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Gurugram News: चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के निवासियों को किराया नहीं मिलने से परेशानी
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लोगों ने प्रशासन से किराया दिलाने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के निवासियों को बिल्डर की ओर से किराया नहीं दिया जा रहा है। इस पर लोगों ने उपायुक्त समेत अन्य से पत्र लिखकर किराया दिलाने की मांग की है। लोगों को 30 से 50 हजार रुपये तक महीना मिलता था।
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश हुड्डा ने बताया कि बिल्डर पुनर्विकास समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों को किराया दे रहा था। करीब एक माह से किराया देना बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों ने डीसी समेत अन्य को पत्र लिखकर पैसे दिलाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि करीब 150 लोगों को पैसे नहीं मिल रहे हैं। हुड्डा ने बताया कि पुनर्निर्माण का विकल्प चुनने वालों को बिल्डर ने अभी पैसे देने शुरू नहीं किए हैं। ऐसे लोगों की संख्या 50 है। उन्होंने बताया कि चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने किराया भुगतान नहीं करने से प्रभावित मकान मालिकों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चिंटेल्स के उपाध्यक्ष जेएस यादव ने बताया कि कुछ लोग इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गए हुए हैं। उपायुक्त के ध्यान में लाकर पैसे देना बंद किया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के निवासियों को बिल्डर की ओर से किराया नहीं दिया जा रहा है। इस पर लोगों ने उपायुक्त समेत अन्य से पत्र लिखकर किराया दिलाने की मांग की है। लोगों को 30 से 50 हजार रुपये तक महीना मिलता था।
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश हुड्डा ने बताया कि बिल्डर पुनर्विकास समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों को किराया दे रहा था। करीब एक माह से किराया देना बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों ने डीसी समेत अन्य को पत्र लिखकर पैसे दिलाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि करीब 150 लोगों को पैसे नहीं मिल रहे हैं। हुड्डा ने बताया कि पुनर्निर्माण का विकल्प चुनने वालों को बिल्डर ने अभी पैसे देने शुरू नहीं किए हैं। ऐसे लोगों की संख्या 50 है। उन्होंने बताया कि चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने किराया भुगतान नहीं करने से प्रभावित मकान मालिकों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चिंटेल्स के उपाध्यक्ष जेएस यादव ने बताया कि कुछ लोग इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गए हुए हैं। उपायुक्त के ध्यान में लाकर पैसे देना बंद किया गया है।
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