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Gurugram News: रामलीला मंचन....श्रवण कुमार को लगा दशरथ का बाण
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मैंने जालिम तेरा क्या बिगाड़ा, हाय धोखे से बाण मेरे सीने में मारा
मातृ पितृ भक्त श्रवण कुमार का मार्मिक दृश्य देखकर भाव विभोर हुए दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। शहर के श्री रामलीला मैदान में इन दिनों भगवान राम की लीलाओं का भव्य मंचन जारी है, जिसका निर्देशन अशोक शर्मा कर रहे हैं और श्री रामलीला कमेटी क्लब के सौजन्य से यह आयोजन सफल हो रहा है। मंचन के दूसरे दिन, श्रवण कुमार लीला और भगवान राम जन्मोत्सव का मनोहारी मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए शहर भर से बड़ी संख्या में लोग श्री रामलीला ग्राउंड में उमड़ पड़े।
इस अवसर पर, निर्देशक अशोक शर्मा स्वयं महाराजा दशरथ की भूमिका में नजर आए। लीला की शुरुआत अयोध्या के नगरवासियों की गुहार से हुई, जिन्होंने राजा दशरथ से जंगली जीव-जंतुओं द्वारा फसलों को बर्बाद किए जाने की शिकायत की। नगरवासियों के आग्रह पर राजा दशरथ अपने मंत्रियों और सैनिकों के साथ शिकार खेलने के लिए सरयू नदी के तट पर गए।
श्रवण कुमार का मार्मिक अंत
लीला के अत्यंत मार्मिक दृश्य में, श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता की प्यास बुझाने के लिए कंमडल में सरयू नदी से जल भर रहे थे। तभी किसी जंगली जानवर की आवाज सुनकर राजा दशरथ ने एक शब्दभेदी बाण चला दिया, जो दुर्भाग्यवश श्रवण कुमार के सीने में जा लगा। बाण लगने से श्रवण कुमार दर्द से तड़पने लगे और अपने अंधे माता-पिता को याद करते हुए रुदन करने लगते हैं और कहते हैं 'मैंने जालिम तेरा क्या बिगाड़ा हाय धोखे से बांध मेरे सीने में मारा'। उनकी चीख पुकार सुनकर राजा दशरथ सरयू नदी के तट पर आए और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने श्रवण कुमार से अपने अपराधों की क्षमा मांगी।
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श्रवण कुमार के आग्रह पर राजा दशरथ उनके माता-पिता को पानी पिलाने के लिए उनके पास गए और उन्हें पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर श्री रामलीला कमेटी क्लब के सदस्यों और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह मंचन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह हमें पितृभक्ति और नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।
इस मौके पर श्रवण कुमार नरेंद्र हंस, भगवान विष्णु हर्षित, आर्य सुमंत ललित गोयल, गुरु वशिष्ठ विजय जांगड़ा, शृंग ऋषि नरेश गर्ग, अंधे माता-पिता भगवानदास सेन एवं राजू सोनी, किन्नर रविंद्र सैनी, राजू सोनी, प्रवीण गोयल, अंशुल गोयल, रिंकू सेन, मोनी, इंदर बड़गुर्जर, कुलदीप कुमार सहित कई कलाकार श्री रामलीला रंगमंच पर अभिनय करते नजर आए।
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मातृ पितृ भक्त श्रवण कुमार का मार्मिक दृश्य देखकर भाव विभोर हुए दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। शहर के श्री रामलीला मैदान में इन दिनों भगवान राम की लीलाओं का भव्य मंचन जारी है, जिसका निर्देशन अशोक शर्मा कर रहे हैं और श्री रामलीला कमेटी क्लब के सौजन्य से यह आयोजन सफल हो रहा है। मंचन के दूसरे दिन, श्रवण कुमार लीला और भगवान राम जन्मोत्सव का मनोहारी मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए शहर भर से बड़ी संख्या में लोग श्री रामलीला ग्राउंड में उमड़ पड़े।
इस अवसर पर, निर्देशक अशोक शर्मा स्वयं महाराजा दशरथ की भूमिका में नजर आए। लीला की शुरुआत अयोध्या के नगरवासियों की गुहार से हुई, जिन्होंने राजा दशरथ से जंगली जीव-जंतुओं द्वारा फसलों को बर्बाद किए जाने की शिकायत की। नगरवासियों के आग्रह पर राजा दशरथ अपने मंत्रियों और सैनिकों के साथ शिकार खेलने के लिए सरयू नदी के तट पर गए।
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श्रवण कुमार का मार्मिक अंत
लीला के अत्यंत मार्मिक दृश्य में, श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता की प्यास बुझाने के लिए कंमडल में सरयू नदी से जल भर रहे थे। तभी किसी जंगली जानवर की आवाज सुनकर राजा दशरथ ने एक शब्दभेदी बाण चला दिया, जो दुर्भाग्यवश श्रवण कुमार के सीने में जा लगा। बाण लगने से श्रवण कुमार दर्द से तड़पने लगे और अपने अंधे माता-पिता को याद करते हुए रुदन करने लगते हैं और कहते हैं 'मैंने जालिम तेरा क्या बिगाड़ा हाय धोखे से बांध मेरे सीने में मारा'। उनकी चीख पुकार सुनकर राजा दशरथ सरयू नदी के तट पर आए और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने श्रवण कुमार से अपने अपराधों की क्षमा मांगी।
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श्रवण कुमार के आग्रह पर राजा दशरथ उनके माता-पिता को पानी पिलाने के लिए उनके पास गए और उन्हें पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर श्री रामलीला कमेटी क्लब के सदस्यों और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह मंचन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह हमें पितृभक्ति और नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।
इस मौके पर श्रवण कुमार नरेंद्र हंस, भगवान विष्णु हर्षित, आर्य सुमंत ललित गोयल, गुरु वशिष्ठ विजय जांगड़ा, शृंग ऋषि नरेश गर्ग, अंधे माता-पिता भगवानदास सेन एवं राजू सोनी, किन्नर रविंद्र सैनी, राजू सोनी, प्रवीण गोयल, अंशुल गोयल, रिंकू सेन, मोनी, इंदर बड़गुर्जर, कुलदीप कुमार सहित कई कलाकार श्री रामलीला रंगमंच पर अभिनय करते नजर आए।