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Gurugram News: रसोई में निकल रहे छिलके की खाद से उगा रहीं सब्जियां

Wed, 22 Apr 2026 11:43 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 11:43 PM IST
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She is growing vegetables using compost made from kitchen scraps.
हैमिल्टन कोर्ट में किचन वेस्ट से ऑरगेनिक खाद की मशीन के साथ ग्रीन टीम महिलाओं वाली खबर
पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहीं ग्रामीण महिलाएं, वेस्ट से बेस्ट बनाने के प्रयास में जुटीं
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पूनम
गुरुग्राम। जिले में ग्रामीण महिलाएं पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर हरियाणा के घामडौज गांव की महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि जागरूकता और सही प्रशिक्षण से संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती। गुड्डी और सुषमा जैसी 31 ग्रामीण महिलाओं ने उन्नत ग्रीन्स पहल के जरिये अपने घरों को इको-फ्रेंडली मॉडल में बदल दिया है। जहां किसी ने रसोई के छिलके की खाद बनाई तो किसी ने प्लास्टिक की बाल्टी में सब्जियां उगाकर उसको उपयोग में लिया।
पूर्व राज्यपाल डॉ. किरण बेदी द्वारा स्थापित नवज्योति इंडिया फाउंडेशन और फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के सहयोग से मिले प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन और घर की तस्वीर बदल दी है। जिस रसोई के कचरे और गोबर को कल तक बाहर फेंक दिया जाता था या जलाकर प्रदूषण फैलाया जाता था, आज वही कचरा एक पुरानी टूटी बाल्टी में खाद बनकर छोटे-छोटे किचन गार्डन्स को आकर्षित बना रहा है। बिना किसी खर्च के घर की छतों और कोनों में उगते टमाटर, पालक और धनिया न केवल शुद्ध आहार दे रहे हैं, बल्कि शहरी चकाचौंध से दूर धरती को बचाने का संदेश भी दे रहे हैं।
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हैमिल्टन कोर्ट में भी तैयार हो रही जैविक खाद
डीएलएफ फेज चार स्थित हैमिल्टन कोर्ट में पिछले दिनों महिलाओं की ग्रीन टीम के नेतृत्व में पूरी तरह स्वचालित, बिना बाहरी गर्मी के संचालित होने वाली एनेरोबिक कम्पोस्टिंग प्रणाली शुरू की गई। इसमें रसोई घर का कचरा मशीन में डाला जाता है और अपघटन में सहायता के लिए बैक्टीरिया मिलाए जाते हैं बिना दुर्गंध वाला, पोषक तत्वों से भरपूर कम्पोस्ट तैयार होकर उपयोग के लिए प्राप्त होता है। हर 20-25 दिनों में लगभग 1,500 किलोग्राम कंपोस्ट तैयार होता है, जिसे निवासियों और आसपास की सोसाइटियों में साझा किया जाता है।

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अभी जो कंपोस्टिंग हो रही है, उसके लिए हमने मशीन ली है मगर बागवानी और किचन वेस्ट की खाद बनाने का काम सोसाइटी में 2014 में शुरू हो गया था। इस कार्य को सोसाइटी की महिलाओं की ग्रीन टीम अंजाम दे रही है। -डॉ. कृष्णा भट्ट, पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, हैमिल्टन कोर्ट


छोटे-छोटे घरेलू कदम बड़े पर्यावरणीय बदलाव ला सकते हैं। पुराने बर्तनों में खाद बनाना, कचरे का पृथक्करण, प्लास्टिक का पुनर्चक्रण और कपड़े के थैलों का उपयोग ये सभी मिलकर सतत जीवनशैली का एक सरल लेकिन प्रभावशाली मॉडल हैं, जिन्हें ग्रामीण महिलाओं ने अपनाया है। -डॉ. चांदनी बेदी, संयोजन निदेशक, नवज्योति फाउंडेशन
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मैं किचन गार्डनिंग इसलिए करती हूं क्योंकि बाजार में मिलने वाली सब्जियां और फल अक्सर रासायनिक खादों और अस्वच्छ पानी के उपयोग से उगाए जाते हैं, जिससे उनका स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित होती है। -गुड्डी, ग्राम- घामडौज
मैंने खाद बनाना शुरू किया ताकि कचरे का सदुपयोग हो और अपने घर पर ही जैविक तरीके से बागवानी की जा सके। कुछ किचन वेस्ट हम अपनी गाय को खिला देते हैं और बाकी को खाद बनाने के लिए अलग से एकत्र कर लेते हैं। -सुमिला, ग्राम महेन्दवाड़ा
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