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Gurugram News: एनआरआई महिला से ठगी करने वाले सात को तीन-तीन साल की कैद
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पालम विहार में करोड़ों रुपये की जमीनें हड़पने व बेचने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पालम विहार में एक एनआरआई महिला की करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी दस्तावेजों के जरिये हड़पने और बेचने के मामले में जिला अदालत ने सात लोगों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने सभी दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। आरोपियों ने झारखंड और मध्य प्रदेश में जाली स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर इन जमीनों को तीसरे पक्ष को बेच दिया था।
बता दें कि अमेरिका में रहने वाली एनआरआई अमरजीत कौर ने 1995 में पालम विहार एक्सटेंशन में 200-200 वर्ग गज के दो प्लॉट खरीदे थे। 2005 से 2010 के बीच वह अपनी जमीन देखने नहीं आ पाईं। 2010 में उन्हें पता चला कि परमजीत कौर (पड़ोस के कथित नेता) ने उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है। बाद में उन्हें पता चला कि इस धोखाधड़ी में और भी लोग शामिल थे, जिन्होंने उनके जाली हस्ताक्षर करके फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की और संपत्ति का लेनदेन कर दिया। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर 2006 से ही जमीन पर कब्जा कर घर बना लिया था और उसमें रहने लगे थे।
पुलिस जांच और अदालत का फैसला
इस मामले में 2010 में पालम विहार पुलिस स्टेशन में जगमिंदर, परमजीत कौर, सुनील, हरिकेश, राजबीर सिंह, कांता अहलावत और सुरेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 419 (धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया था। एक आरोपी राजपाल का पता नहीं चल पाया और उसे 2016 में भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि झारखंड और मध्य प्रदेश में तैयार किए गए जाली और मनगढ़ंत स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर आरोपियों ने प्लॉटों पर कब्जा कर लिया था। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) अंजलि नरवाल ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि कथित स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी का झारखंड और मध्य प्रदेश में पंजीकृत होना ही इन दस्तावेजों के निष्पादन और प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। जब शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों में से कोई भी झारखंड का निवासी नहीं है और संपत्ति गुरुग्राम में है तो झारखंड में पावर ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराने का कोई अवसर नहीं था।
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अदालत ने इन दस्तावेजों को जाली और मनगढ़ंत करार दिया। अदालत ने जगमिंदर, परमजीत कौर, सुनील, हरिकेश, राजबीर सिंह, कांता अहलावत और सुरेश को आईपीसी की धारा 467, 468, 417 और 120बी के तहत दोषी ठहराया और उन्हें तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि आरोपी जानबूझकर और रणनीतिक धोखाधड़ी में शामिल थे, जिन्होंने भूखंडों पर अपने कब्जे को वैध बनाने के लिए कानूनी दस्तावेजों में हेराफेरी की थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पालम विहार में एक एनआरआई महिला की करोड़ों रुपये की जमीनें फर्जी दस्तावेजों के जरिये हड़पने और बेचने के मामले में जिला अदालत ने सात लोगों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने सभी दोषियों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। आरोपियों ने झारखंड और मध्य प्रदेश में जाली स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर इन जमीनों को तीसरे पक्ष को बेच दिया था।
बता दें कि अमेरिका में रहने वाली एनआरआई अमरजीत कौर ने 1995 में पालम विहार एक्सटेंशन में 200-200 वर्ग गज के दो प्लॉट खरीदे थे। 2005 से 2010 के बीच वह अपनी जमीन देखने नहीं आ पाईं। 2010 में उन्हें पता चला कि परमजीत कौर (पड़ोस के कथित नेता) ने उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है। बाद में उन्हें पता चला कि इस धोखाधड़ी में और भी लोग शामिल थे, जिन्होंने उनके जाली हस्ताक्षर करके फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की और संपत्ति का लेनदेन कर दिया। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर 2006 से ही जमीन पर कब्जा कर घर बना लिया था और उसमें रहने लगे थे।
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पुलिस जांच और अदालत का फैसला
इस मामले में 2010 में पालम विहार पुलिस स्टेशन में जगमिंदर, परमजीत कौर, सुनील, हरिकेश, राजबीर सिंह, कांता अहलावत और सुरेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 419 (धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया था। एक आरोपी राजपाल का पता नहीं चल पाया और उसे 2016 में भगोड़ा घोषित कर दिया गया था। जांच के दौरान यह पाया गया कि झारखंड और मध्य प्रदेश में तैयार किए गए जाली और मनगढ़ंत स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर आरोपियों ने प्लॉटों पर कब्जा कर लिया था। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) अंजलि नरवाल ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि कथित स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी का झारखंड और मध्य प्रदेश में पंजीकृत होना ही इन दस्तावेजों के निष्पादन और प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। जब शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों में से कोई भी झारखंड का निवासी नहीं है और संपत्ति गुरुग्राम में है तो झारखंड में पावर ऑफ अटॉर्नी पंजीकृत कराने का कोई अवसर नहीं था।
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अदालत ने इन दस्तावेजों को जाली और मनगढ़ंत करार दिया। अदालत ने जगमिंदर, परमजीत कौर, सुनील, हरिकेश, राजबीर सिंह, कांता अहलावत और सुरेश को आईपीसी की धारा 467, 468, 417 और 120बी के तहत दोषी ठहराया और उन्हें तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि आरोपी जानबूझकर और रणनीतिक धोखाधड़ी में शामिल थे, जिन्होंने भूखंडों पर अपने कब्जे को वैध बनाने के लिए कानूनी दस्तावेजों में हेराफेरी की थी।