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Gurugram News: फर्जी दस्तावेज के आधार पर रजिस्ट्री कराने में एक गिरफ्तार
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पीजीएफ कंपनी की सीज संपत्ति के फर्जी दस्तावेज से वारदात को दिया अंजाम
आरोपी ने साथियों के जरिये अपने बैंक खाते कंपनी के नाम पर खुलवाए
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति के नियंत्रणाधीन संपत्ति को जाली दस्तावेज के माध्यम से बेचा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आर्थिक अपराध शाखा-1 ने पीजीएफ कंपनी की सीज संपत्ति की फर्जी दस्तावेज के जरिये रजिस्ट्री करवाने के मामले में एक आरोपी को बंगलूरू से गिरफ्तार किया। आरोपी ने साथियों के जरिये फर्जी पहचान से अपने बैंक खाते पीजीएफ कंपनी के नाम पर खुलवाकर वारदात को अंजाम दिया। मामले में अभी तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस मामले में छानबीन कर रही है और बाकि आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान नेपाल के घोड़ा घोड़ी ताल गांव निवासी राजेंद्र सिंह (फर्जी रविंद्र प्रसाद) के रूप में हुई है। आरोपी से पूछताछ में पता चला कि उसने साथियों के साथ मिलकर फर्जी पहचान बनाकर खुद को रविंद्र प्रसाद दर्शाया। फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड के माध्यम से बैंक खाते खुलवाए। आरोपी ने उक्त फर्जी दस्तावेज के आधार पर पीजीएफ कंपनी के नाम से करंट बैंक खाता खुलवाकर खुद को उसका प्रोपराइटर दर्शाया गया।
इसके बाद आरोपियों ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार कर उक्त प्लॉट को डीलर के माध्यम से बेच दिया। प्लॉट बेचकर प्राप्त रुपयों में एक भाग उक्त फर्जी बैंक खाते में जमा कराया गया, जिसे आरोपियों द्वारा चेक के माध्यम से निकलवा लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड का कार्य करता था और अन्य व्यक्तियों के कहने पर फर्जी दस्तावेज बनवाकर बैंक खाते खुलवाए थे। आरोपी ने यह भी बताया कि इस ठगी में उसे लगभग पांच लाख रुपये प्राप्त हुए थे।
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14 मार्च 2024 को नायब तहसीलदार ने पुलिस को शिकायत दी थी कि पीजीएफ लिमिटेड की अटैच व सीज संपत्ति संख्या 131-जी, ब्लॉक-सी, सुशांतलोक-3 गुरुग्राम, जोकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति के नियंत्रणाधीन थी को बिना समिति की अनुमति के आरोपियों द्वारा फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन, गलत घोषणा व जाली दस्तावेज का प्रयोग कर अवैध रूप से विक्रय/रजिस्ट्री कराया गया। सेल डीड पंजीकृत करवाई गई। इसके बाद धोखाधड़ी व जालसाजी कर अवैध लाभ अर्जित किया गया। शिकायत के आधार पर सेक्टर-56 थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की आगामी जांच आर्थिक अपराध शाखा-1 द्वारा की जा रही है।
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आगे की कार्रवाई के लिए आरोपी को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है। मामले में संलिप्त अन्य आरोपियों की पहचान, फर्जी दस्तावेज व वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। जल्द ही उनकी भी गिरफ्तारी होगी। - चरण सिंह, एएसआई आर्थिक अपराध शाखा-1, गुरुग्राम
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आरोपी ने साथियों के जरिये अपने बैंक खाते कंपनी के नाम पर खुलवाए
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति के नियंत्रणाधीन संपत्ति को जाली दस्तावेज के माध्यम से बेचा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आर्थिक अपराध शाखा-1 ने पीजीएफ कंपनी की सीज संपत्ति की फर्जी दस्तावेज के जरिये रजिस्ट्री करवाने के मामले में एक आरोपी को बंगलूरू से गिरफ्तार किया। आरोपी ने साथियों के जरिये फर्जी पहचान से अपने बैंक खाते पीजीएफ कंपनी के नाम पर खुलवाकर वारदात को अंजाम दिया। मामले में अभी तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस मामले में छानबीन कर रही है और बाकि आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान नेपाल के घोड़ा घोड़ी ताल गांव निवासी राजेंद्र सिंह (फर्जी रविंद्र प्रसाद) के रूप में हुई है। आरोपी से पूछताछ में पता चला कि उसने साथियों के साथ मिलकर फर्जी पहचान बनाकर खुद को रविंद्र प्रसाद दर्शाया। फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड के माध्यम से बैंक खाते खुलवाए। आरोपी ने उक्त फर्जी दस्तावेज के आधार पर पीजीएफ कंपनी के नाम से करंट बैंक खाता खुलवाकर खुद को उसका प्रोपराइटर दर्शाया गया।
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इसके बाद आरोपियों ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार कर उक्त प्लॉट को डीलर के माध्यम से बेच दिया। प्लॉट बेचकर प्राप्त रुपयों में एक भाग उक्त फर्जी बैंक खाते में जमा कराया गया, जिसे आरोपियों द्वारा चेक के माध्यम से निकलवा लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड का कार्य करता था और अन्य व्यक्तियों के कहने पर फर्जी दस्तावेज बनवाकर बैंक खाते खुलवाए थे। आरोपी ने यह भी बताया कि इस ठगी में उसे लगभग पांच लाख रुपये प्राप्त हुए थे।
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14 मार्च 2024 को नायब तहसीलदार ने पुलिस को शिकायत दी थी कि पीजीएफ लिमिटेड की अटैच व सीज संपत्ति संख्या 131-जी, ब्लॉक-सी, सुशांतलोक-3 गुरुग्राम, जोकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति के नियंत्रणाधीन थी को बिना समिति की अनुमति के आरोपियों द्वारा फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन, गलत घोषणा व जाली दस्तावेज का प्रयोग कर अवैध रूप से विक्रय/रजिस्ट्री कराया गया। सेल डीड पंजीकृत करवाई गई। इसके बाद धोखाधड़ी व जालसाजी कर अवैध लाभ अर्जित किया गया। शिकायत के आधार पर सेक्टर-56 थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की आगामी जांच आर्थिक अपराध शाखा-1 द्वारा की जा रही है।
आगे की कार्रवाई के लिए आरोपी को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है। मामले में संलिप्त अन्य आरोपियों की पहचान, फर्जी दस्तावेज व वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। जल्द ही उनकी भी गिरफ्तारी होगी। - चरण सिंह, एएसआई आर्थिक अपराध शाखा-1, गुरुग्राम