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Gurugram News: जेट पैचर तकनीक से होगी सड़कों की मरम्मत

Tue, 27 Jun 2023 10:57 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jun 2023 10:57 PM IST
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Roads will be repaired with jet patcher technology
शहर में भूजल की निगरानी को लगेंगे 25 जगह पीजोमीटर
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अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। शहर की गड्ढा युक्त सड़कों की मरम्मत अब किसी भी मौसम में की जा सकेगी। गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) ने गड्ढों की मरम्मत के लिए जेट पैचर तकनीक को अपनाने का फैसला लिया है। मंगलवार को कोर प्लानिंग सेल की बैठक में इसको मंजूरी भी दे दी गई है। बैठक में 24 घंटे पेयजल की आपूर्ति के लिए नगर निगम के साथ मिलकर कार्ययोजना तय करने पर भी बात हुई। साथ शहर में भूजल स्तर की निगरानी करने के लिए 25 स्थानों पर पीजोमीटर भी लगाए जाएंगे।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि जेट पैचर तकनीक से शहर की सड़कों पर पैच वर्क किसी भी मौसम में किया जा सकता है। इन जेट पैचर मशीनों द्वारा की जाने वाली कॉम्पैक्शन नियमित पैच वर्क की तुलना में बेहतर है। साथ ही इस तकनीक का इस्तेमाल जरूरत के आधार पर आपात स्थिति में भी किया जा सकता है। विशेष रूप से विशेष परिस्थितियों में जैसे कि मानसून के दौरान और ऐसे मामलों में जब उच्च वायु प्रदूषण स्तर के कारण सड़क मरम्मत कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, इस तकनीक के लिए किसी व्यापक मशीनरी या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। इसके इस्तेमाल में यातायात या वाहनों की आवाजाही को बंद करने की जरूरत भी नहीं होती है।
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बैठक में तय हुआ कि जीएमडीए और नगर निगम मिलकर 24 घंटे जल आपूर्ति के लिए प्रयास करेंगे। इससे नागरिकों को राहत मिलेगी और साथ ही पानी के भंडारण करने की प्रवृत्ति में भी कमी आएगी।
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इन्फ्रा-2 की टीम ने बताया कि सेक्टर डिवाइडिंग रोड सेक्टर- 47-50 के साथ हाई पावर सुपर सकर मशीन द्वारा 1800 मिमी व्यास की मास्टर सीवर लाइन की गाद निकालने का काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि जीएमडीए द्वारा मेफील्ड गार्डन के साथ सीवर लाइनों की गाद निकालने का काम पूरा होने से इस मानसून में इस खंड पर जलभराव कम हो जाएगा।


घटते भूमिगत जल स्तर की निगरानी के लिए जीएमडीए 25 स्वचालित पीजोमीटर तक लगाएगा। इससे भूमिगत जल स्तर के स्तर और इसकी कमी संबंधित डेटा की मैपिंग की जा सकेगी। पीज़ोमीटर को जीएमडीए में आईसीसीसी के साथ जोड़ा जाएगा। इस संबंध में जल विज्ञान विभाग से तकनीकी जानकारी और विवरण मांगा जा सकता है।
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