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पंजाब सीएम कथित वीडियो मामला : अदालत ने बीएनएस की धारा 111 पर उठाए सवाल, आरोपी अंकित को जमानत
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- जांच एजेंसी के दस्तावेजों और एफएसएल रिपोर्ट के अभाव का किया उल्लेख
- अदालत ने यह भी कहा कि सिफर सेंटिनल लैब का भौतिक अस्तित्व न होना उसे फर्जी फर्म साबित नहीं करता
सोनू यादव
गुरुग्राम। पंजाब के मुख्यमंत्री से जुड़े कथित वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस की एसआईटी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने मामले में गिरफ्तार आरोपी अंकित को जमानत देते हुए कहा कि वर्तमान रिकॉर्ड के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 (संगठित अपराध) लागू नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी ने अब तक जांच के दौरान एकत्र किए गए आवश्यक दस्तावेज और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
मामले की शिकायत जसप्रीत सिंह ने दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उन्हें गुरुग्राम बुलाकर पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित वीडियो पर फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया और कथित रूप से फर्जी रिपोर्ट तैयार करने की साजिश रची गई। इस मामले में पुलिस ने 23 जून 2026 को अंकित और अरुण को गिरफ्तार किया था। बाद में 29 जून को पंकज यादव की भी गिरफ्तारी हुई। जांच के दौरान पुलिस ने देहरादून और दिल्ली से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए।
एफआईआर दर्ज होने से पहले अवैध हिरासत में रखा गया-
सुनवाई के दौरान अंकित के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और एफआईआर दर्ज होने से पहले अवैध हिरासत में रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़ा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और एफएसएल रिपोर्ट के बिना धारा 111 लगाना उचित नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल सिफर सेंटिनल लैब का भौतिक अस्तित्व नहीं होना, उसे स्वतः फर्जी संस्था सिद्ध नहीं करता। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जांच एजेंसी के पक्ष में ठोस फॉरेंसिक रिपोर्ट या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं, तो वह जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
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- अदालत ने यह भी कहा कि सिफर सेंटिनल लैब का भौतिक अस्तित्व न होना उसे फर्जी फर्म साबित नहीं करता
सोनू यादव
गुरुग्राम। पंजाब के मुख्यमंत्री से जुड़े कथित वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस की एसआईटी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने मामले में गिरफ्तार आरोपी अंकित को जमानत देते हुए कहा कि वर्तमान रिकॉर्ड के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 (संगठित अपराध) लागू नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी ने अब तक जांच के दौरान एकत्र किए गए आवश्यक दस्तावेज और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।
मामले की शिकायत जसप्रीत सिंह ने दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उन्हें गुरुग्राम बुलाकर पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित वीडियो पर फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया और कथित रूप से फर्जी रिपोर्ट तैयार करने की साजिश रची गई। इस मामले में पुलिस ने 23 जून 2026 को अंकित और अरुण को गिरफ्तार किया था। बाद में 29 जून को पंकज यादव की भी गिरफ्तारी हुई। जांच के दौरान पुलिस ने देहरादून और दिल्ली से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए।
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एफआईआर दर्ज होने से पहले अवैध हिरासत में रखा गया-
सुनवाई के दौरान अंकित के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और एफआईआर दर्ज होने से पहले अवैध हिरासत में रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़ा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और एफएसएल रिपोर्ट के बिना धारा 111 लगाना उचित नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केवल सिफर सेंटिनल लैब का भौतिक अस्तित्व नहीं होना, उसे स्वतः फर्जी संस्था सिद्ध नहीं करता। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जांच एजेंसी के पक्ष में ठोस फॉरेंसिक रिपोर्ट या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं, तो वह जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
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