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लीगल झंझटों में फंसने से बचने को ऑडिट से हाथ खींचे?
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गुरुग्राम। आईआईटी रुड़की के शहर की पांच सोसाइटियों के संरचनात्मक ऑडिट से हाथ खींचने की एक वजह वहां के विशेषज्ञों का कानूनी झंझट और ऐसी ही स्थितियों से बचने का प्रयास बताया जा रहा है। आईआईटी मूलत: एक शैक्षिक संस्थान है। संभावना जताई जा रही थी कि बिल्डर, प्रशासन या सोसाइटियों के रहने वाले लोग आईआईटी की ऑडिट रिपोर्ट को आधार बना कर अपने-अपने पक्ष के दावे को मजबूत करने का काम करते, जिससे अकारण विवाद की स्थिति पैदा होती।
कुछ सोसाइटियों के प्रतिनिधियों ने इसके पीछे प्रशासनिक उदासीनता को भी जिम्मेदार ठहराया है। सोसाइटियों में रहने वाले लोगों की मांग पर प्रशासन ने फरवरी 2022 में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों को शहर की पांच सोसाइटियों के संरचनात्मक ऑडिट संचालित कराने के लिए पत्र लिखा था। इन सोसाइटियों में सेक्टर-107 स्थित एमथ्रीएम वुडशायर, सेक्टर-109 स्थित ब्रिक्स लुंबिनी, रहेजा अथर्वा, सेक्टर-110 स्थित महिंद्रा औरा, सेक्टर-108 स्थित रहेजा वेदांता सोसाइटी शामिल हैं। ब्रिक्स लुंबिनी के गौरव प्रकाश कहते हैं कि आईआईटी रुड़की ने संरचनात्मक ऑडिट से इनकार करने के कारण तो नहीं बताए हैं, लेकिन जो बात लग रही है वह यही है कि वहां के विशेषज्ञ किसी कानूनी झंझट में फंसना नहीं चाहते हैं। क्योंकि जो रिपोर्ट वह प्रस्तुत करेंगे, वह किसी के खिलाफ होगी और किसी के पक्ष में होगी। जाहिर है ऐसे में उस रिपोर्ट को आधार बना कर अदालत का रुख भी हो सकता है। जिससे वहां के विशेषज्ञों के लिए असहज स्थिति हो सकती है। रहेजा अथर्वा के अंजान देवेश्वर कहते हैं कि प्रशासन की ओर से ही ऑडिट के लिए आईआईटी रुड़की में मजबूत पैरवी नहीं की गई। उदासीन प्रयासों का यही अंजाम होना था। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ऑडिट के लिए क्या विकल्प उपलब्ध कराता है। दूसरी ओर वरिष्ठ नगर योजनाकार संजीव मान कहते हैं कि कारण कुछ भी हों लेकिन अब आईआईटी रुड़की ऑडिट नहीं करेगी। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए नए विकल्पों पर विचार किया जाएगा। इसमें पंचकूला के अधिकारियों से भी सलाह ली जाएगी।
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कुछ सोसाइटियों के प्रतिनिधियों ने इसके पीछे प्रशासनिक उदासीनता को भी जिम्मेदार ठहराया है। सोसाइटियों में रहने वाले लोगों की मांग पर प्रशासन ने फरवरी 2022 में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों को शहर की पांच सोसाइटियों के संरचनात्मक ऑडिट संचालित कराने के लिए पत्र लिखा था। इन सोसाइटियों में सेक्टर-107 स्थित एमथ्रीएम वुडशायर, सेक्टर-109 स्थित ब्रिक्स लुंबिनी, रहेजा अथर्वा, सेक्टर-110 स्थित महिंद्रा औरा, सेक्टर-108 स्थित रहेजा वेदांता सोसाइटी शामिल हैं। ब्रिक्स लुंबिनी के गौरव प्रकाश कहते हैं कि आईआईटी रुड़की ने संरचनात्मक ऑडिट से इनकार करने के कारण तो नहीं बताए हैं, लेकिन जो बात लग रही है वह यही है कि वहां के विशेषज्ञ किसी कानूनी झंझट में फंसना नहीं चाहते हैं। क्योंकि जो रिपोर्ट वह प्रस्तुत करेंगे, वह किसी के खिलाफ होगी और किसी के पक्ष में होगी। जाहिर है ऐसे में उस रिपोर्ट को आधार बना कर अदालत का रुख भी हो सकता है। जिससे वहां के विशेषज्ञों के लिए असहज स्थिति हो सकती है। रहेजा अथर्वा के अंजान देवेश्वर कहते हैं कि प्रशासन की ओर से ही ऑडिट के लिए आईआईटी रुड़की में मजबूत पैरवी नहीं की गई। उदासीन प्रयासों का यही अंजाम होना था। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ऑडिट के लिए क्या विकल्प उपलब्ध कराता है। दूसरी ओर वरिष्ठ नगर योजनाकार संजीव मान कहते हैं कि कारण कुछ भी हों लेकिन अब आईआईटी रुड़की ऑडिट नहीं करेगी। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए नए विकल्पों पर विचार किया जाएगा। इसमें पंचकूला के अधिकारियों से भी सलाह ली जाएगी।
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