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Gurugram News: अरावली बचाने के लिए प्रदर्शन, प्रधानमंत्री से खनन पर लगाई गुहार
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पर्यावरणविदों, कानूनी विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए शनिवार को लोग एकजुट होकर सामने आए। पर्यावरण संरक्षण प्रेमियों ने शहर में अरावली खनन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बैठक में अरावली खनन पर तत्काल और स्थायी रोक लगाने की मांग की है। कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री को ज्ञापन पर सामूहिक हस्ताक्षर के साथ हुआ, जिसे शीघ्र ही प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा।
बैठक में पर्यावरणविदों, कानूनी विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अरावली के तेजी से हो रहे खनन पर गहरी चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि अरावली पर्वतमाला गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जिसका नष्ट होना पर्यावरणीय आपदा को न्योता देना है।
अरावली बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि ज्योति राघवन और चंद्रमौली बसु ने आंदोलन की यात्रा साझा करते हुए कहा कि की संगठित भागीदारी से ही प्रशासन को जवाबदेह बनाया जा सकता है। वहीं, आरटीआई हरिंदर ढींगरा ने चल रही कानूनी कार्रवाइयों और पहाड़ियों के लिए न्यायिक लड़ाई के बारे में बताया। सुनील हरसाना ने बताया कि इलाका प्राचीन जंगल का अंतिम अवशेष है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के समापन पर संगीता नायर ने अरावली को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अरावली को संरक्षित सुनिश्चित करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए शनिवार को लोग एकजुट होकर सामने आए। पर्यावरण संरक्षण प्रेमियों ने शहर में अरावली खनन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बैठक में अरावली खनन पर तत्काल और स्थायी रोक लगाने की मांग की है। कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री को ज्ञापन पर सामूहिक हस्ताक्षर के साथ हुआ, जिसे शीघ्र ही प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा।
बैठक में पर्यावरणविदों, कानूनी विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने अरावली के तेजी से हो रहे खनन पर गहरी चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि अरावली पर्वतमाला गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जिसका नष्ट होना पर्यावरणीय आपदा को न्योता देना है।
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अरावली बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि ज्योति राघवन और चंद्रमौली बसु ने आंदोलन की यात्रा साझा करते हुए कहा कि की संगठित भागीदारी से ही प्रशासन को जवाबदेह बनाया जा सकता है। वहीं, आरटीआई हरिंदर ढींगरा ने चल रही कानूनी कार्रवाइयों और पहाड़ियों के लिए न्यायिक लड़ाई के बारे में बताया। सुनील हरसाना ने बताया कि इलाका प्राचीन जंगल का अंतिम अवशेष है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के समापन पर संगीता नायर ने अरावली को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अरावली को संरक्षित सुनिश्चित करें।
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