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Gurugram News: स्कूल ने रोकी थी छात्र की पॉकेट मनी ,अब मुआवजे के साथ देने होंगे
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दैनिक जरूरतों के लिए अभिभावक जमा करवाते थे पैसे
नंबर गेम- 8350 पॉकेट मनी रोकी थी स्कूल ने
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। स्कूल की तरफ से छात्र की पॉकेट मनी रोकने पर स्कूल प्रबंधक को ब्याज के साथ मुआवजा भी छात्र के पिता को देना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य खुशविंदर कौर ने दिया है। मानेसर के शिकोहपुर गांव निवासी प्रदीप यादव ने आयोग में शिकायत दर्ज की थी। उनका बेटा 2022 में पांचवीं कक्षा का छात्र था और स्कूल के हॉस्टल में रहता था। हॉस्टल के छात्रों के लिए स्कूल में एक पॉकेट मनी खाता सुविधा थी। माता-पिता इसमें पैसे जमा करते थे ताकि छात्र अपनी दैनिक जरूरतों के लिए रुपये निकाल सकें। सत्र पूरा होने के बाद प्रदीप यादव ने अपने बेटे को दूसरे स्कूल में दाखिला दिलाया। उन्होंने स्कूल से खाते में बचे 8350 रुपये वापस मांगे। स्कूल ने रुपये वापस करने में टालमटोल की, जिसके बाद प्रदीप यादव ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। इस मामले में स्कूल प्रबंधक की तरफ से आयोग में कोई भी दलील पेश नहीं की गई। आयोग ने सभी सबूतों पर विचार किया और स्कूल को सेवा में कमी का दोषी पाया,आयोग ने स्कूल प्रबंधक को आदेश दिया है कि वह 8,350 रुपये नौ प्रतिशत की दर से वापस करें। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी होने पर 10 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 5500 रुपये देने का आदेश दिया है।
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नंबर गेम- 8350 पॉकेट मनी रोकी थी स्कूल ने
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। स्कूल की तरफ से छात्र की पॉकेट मनी रोकने पर स्कूल प्रबंधक को ब्याज के साथ मुआवजा भी छात्र के पिता को देना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य खुशविंदर कौर ने दिया है। मानेसर के शिकोहपुर गांव निवासी प्रदीप यादव ने आयोग में शिकायत दर्ज की थी। उनका बेटा 2022 में पांचवीं कक्षा का छात्र था और स्कूल के हॉस्टल में रहता था। हॉस्टल के छात्रों के लिए स्कूल में एक पॉकेट मनी खाता सुविधा थी। माता-पिता इसमें पैसे जमा करते थे ताकि छात्र अपनी दैनिक जरूरतों के लिए रुपये निकाल सकें। सत्र पूरा होने के बाद प्रदीप यादव ने अपने बेटे को दूसरे स्कूल में दाखिला दिलाया। उन्होंने स्कूल से खाते में बचे 8350 रुपये वापस मांगे। स्कूल ने रुपये वापस करने में टालमटोल की, जिसके बाद प्रदीप यादव ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। इस मामले में स्कूल प्रबंधक की तरफ से आयोग में कोई भी दलील पेश नहीं की गई। आयोग ने सभी सबूतों पर विचार किया और स्कूल को सेवा में कमी का दोषी पाया,आयोग ने स्कूल प्रबंधक को आदेश दिया है कि वह 8,350 रुपये नौ प्रतिशत की दर से वापस करें। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी होने पर 10 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 5500 रुपये देने का आदेश दिया है।