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हिंदी से ही हमारी पहचान, उत्थान के लिए सामूहिक सहभागिता जरूरी

Wed, 11 Aug 2021 07:09 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 11 Aug 2021 07:09 PM IST
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Our identity from Hindi itself, collective participation is necessary for upliftment
गुरुग्राम। हिंदी से ही हमारी पहचान है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि हम इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिला सके। हिंदी के उत्थान व इसको बढ़ावा देने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा प्रयास करने की जरूरत है। तभी हम हिंदी की अहमियत को जन-जन तक पहुंचा सकते हैं। जिले के शिक्षाविदों ने अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान की सराहना करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए।
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सेक्टर-14 राजकीय कन्या महाविद्यालय में हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा अंतिल ने कहा कि हिंदी के लिए तो दिल से एक ही शब्द निकलता है, तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित। उन्होंने कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए जितने प्रयास किए जाएं वह कम हैं। हमारे लिए यह चिंता और चिंतन की बात है कि हिंदी हमारी मातृभाषा होते हुए भी इसे हम वो दर्जा नहीं दिलवा सके, जो इसको मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कॉलेज में ही अंग्रेजी के 24 प्राध्यापक है, लेकिन हिंदी के सिर्फ 8 हैं। ऐसे में हिंदी को ज्यादा से ज्यादा पढ़ने की जानने की और सीखने की जरूरत है। इसे अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। डॉ. पुष्पा अंतिल ने कहा कि हिंदी हैं हम अभियान के जरिए अमर उजाला एक बेहतरीन प्रयास कर रहा है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका हिस्सा बनना चाहिए।
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और कई कदम उठाने की जरूरत :
द्रोणाचार्य कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. सुशील सैनी ने कहा कि हिंदी को आगे ले जाने के लिए शासकीय कार्यालयों व शैक्षिक संस्थानों में ज्यादा से ज्यादा हिंदी समाचार पत्र-पत्रिकाओं को बढ़ावा देना चाहिए। शिक्षण संस्थानों में स्लोगन लेखन, निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना चाहिए। बकौल सुशील सरकार की तरफ से पिछले कुछ समय से हिंदी को बढ़ावा देने के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन ये भी अपर्याप्त हैं। अब कॉलेजों में भी शासकीय पत्र हिंदी में आ रहे हैं, लेकिन इसको और बढ़ाने के लिए हिंदी को अनिवार्य करना चाहिए। नई शिक्षा नीति में हिंदी को काफी महत्व दिया गया है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि हमारी मातृभाषा को और आगे ले जाने के लिए आगामी समय में और सार्थक प्रयास होंगे।
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