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छतों से गिर रहा प्लास्टर, पिलर के दरारों की मरम्मत नहीं
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गुरुग्राम। सेक्टर-37 डी स्थित एनबीसीसी ग्रीन व्यू सोसाइटी में 150 से अधिक परिवार पर हादसे का खतरा मंडरा रहा हैं। जिसका कारण पिछले साल सोसाइटी के फ्लैटों की छतों से गिरा प्लास्टर और पिलर में आई दरारें हैं। जिसकी मरम्मत का कार्य बिल्डर की ओर पूरा नहीं किया गया है और अभी भी कई जगहों से प्लास्टर गिरने लगा हैं। इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जी मोहंती ने बताया कि बिल्डर ने 2013 में प्रोजेक्ट लांच किया था। 2018 में एनबीसीसी की ओर से निवेशकों को फ्लैट पर कब्जा मिला था और चार टावरों में डेढ़ सौ परिवार आकर रहने आए गए। एक साल बाद ही प्लास्टर और पिलरों में दरार पड़ने लगे थी। उसी साल इसकी शिकायत सेंट्रल विजिलेंस कमीशन की टीम को दी गई, तो बिल्डर ने मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति करते हुए दरारों को भरवा दिया। अब एक बार फिर सोसाइटी की हालत जर्जर बनी हुई है। छतों से गिरता प्लास्टर है और लिफ्ट के बाहर दीवारों में आई दरारें से स्थानीय लोगों में खौफ उत्पन्न हो रहा हैं।
कमीशन को अभी शिकायत दी गई है, लेकिन उनके द्वारा जांच का बहाना दिया जा रहा हैं जबकि वर्तमान में आलम हैं कि ज्यादातर फ्लैटों में मालिकों ने अपने बेडरूम को एक साल से बंद कर रखा है ताकि हादसे से बचा जा सके। लोगों का डर हैं कि किसी दिन घाटिया सामग्री के कारण टावर ही न गिर जाए। लोगों को हादसे को रोकने के लिए जिला उपायुक्त को भी गुहार लगाई थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जी मोहंती ने बताया कि बिल्डर ने 2013 में प्रोजेक्ट लांच किया था। 2018 में एनबीसीसी की ओर से निवेशकों को फ्लैट पर कब्जा मिला था और चार टावरों में डेढ़ सौ परिवार आकर रहने आए गए। एक साल बाद ही प्लास्टर और पिलरों में दरार पड़ने लगे थी। उसी साल इसकी शिकायत सेंट्रल विजिलेंस कमीशन की टीम को दी गई, तो बिल्डर ने मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति करते हुए दरारों को भरवा दिया। अब एक बार फिर सोसाइटी की हालत जर्जर बनी हुई है। छतों से गिरता प्लास्टर है और लिफ्ट के बाहर दीवारों में आई दरारें से स्थानीय लोगों में खौफ उत्पन्न हो रहा हैं।
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कमीशन को अभी शिकायत दी गई है, लेकिन उनके द्वारा जांच का बहाना दिया जा रहा हैं जबकि वर्तमान में आलम हैं कि ज्यादातर फ्लैटों में मालिकों ने अपने बेडरूम को एक साल से बंद कर रखा है ताकि हादसे से बचा जा सके। लोगों का डर हैं कि किसी दिन घाटिया सामग्री के कारण टावर ही न गिर जाए। लोगों को हादसे को रोकने के लिए जिला उपायुक्त को भी गुहार लगाई थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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