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खुलासा: नूंह के गांवों में साइबर ठगी की ऑनलाइन कोचिंग, एक लाख रुपये तक शुल्क लेकर सिखाया जाता था ठगी का धंधा

Sun, 30 Apr 2023 12:41 PM IST
शाहरुख खान संजय शिशौदिया, अमर उजाला, गुरुग्राम
संजय शिशौदिया, अमर उजाला, गुरुग्राम Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 30 Apr 2023 12:41 PM IST
सार

नूंह में 200 से ज्यादा साइबर ठगों को पकड़ने के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नूंह में 40 हजार से लेकर एक लाख रुपये शुल्क में ठगी का धंधा सिखाया जाता था। ऑनलाइन लेक्चर देकर गांव-गांव साइबर ठगों की फौज तैयार की जाती थी। 

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Online coaching of cyber fraud in villages of Nuh business of fraud was taught for a fee of up to one lakh rup
पकड़े गए आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेवात का जामताड़ा बने नूंह में 200 से ज्यादा साइबर ठगों को पकड़ने के बाद अब पुलिस की नजर क्षेत्र में संचालित होने वाले साइबर ठगी के कोचिंग सेंटरों पर है। शिक्षा के क्षेत्र में पिछले नूंह जिले के इन गांवों में ठगी के कोचिंग सेंटर भी संचालित किए जाते थे। इन कोचिंग सेंटरों में साइबर ठगी की ट्रेनिंग दी जाती थी। 
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इसकी एवज में 40 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक बतौर फीस वसूली जाती थी। ठगी की ट्रेनिंग के इस अवैध कारोबार में जामताड़ा कनेक्शन भी सामने आया है। ठगी की क्लास लगाने वाले इन अवैध कोचिंग सेंटरों का अपना पाठ्यक्रम और यूनिफार्म भी थी। इसमें ऑनलाइन लेक्चर भी दिए जाते थे। 
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पकड़े गए ठगों से पूछताछ के बाद इन कोचिंग सेंटरों के विषय में पुलिस को खासी जानकारी मिली है। पुलिस इन कोचिंग सेंटर के नेटवर्क को भी ध्वस्त करने की तैयारी में जुट गई है। दूसरी ओर पुलिस की इस कार्रवाई के बाद से ही गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव के ज्यादातर युवा पड़ोसी जिलों और राज्यों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।
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शुक्रवार को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और नूंह पुलिस ने पांच हजार पुलिसकर्मियों के साथ 14 गांवों में एक साथ 300 ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करके 47 लोगों को गिरफ्तार किया और 160 लोगों को हिरासत में लिया गया था। यह लोग साइबर ठगी में लिप्त थे।

अब पुलिस को जानकारी मिल रही है कि क्षेत्र में साइबर ठगी ही नहीं यह लोग इसके प्रशिक्षण देने का काम भी करते थे। इससे यह लोग अपने लिए काम करने वाले लोगों को तैयार कर लेते थे।

 

ट्रेनिंग के लिए एडमिशन देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता था कि ठगी के इस कारोबार में आने वाले के कुछ और इरादे तो नहीं हैं। एडमिशन से पहले सवाल जवाबों की लंबी प्रक्रिया होती थी। इसमें पूछते थे कि यह काम क्यों करना चाहते हैं। यही काम क्यों करना है। संतुष्ट होने के बाद ही एडमिशन दिया जाता है।

टिनशेड में ट्रेनिंग
एक या दो कमरों के मकान या मकान की छत पर टिनशेड में ट्रेनिंग देने का काम किया जाता। यहां पर एडमिशन के लिए अपना लैपटाॅप, कॉल सेंटर में काम का अनुभव आदि होना जरूरी था। इसके अलावा ऑनलाइन क्लास भी लगाई जाती। पुलिस को जानकारी मिली है कि यहां के कुछ युवक जामताड़ा के ठगों से भी ट्रेनिंग हासिल किए हुए हैं। इस बिंदु पर भी पुलिस जांच करेगी।

पुलिस अधिकारी बोले
आरोपियों से महत्वपूर्ण जानकारी मिली हैं। पता चला है कि गांव के बेरोजगार युवा कोचिंग लेकर ठगी के इस काले कारोबार से जुड़ते थे। ट्रेनिंग के इस खेल में जामताड़ा कनेक्शन भी सामने आया है। कार्रवाई के दौरान ठगों से मिले सिम कार्डों की डिटेल भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र को भेज रहे हैं। वहां से इनके दूसरे राज्यों में बैठे ठग और इनकी ट्रेनिंग आदि का पता चलेगा। ट्रेनिंग देने वालों को भी घेरा जाएगा।- वरुण सिंगला, पुलिस अधीक्षक नूंह
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