अध्यापकों का सबसे ज्यादा सहयोग रहा है। -निधि, कक्षा-12
मुझे भविष्य में डीएससी बनना है। इसके लिए मैं अभी से तैयारी कर रहा हूं। पढ़ाई में सबसे ज्यादा सहयोग मेरे माता-पिता का रहा है।- हितेश, कक्षा-12