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Gurugram News: सबसे पुरानी रामलीला आयोजन स्थल बना कचरा केंद्र
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हुकम सिंह ठाकरान संवाद के लिए
- संवाद में झाड़सा गांव के निवासियों ने बख्तावर भवन के साथ कचरा संग्रह केंद्र हटाने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। झाड़सा गांव में वर्ष 1830 से आयोजित हो रही गुरुग्राम की सबसे पुरानी ऐतिहासिक रामलीला इस बार प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। एक तरफ जहां शिव मंदिर में कलाकार मंचन के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं और बख्तावर भवन में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भवन के ठीक गेट और दीवार के पास बने कूड़ा पॉइंट से उठती बदबू और गंदगी इस पावन आध्यात्मिक उत्सव में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। इसे लेकर रविवार को ग्रामीणों ने संवाद कार्यक्रम में गहरी नाराजगी जताई।
लोगों ने गांव में सीवेज ओवरफ्लो व टूटी सड़कों की समस्या पर भी चर्चा की। संवाद में हुकम सिंह ठाकरान, ओम प्रकाश ठाकरान, सुरेंद्र कुमार अत्रि, गुरु दत्त कश्यम, अमित अत्रि, कश्मीर हुड्डा, महावीर हुड्डा, आकाश हुड्डा, रमन, रुद्र ठाकरान, द्रोण अत्रि और मोनू ठाकरान ने अपनी बात रखी।
तैयारियों में आ रही परेशानी-
पूरे झाड़सा में सीवेज लाइनें बहुत पतली हैं। कई गलियों में साल के 300 दिन सीवेज ओवरफ्लो होकर बहता रहता है। यहां गंदगी नहीं उठाई जाती है। सीवेज की गंदगी के कारण कई जगह सड़कें टूट गई हैं। -हुकम सिंह ठाकरान
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गंदगी के कारण सबसे पुरानी रामलीला के दर्शकों को काफी दिक्कत आएगी। इस परिसर के पास रोजाना कूड़ा डाला जाता है, जिसे गाड़ियां उठाती तो हैं लेकिन जिस मात्रा में डंपिंग है उस तरह उठाया नहीं जाता है। -ओम प्रकाश ठाकरान
बख्तावर भवन में काफी संख्या में दर्शक रामलीला देखने आते हैं लेकिन इसकी दीवारों के साथ कूड़ा संग्रह केंद्र बना दिया गया है, इससे दर्शकों और रामलीला कमेटी के सदस्यों को काफी बदबू का सामना करना पड़ेगा। -सुरेंद्र कुमार अत्रि
नगर निगम को इस जगह से कूड़ा उठाना चाहिए। यहां से झाड़सा गांव का प्रवेश भी है, कूड़ा जमा होने से आवाजाही में दिक्कत आती है, बदबू के कारण बुरा हाल है। हमें तैयारियों में काफी दिक्कत आ रही है। -गुरु दत्त कश्यप
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। झाड़सा गांव में वर्ष 1830 से आयोजित हो रही गुरुग्राम की सबसे पुरानी ऐतिहासिक रामलीला इस बार प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। एक तरफ जहां शिव मंदिर में कलाकार मंचन के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं और बख्तावर भवन में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भवन के ठीक गेट और दीवार के पास बने कूड़ा पॉइंट से उठती बदबू और गंदगी इस पावन आध्यात्मिक उत्सव में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। इसे लेकर रविवार को ग्रामीणों ने संवाद कार्यक्रम में गहरी नाराजगी जताई।
लोगों ने गांव में सीवेज ओवरफ्लो व टूटी सड़कों की समस्या पर भी चर्चा की। संवाद में हुकम सिंह ठाकरान, ओम प्रकाश ठाकरान, सुरेंद्र कुमार अत्रि, गुरु दत्त कश्यम, अमित अत्रि, कश्मीर हुड्डा, महावीर हुड्डा, आकाश हुड्डा, रमन, रुद्र ठाकरान, द्रोण अत्रि और मोनू ठाकरान ने अपनी बात रखी।
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तैयारियों में आ रही परेशानी-
पूरे झाड़सा में सीवेज लाइनें बहुत पतली हैं। कई गलियों में साल के 300 दिन सीवेज ओवरफ्लो होकर बहता रहता है। यहां गंदगी नहीं उठाई जाती है। सीवेज की गंदगी के कारण कई जगह सड़कें टूट गई हैं। -हुकम सिंह ठाकरान
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गंदगी के कारण सबसे पुरानी रामलीला के दर्शकों को काफी दिक्कत आएगी। इस परिसर के पास रोजाना कूड़ा डाला जाता है, जिसे गाड़ियां उठाती तो हैं लेकिन जिस मात्रा में डंपिंग है उस तरह उठाया नहीं जाता है। -ओम प्रकाश ठाकरान
बख्तावर भवन में काफी संख्या में दर्शक रामलीला देखने आते हैं लेकिन इसकी दीवारों के साथ कूड़ा संग्रह केंद्र बना दिया गया है, इससे दर्शकों और रामलीला कमेटी के सदस्यों को काफी बदबू का सामना करना पड़ेगा। -सुरेंद्र कुमार अत्रि
नगर निगम को इस जगह से कूड़ा उठाना चाहिए। यहां से झाड़सा गांव का प्रवेश भी है, कूड़ा जमा होने से आवाजाही में दिक्कत आती है, बदबू के कारण बुरा हाल है। हमें तैयारियों में काफी दिक्कत आ रही है। -गुरु दत्त कश्यप