नूंह हादसे का दर्द: सीट बदलकर पत्नी ने बचाई पति की जान, खुद ने तोड़ा दम; कंगन और कपड़ों से हुई शवों की पहचान
हरियाणा के नूंह में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर एक बस हादसे का शिकार हो गई। राकेश ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले ही उनकी बस एक पेट्रोल पंप पर रुकी थी। वहीं पर उनकी पत्नी ने जिद करके उनसे अपनी सीट बदल ली और उन्हें अपनी सीट पर बैठा दिया।
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केएमपी पर हुए बस हादसे में पंजाब के होशियारपुर निवासी राकेश की जान बाल-बाल बच गई, लेकिन उनकी पत्नी, बच्चे व पोती की मौत हो गई। राकेश ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले ही उनकी बस एक पेट्रोल पंप पर रुकी थी। वहीं पर उनकी पत्नी ने जिद करके उनसे अपनी सीट बदल ली और उन्हें अपनी सीट पर बैठा दिया। राकेश का कहना था कि उन्हें जरा भी इस बात का इल्म नहीं था कि पत्नी जाने-अनजाने उनकी जान बचा रही है। मूल रूप से पंजाब निवासी राकेश विगत करीब 30 साल से लोगों को धर्मार्थ तीर्थ यात्रा करवाता है। इसी क्रम में 10 मई को वह पत्नी, बेटे, पोती व अन्य लोगों के साथ निकले थे। इस हादसे में उनकी पत्नी शशि, 32 वर्षीय बेटा गौतम और 13 साल की पोती योगिता की मौत हो गई।
बेटी वृंदावन से ही टैक्सी से रात में आ गई थी गुरुग्राम
राकेश की एक बेटी सोनिया गुरुग्राम की न्यू कालोनी में रहती है। सोनिया भी इसी बस में सवार होकर धार्मिक यात्रा के लिए गई थी। उसे बस से रात को मानेसर के पास केएमपी पर उतरना था। लेकिन वृंदावन में सोनिया ने अपना कार्यक्रम बदल दिया। वृंदावन में दर्शन करने के बाद जब बाकी लोग बस की बाकी सवारियों के आने का इंतजार कर रहे थे, तब सोनिया वहीं से टैक्सी लेकर गुरुग्राम आ गई। न्यू कालोनी गुरुग्राम में रहने वाली सोनिया का रो-रो कर बुरा हाल था। रात तीन बजे उसे बस हादसे की जानकारी मिली। इसके बाद वह सुबह पांच बजे नल्हड़ अस्पताल पहुंची।
शव जल कर हो गया है नष्ट मां की कैसे करे पहचान
उत्तराखंड के रूद्रपुर में रहने वाले रितिका का रो-रो कर बुरा हाल है। उसके परिवार के लोग पंजाब के होशियारपुर में रहते हैं। उसकी ससुराल के लोग रुद्रपुर में रहते हैं। रात तीन बजे के आस-पास रितिका को इस हादसे की सूचना मिली। इसके बाद वह सीधे नूंह पहुंची। उसके पिता तो मिले हैं मगर मां उषा शारदा नहीं नहीं मिल रही है। पोस्टमार्टम हाउस में 9 शव में आठ की पहचान हो चुकी है। एक शव जो महिला का है। उसकी पहचान नहीं हो पा रही है। कारण वह जलकर पूरी तरह से नष्ट हो गया है। उसके पिता मनमोहन शारदा दो बार शव को देख कर बाहर आ चुके हैं मगर वह कहते हैं कि क्या देख कर उसकी पहचान करुं।
कड़ा, कंगन, कुंडल व कपड़े से हुई शवों की पहचान
नल्हड़ अस्पताल में एक साथ इतने शव देख कर परिजनों की ओर से उनकी पहचान किया जाना कठिन था। सोने के कड़े, कुंडल, कंगन व कपड़े से शव की पहचान की गई। मरने वालों में 13 साल की बच्ची से लेकर 70 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं।
मंदिर से दर्शन करके निकलने के बाद मां करती थी फोन
होशियारपुर के रहने वाले रवि भटनागर ने बताया कि उसके पिता अशोक कुमार भाटिया और मां पूनम भाटिया दोनों लोग मिसिंग हैं। वह मानेसर के अस्पताल में उनकी तलाश कर रहे हैं। उनकी मां हर मंदिर से दर्शन करके निकलती तो उसे फोन करके आशीर्वाद देती थी। शुक्रवार की शाम छह बजे उसका फोन आया था कि शाम को यहां से सब निकलने वाले हैं। इसके बाद उन्हें शनिवार अलसुबह बस हादसे का पता चला।