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कोरोना का डर- 20 फीसदी रही नौनिहालों की संख्या
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गुरुग्राम। बीते साल कोरोना महामारी के कारण मार्च माह में बंद हुए प्राथमिक स्कूलों में सोमवार से पहली और दूसरी की कक्षाएं भी शुरू हो गईं। हालांकि, पहले दिन जिलेभर में महज 20 फीसदी ही विद्यार्थी कक्षाओं में उपस्थित हो सके। इससे पहले बृहस्पतिवार से तीसरी से पांचवीं तक की कक्षाएं शुरू की गई थीं।
जिले में कोरोना के मामले दोबारा से बढ़ने लगे हैं। इसकी वजह से अभिभावक छोटे बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही। इसमें बहुत से विद्यार्थी ऐेसे थे जो पहली बार स्कूल पहुंचे। वे अभिभावक सहमति पत्र के साथ पहुंचे, जिन्हें सामाजिक दूरी के साथ बिठाया गया। अभिभावक स्वयं बच्चों को स्कूल लेकर पहुंचे। व्यवस्थाओं को देखकर ही उन्हें अंदर छोड़कर गए। तीन घंटे के लिए स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों को निदेशालय के निर्देशानुसार मिड-डे-मील वितरित नहीं किया गया।
जैकबपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक बाल विद्यालय की प्राचार्या अनीता ने बताया कि पहली कक्षा में सिर्फ दो और दूसरी कक्षा में 4 ही विद्यार्थी पहुंचे हैं। हालांकि, तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों की संख्या बढ़ी है। वहीं, इस्लामपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की प्राचार्या सविता ने बताया कि पहली कक्षा में 48 में से 16 और दूसरी में 89 में से 35 विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। इस्लामपुर के स्कूल में अभिभावकों ने विद्यार्थियों को भेजने में रुचि दिखाई है।
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जिले में पहली और दूसरी कक्षा के 20 फीसदी ही विद्यार्थी पहुंचे हैं। अभिभावक सहमति पत्र के साथ पहुंचे बच्चों को ही प्रवेश दिया गया -प्रेमलता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, गुरुग्राम
जिले में कोरोना का आंकड़ा बढ़ रहा है। ऐसे में पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम है। छोटे बच्चे होने पर माता-पिता डरते हैं अभिभावक स्कूल आने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते।
- दुष्यंत ठाकरान, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
जगह-जगह रखे गए सेनिटाइजर
सेक्टर 4-7 स्कूल की प्राचार्य सुमन शर्मा ने बताया कि सामाजिक दूरी बनाए रखने की व्यवस्था की गई थी। कक्षाओं के द्वार पर सेनिटाइजर रखे गए। पहले दिन पहली कक्षा में 66 में से 15, 162 में सिर्फ 43 ही विद्यार्थी उपस्थित रहे। आगामी दिनों में छात्र संख्या बढ़ने की संभावना है।
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जिले में कोरोना के मामले दोबारा से बढ़ने लगे हैं। इसकी वजह से अभिभावक छोटे बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही। इसमें बहुत से विद्यार्थी ऐेसे थे जो पहली बार स्कूल पहुंचे। वे अभिभावक सहमति पत्र के साथ पहुंचे, जिन्हें सामाजिक दूरी के साथ बिठाया गया। अभिभावक स्वयं बच्चों को स्कूल लेकर पहुंचे। व्यवस्थाओं को देखकर ही उन्हें अंदर छोड़कर गए। तीन घंटे के लिए स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों को निदेशालय के निर्देशानुसार मिड-डे-मील वितरित नहीं किया गया।
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जैकबपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक बाल विद्यालय की प्राचार्या अनीता ने बताया कि पहली कक्षा में सिर्फ दो और दूसरी कक्षा में 4 ही विद्यार्थी पहुंचे हैं। हालांकि, तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों की संख्या बढ़ी है। वहीं, इस्लामपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की प्राचार्या सविता ने बताया कि पहली कक्षा में 48 में से 16 और दूसरी में 89 में से 35 विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। इस्लामपुर के स्कूल में अभिभावकों ने विद्यार्थियों को भेजने में रुचि दिखाई है।
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जिले में पहली और दूसरी कक्षा के 20 फीसदी ही विद्यार्थी पहुंचे हैं। अभिभावक सहमति पत्र के साथ पहुंचे बच्चों को ही प्रवेश दिया गया -प्रेमलता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, गुरुग्राम
जिले में कोरोना का आंकड़ा बढ़ रहा है। ऐसे में पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम है। छोटे बच्चे होने पर माता-पिता डरते हैं अभिभावक स्कूल आने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते।
- दुष्यंत ठाकरान, जिला प्रधान, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
जगह-जगह रखे गए सेनिटाइजर
सेक्टर 4-7 स्कूल की प्राचार्य सुमन शर्मा ने बताया कि सामाजिक दूरी बनाए रखने की व्यवस्था की गई थी। कक्षाओं के द्वार पर सेनिटाइजर रखे गए। पहले दिन पहली कक्षा में 66 में से 15, 162 में सिर्फ 43 ही विद्यार्थी उपस्थित रहे। आगामी दिनों में छात्र संख्या बढ़ने की संभावना है।