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Gurugram News: बूचड़खानों की मनमानी का दंश झेल रहे लोग, गंभीर बीमारियों का खतरा
Wed, 17 Sep 2025 11:13 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Wed, 17 Sep 2025 11:13 PM IST
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रिजवान खान
नगीना। जिले के विभिन्न गांवों में संचालित बूचड़खानों का दुष्प्रभाव अब धीरे-धीरे क्षेत्र के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। बूचड़खानों से निकलने वाली गंदगी से जहां एक तरफ वातावरण खराब हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर लोग चर्म राेग, कैंसर, टीबी व सांस जैसी घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। बूचड़खानों के आसपास गांवों में फैल रही बीमारियों के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करने के कारण लोग बूचड़खानों का दंश झेलने पर मजबूर हैं।
हालांकि, दिन प्रतिदिन बढ़ती समस्याओं को देखते हुए अब क्षेत्र के जिम्मेदार लगातार इन बूचड़खानों का विरोध कर रहे हैं। जलालपुर, टपकन, सटकपुरी, मांड़ीखेड़ा और नाई नंगला गांव सहित आसपास के कई गांवों में बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे चर्म रोग से प्रभावित हो रहे हैं, जिनके चेहरे और शरीर पर चर्म रोग के गंभीर निशान दिखाई दे रहे हैं।
20 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत
मैनुद्दीन निवासी टपकन ने बताया कि गांव में करीब छह हजार की आबादी है जिनमें हर पांचवां व्यक्ति चर्म रोग व सांस की बीमारी से ग्रस्त है। इसके अलावा 60 वर्षीय सब्बीर पुत्र रहमत, समय खान पुत्र नसीबा, सहाबु पुत्र ममरेज, इब्राहिम पुत्र हिम्मत, रत्ती पुत्र गफूर, सहाबु पुत्र सुमेर सहित 20 से अधिक लोग कैंसर से जंग लड़ते-लड़ते जिंदगी की जंग हार गए। यही नहीं हाल ही में छह लोग कैंसर की बीमारी से ग्रस्त है जिनका इलाज चल रहा है।
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टीबी और सांस की बीमारी से फैल रही दहशत
जलालपुर, मांड़ीखेड़ा व सटकपुरी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि टीबी व सांस की बीमारी के लोग तेजी से शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि बूचड़खाने से निकलने वाले जहरीले प्रदूषण से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। बूचड़खाने से निकलने वाले जहरीले पानी को खुले में छोड़ा जाता है। पीने योग्य पानी दूषित है, इससे ग्रामीणों को टीबी की बीमारी हो रही है।
निमार्णाधीन हैं बूचड़खाने
मुबारिक, मास्टर वहाब, रसीद एडवोकेट सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि जिले में 9 बूचड़खानें संचालित हैं। 20 से अधिक बूचड़खानों की परमिशन के लिए अप्लाई किया हुआ हैं। उन्होंने कहा कि बूचड़खानों से निकलने वाले अवशेष और गंदगी से वातावरण दूषित हो चुका है। बदबू और मांस के कचरे ने न केवल वातावरण को बिगाड़ा है, बल्कि उससे निकलने वाले जीवाणु और विषाणु अब लोगों की त्वचा तक पहुंचकर उन्हें बीमार कर रहे हैं।
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जिन गांवों में बूचड़खाने संचालित हैं, उन गांव के लिए एक टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी। पता लगाया जाएगा कि जो लोग कैंसर, टीबी व सांस जैसी बीमारी से ग्रस्त है, उनकी बीमारी की असल वजह क्या है। नियमों का उल्लंघन करने वाले बूचड़खानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अखिल पिलानी, जिला उपायुक्त नूंह
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नगीना। जिले के विभिन्न गांवों में संचालित बूचड़खानों का दुष्प्रभाव अब धीरे-धीरे क्षेत्र के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। बूचड़खानों से निकलने वाली गंदगी से जहां एक तरफ वातावरण खराब हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर लोग चर्म राेग, कैंसर, टीबी व सांस जैसी घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। बूचड़खानों के आसपास गांवों में फैल रही बीमारियों के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करने के कारण लोग बूचड़खानों का दंश झेलने पर मजबूर हैं।
हालांकि, दिन प्रतिदिन बढ़ती समस्याओं को देखते हुए अब क्षेत्र के जिम्मेदार लगातार इन बूचड़खानों का विरोध कर रहे हैं। जलालपुर, टपकन, सटकपुरी, मांड़ीखेड़ा और नाई नंगला गांव सहित आसपास के कई गांवों में बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे चर्म रोग से प्रभावित हो रहे हैं, जिनके चेहरे और शरीर पर चर्म रोग के गंभीर निशान दिखाई दे रहे हैं।
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20 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत
मैनुद्दीन निवासी टपकन ने बताया कि गांव में करीब छह हजार की आबादी है जिनमें हर पांचवां व्यक्ति चर्म रोग व सांस की बीमारी से ग्रस्त है। इसके अलावा 60 वर्षीय सब्बीर पुत्र रहमत, समय खान पुत्र नसीबा, सहाबु पुत्र ममरेज, इब्राहिम पुत्र हिम्मत, रत्ती पुत्र गफूर, सहाबु पुत्र सुमेर सहित 20 से अधिक लोग कैंसर से जंग लड़ते-लड़ते जिंदगी की जंग हार गए। यही नहीं हाल ही में छह लोग कैंसर की बीमारी से ग्रस्त है जिनका इलाज चल रहा है।
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टीबी और सांस की बीमारी से फैल रही दहशत
जलालपुर, मांड़ीखेड़ा व सटकपुरी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि टीबी व सांस की बीमारी के लोग तेजी से शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि बूचड़खाने से निकलने वाले जहरीले प्रदूषण से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। बूचड़खाने से निकलने वाले जहरीले पानी को खुले में छोड़ा जाता है। पीने योग्य पानी दूषित है, इससे ग्रामीणों को टीबी की बीमारी हो रही है।
निमार्णाधीन हैं बूचड़खाने
मुबारिक, मास्टर वहाब, रसीद एडवोकेट सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि जिले में 9 बूचड़खानें संचालित हैं। 20 से अधिक बूचड़खानों की परमिशन के लिए अप्लाई किया हुआ हैं। उन्होंने कहा कि बूचड़खानों से निकलने वाले अवशेष और गंदगी से वातावरण दूषित हो चुका है। बदबू और मांस के कचरे ने न केवल वातावरण को बिगाड़ा है, बल्कि उससे निकलने वाले जीवाणु और विषाणु अब लोगों की त्वचा तक पहुंचकर उन्हें बीमार कर रहे हैं।
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जिन गांवों में बूचड़खाने संचालित हैं, उन गांव के लिए एक टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी। पता लगाया जाएगा कि जो लोग कैंसर, टीबी व सांस जैसी बीमारी से ग्रस्त है, उनकी बीमारी की असल वजह क्या है। नियमों का उल्लंघन करने वाले बूचड़खानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अखिल पिलानी, जिला उपायुक्त नूंह