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प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण करा सकता है उद्योगों का पलायन
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गुरुग्राम। प्राइवेट सेक्टर में हरियाणा के युवाओं को 75 फीसदी आरक्षण कानून को गुरुग्राम के उद्यमी अच्छा नहीं मान रहे हैं और वह अपने उद्योग दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने के बारे में विचार कर सकते हैं। यह संकेत यहां की फिक्की, आईएमटी एसोसिएशन सहित कई औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों ने दिए हैं। उनका तर्क है कि यहां का 25 फीसदी गारमेंट्स उद्योग पहले ही बंग्लादेश शिफ्ट हो गया है। मारुति की एक कंपनी दो साल पहले गुजरात के मेहसाणा में शिफ्ट हो चुकी है। यूपी सहित कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने दूसरे राज्यों की औद्योगिक इकाइयों को अपने राज्यों में शिफ्ट कराने के लिए औद्योगिक नीति को सरल बनाने के संकेत दिए हैं। रियल एस्टेट, आईटी तथा अन्य सेक्टर से जुड़े उद्योगों को इस कानून ने असमंजस में डाल दिया है। वहीं, दूसरी ओर इस कानून की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन का कहना है कि हर सरकार वोट बैंक के लिए युवाओं को साथ रखना चाहती है। इसमें गलत भी नहीं है लेकिन उद्योगों की ओर भी ध्यान देना होगा। सरकार को इस कानून को बनाने से पहले औद्योगिक एसोसिएशन, फिक्की आदि संगठनों से बात भी करनी चाहिए थी। अब इन संगठनों का सुझाव है कि सरकार इस कानून में संशोधन करके अनिवार्यता को खत्म करे। क्योंकि कंपनियों में कार्य के लिए स्किल्ड और क्वालीफाइड मैन पावर चाहिए। इतनी संख्या में स्थानीय लोग क्वालीफाइड तो हैं लेकिन कार्य के लिए यहां पर स्किल्ड मैन पावर नहीं है। अगर हरियाणा में यह बिल लागू होता है तो स्किल्ड मैन पावर के अभाव में कामकाज पर प्रभाव पड़ेगा जिससे हरियाणा उद्योग के विकास को धक्का लग सकता है, वहीं लोग यहां पर अपनी इंडस्ट्री लगाने से कतराने लगेंगे।
ये है हरियाणा के युवाओं के 75 फीसदी रोजगार कानून
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1- प्राइवेट सेक्टर में फैक्टरी, ट्रस्ट, कंपनी और संस्थान की 50 हजार से कम वेतन वाली नौकरी। हर तीन महीने बाद रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी।
2- 10 कर्मचारी वाली कंपनी में यह आदेश लागू नहीं होगा।
3-यह आदेश पुुराने कर्मियों पर लागू नहीं होगा, रिक्त और नए पदों के लिए इस कानून का पालन करना होगा।
4-योग्य कर्मचारी स्थानीय नहीं मिलता है तो डीसी की अध्यक्षता में कमेटी दूसरे राज्यों के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए अनुमति देगी। एसडीएम स्तर के अधिकारी ही कंपनी में जांच कर सकेंगे।
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क्या कहते हैं उद्योग और उद्यमी
प्रदेश सरकार को इस कानून में अनिवार्यता को खत्म करना चाहिए। जिससे कि उद्योगों को राहत मिले। हम पहले से ही हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। अनिवार्यता होने से तकनीकी कर्मचारी नहीं मिल सकेंगे और उद्योग पर प्रभाव पड़ेगा।
- सोमपाल राणा, महाप्रबंधक सिविल, मारुति उद्योग
प्राइवेेट सेक्टर में 75 फीसदी आरक्षण लागू होने से हरियाणा उद्योग को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है। क्योंकि इससे कंपनियां दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने के लिए मजबूर होंगी, जिससे राजस्व घटेगा। प्रदेश सरकार सिर्फ वोटबैंक के लिए राजनीति कर रही है। लगता है कि हरियाणा राज्य को होने वाले नुकसान से सरकार को कोई लेना-देना नहीं है।
-के के गांधी, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एसोसिएशन सेक्टर-37, गुरुग्राम।
कंपनियों की आवश्यकता के अनुसार हरियाणा में कर्मचारी नहीं मिल पाते। ऐसे में प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू होने से उद्योग को नुकसान होगा। हरियाणा सरकार को इंडस्ट्री के बारे में भी सोचना चाहिए।
- एचपी यादव, अध्यक्ष, एनसीआर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री गुरुग्राम।
उद्योगों का प्रयास है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। तकनीकी रूप से स्थानीय लोगों के दक्ष न होने के कारण दूसरे राज्यों के कर्मचारी रखने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस कानून में इतना संशोधन करे कि अनिवार्यता खत्म हो। अन्यथा यहां के उद्योग दूसरे स्थानों पर शिफ्ट होने के लिए विचार कर सकते हैं।
- मनोज त्यागी, महा सचिव आईएमटी इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन मानेसर
कानूनी पक्ष: असंवैधानिक है यह कानून
