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कृषि कानून लागू होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली होगी बर्बाद
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गुरुग्राम। खेती में कॉरपोरेट सेक्टर के प्रवेश होने और आवश्यक वस्तुओं पर स्टॉक लिमिट हटाने के बाद पीडीएस सिस्टम भी बर्बाद हो जाएगा। जिससे देश की अधिकांश गरीब जनता भुखमरी का शिकार हो जाएगी। यह बात संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष संतोख सिंह ने कृषि के नए नियमों का विरोध करते हुए कही। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम किसान सम्मान योजना की आठवीं किस्त जारी करते हुए कहा कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज दिया जा रहा है।
संतोख सिंह ने कहा कि सच्चाई यह है कि तीन कृषि कानूनों के लागू होने के बाद यह प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी। सरकार ने भारतीय खाद्य निगम का बजट पहले ही कम कर दिया है तथा सरकारी खरीद केंद्रों की संख्या भी कम कर दी है। तीन काले कानून लागू होने से सरकारी मंडियां बर्बाद हो जाएंगी व निजी मंडियों का देश में कब्जा हो जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन से स्टॉक लिमिट हटाने से बड़े पूंजीपति खाद्य पदार्थों की जमाखोरी करेंगे व मार्केट को अपने हिसाब से चलाएंगे। सरकारी खरीद न होने से किसान की एमएसपी अपने आप खत्म हो जाएगी तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली अपने आप ध्वस्त होगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली ध्वस्त होने से गरीब आदमी की आटा-दाल स्कीम भी बंद हो जाएगी। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 40 करोड़ जनता गरीबी रेखा से नीचे हैं तथा 50 करोड़ जनता मुश्किल से अपनी रोटी-रोजी चलाते हैं। अगर सार्वजनिक वितरण प्रणाली राशन प्रणाली ध्वस्त होती है तो देश में भुखमरी बढ़ेगी और आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ेगी। संयुक्त किसान मोर्चा का संघर्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर है और किसान इन्हीं मुद्दों को लेकर पिछले 171 दिन से दिल्ली के चारों तरफ सड़कों पर बैठे हुए हैं। उन्होने कहा कि अगर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बचाना है तो सरकार तीनों काले कानूनों को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दें।
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संतोख सिंह ने कहा कि सच्चाई यह है कि तीन कृषि कानूनों के लागू होने के बाद यह प्रणाली खतरे में पड़ जाएगी। सरकार ने भारतीय खाद्य निगम का बजट पहले ही कम कर दिया है तथा सरकारी खरीद केंद्रों की संख्या भी कम कर दी है। तीन काले कानून लागू होने से सरकारी मंडियां बर्बाद हो जाएंगी व निजी मंडियों का देश में कब्जा हो जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन से स्टॉक लिमिट हटाने से बड़े पूंजीपति खाद्य पदार्थों की जमाखोरी करेंगे व मार्केट को अपने हिसाब से चलाएंगे। सरकारी खरीद न होने से किसान की एमएसपी अपने आप खत्म हो जाएगी तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली अपने आप ध्वस्त होगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली ध्वस्त होने से गरीब आदमी की आटा-दाल स्कीम भी बंद हो जाएगी। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 40 करोड़ जनता गरीबी रेखा से नीचे हैं तथा 50 करोड़ जनता मुश्किल से अपनी रोटी-रोजी चलाते हैं। अगर सार्वजनिक वितरण प्रणाली राशन प्रणाली ध्वस्त होती है तो देश में भुखमरी बढ़ेगी और आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ेगी। संयुक्त किसान मोर्चा का संघर्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर है और किसान इन्हीं मुद्दों को लेकर पिछले 171 दिन से दिल्ली के चारों तरफ सड़कों पर बैठे हुए हैं। उन्होने कहा कि अगर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बचाना है तो सरकार तीनों काले कानूनों को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दें।
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