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Gurugram News: एसीआर में कायर बताने पर सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन दोषी करार

Mon, 20 Jul 2026 10:53 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 10:53 PM IST
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Retired Group Captain held guilty for labeling someone a coward in ACR
ग्रुप कैप्टन ने सेवानिवृत्त जनरल की एसीआर को लेकर कई लोगों को किया था ई-मेल
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विराट त्यागी
गुरुग्राम। जिला अदालत ने इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट (आईईएसएम) संस्था में वित्तीय अनियमितताओं के विवाद के दौरान सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक और झूठी बातें फैलाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए ग्रुप कैप्टन विनोद के. गांधी को दोषी करार देते हुए चार महीने की जेल और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह आदेश ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास हरि किशन की अदालत ने जारी किया।
क्या है पूरा मामला?
मामले के शिकायतकर्ता सेक्टर-17ए निवासी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राज कादयान ने बताया कि वह सेना में करीब 40 साल तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने साल 2008 में पूर्व सैनिकों और युद्ध विधवाओं के कल्याण के लिए भारतीय पूर्व सैनिक आंदोलन (आईईएसएम) नामक संस्था की स्थापना की थी। संस्था के संचालन के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल राज कादयान ने संस्था के तत्कालीन महासचिव व सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन विनोद के. गांधी और अन्य लोगों पर संस्था के फंड में धोखाधड़ी और पैसों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर उन्होंने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसके बाद अदालत के आदेश पर मामला दर्ज किया गया था।
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रिपोर्ट में उन्हें कायर दर्ज किया गया
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 11 फरवरी 2016, 12 अक्तूबर 2015, 15 अक्तूबर 2015 और तीन दिसंबर 2015 को विनोद के. गांधी ने पूर्व सैनिक और संस्था के लोगों को उनके बारे में ई-मेल भेजकर कहा कि पुलिस की तरफ से मामला जांच करने के बाद बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि राज कादयान की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) रिपोर्ट में उन्हें कायर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे उनकी बदनामी हुई और छवि को नुकसान पहुंचा है। इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से अदालत में गवाह पेश किए गए थे, जिसमें यह बात साबित हुई कि शिकायतकर्ता की एसीआर में कायर दर्ज नहीं किया गया था।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कायर शब्द का प्रयोग सशस्त्र बलों के किसी सदस्य के विरुद्ध किए जाने पर कहीं अधिक गंभीर और हानिकारक अर्थ रखता है, जबकि सामान्य व्यक्ति के विरुद्ध किए जाने पर ऐसा नहीं होता। कायर कहने से उनकी सम्मान और गरिमा को नुकसान पहुंचा है। अदालत ने सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन विनोद के गांधी को दोषी करार दिया।
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