प्राइवेट सेक्टर तो क्या सरकारी क्षेत्र की नौकरियों में किसी भी राज्य के लोगों को 75 फीसदी आरक्षण का कानून नहीं है। इसीलिए हरियाणा सरकार का यह कानून असंवैधानिक है। इस तरह तो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। क्योंकि भारतीय संविधान में अनुच्छेद -19 के अंतर्गत किसी भी राज्य में नौकरी के लिए देश के किसी भी राज्य के व्यक्ति को आवेदन करने के साथ-साथ नौकरी पाने का पूरा अधिकार है।
-भूपेंद्र सिंह राठौर, वरिष्ठ अधिवक्ता, हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट, चंडीगढ़
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औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन का कहना है कि हर सरकार वोट बैंक के लिए युवाओं को साथ रखना चाहती है। इसमें गलत भी नहीं है लेकिन उद्योगों की ओर भी ध्यान देना होगा। सरकार को इस कानून को बनाने से पहले औद्योगिक एसोसिएशन, फिक्की आदि संगठनों से बात भी करनी चाहिए थी। अब इन संगठनों का सुझाव है कि सरकार इस कानून में संशोधन करके अनिवार्यता को खत्म करे। क्योंकि कंपनियों में कार्य के लिए स्किल्ड और क्वालीफाइड मैन पावर चाहिए। इतनी संख्या में स्थानीय लोग क्वालीफाइड तो हैं लेकिन कार्य के लिए यहां पर स्किल्ड मैन पावर नहीं है। अगर हरियाणा में यह बिल लागू होता है तो स्किल्ड मैन पावर के अभाव में कामकाज पर प्रभाव पड़ेगा जिससे हरियाणा उद्योग के विकास को धक्का लग सकता है, वहीं लोग यहां पर अपनी इंडस्ट्री लगाने से कतराने लगेंगे।
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ये है हरियाणा के युवाओं के 75 फीसदी रोजगार कानून
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1- प्राइवेट सेक्टर में फैक्टरी, ट्रस्ट, कंपनी और संस्थान की 50 हजार से कम वेतन वाली नौकरी। हर तीन महीने बाद रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी।
2- 10 कर्मचारी वाली कंपनी में यह आदेश लागू नहीं होगा।
3-यह आदेश पुुराने कर्मियों पर लागू नहीं होगा, रिक्त और नए पदों के लिए इस कानून का पालन करना होगा।
4-योग्य कर्मचारी स्थानीय नहीं मिलता है तो डीसी की अध्यक्षता में कमेटी दूसरे राज्यों के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए अनुमति देगी। एसडीएम स्तर के अधिकारी ही कंपनी में जांच कर सकेंगे।
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क्या कहते हैं उद्योग और उद्यमी
प्रदेश सरकार को इस कानून में अनिवार्यता को खत्म करना चाहिए। जिससे कि उद्योगों को राहत मिले। हम पहले से ही हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। अनिवार्यता होने से तकनीकी कर्मचारी नहीं मिल सकेंगे और उद्योग पर प्रभाव पड़ेगा।
- सोमपाल राणा, महाप्रबंधक सिविल, मारुति उद्योग
प्राइवेेट सेक्टर में 75 फीसदी आरक्षण लागू होने से हरियाणा उद्योग को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है। क्योंकि इससे कंपनियां दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने के लिए मजबूर होंगी, जिससे राजस्व घटेगा। प्रदेश सरकार सिर्फ वोटबैंक के लिए राजनीति कर रही है। लगता है कि हरियाणा राज्य को होने वाले नुकसान से सरकार को कोई लेना-देना नहीं है।
-के के गांधी, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एसोसिएशन सेक्टर-37, गुरुग्राम।
कंपनियों की आवश्यकता के अनुसार हरियाणा में कर्मचारी नहीं मिल पाते। ऐसे में प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू होने से उद्योग को नुकसान होगा। हरियाणा सरकार को इंडस्ट्री के बारे में भी सोचना चाहिए।
- एचपी यादव, अध्यक्ष, एनसीआर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री गुरुग्राम।
उद्योगों का प्रयास है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। तकनीकी रूप से स्थानीय लोगों के दक्ष न होने के कारण दूसरे राज्यों के कर्मचारी रखने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस कानून में इतना संशोधन करे कि अनिवार्यता खत्म हो। अन्यथा यहां के उद्योग दूसरे स्थानों पर शिफ्ट होने के लिए विचार कर सकते हैं।
- मनोज त्यागी, महा सचिव आईएमटी इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन मानेसर
कानूनी पक्ष: असंवैधानिक है यह कानून
प्राइवेट सेक्टर तो क्या सरकारी क्षेत्र की नौकरियों में किसी भी राज्य के लोगों को 75 फीसदी आरक्षण का कानून नहीं है। इसीलिए हरियाणा सरकार का यह कानून असंवैधानिक है। इस तरह तो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। क्योंकि भारतीय संविधान में अनुच्छेद -19 के अंतर्गत किसी भी राज्य में नौकरी के लिए देश के किसी भी राज्य के व्यक्ति को आवेदन करने के साथ-साथ नौकरी पाने का पूरा अधिकार है।
-भूपेंद्र सिंह राठौर, वरिष्ठ अधिवक्ता, हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट, चंडीगढ़