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Gurugram News: आरटीआई दाखिल करने के सात महीने बाद भी नहीं मिला जवाब
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ग्राम पंचायत निजामपुर का मामला, बना रहे हैं समझौता का दबाव
तावडू। ग्राम पंचायत निजामपुर के निवासी आकिब ने करीब सात महीने पहले तावडू पंचायत विकास एवं खंड अधिकारी से पंचायत में किए गए विकास कार्यों और खर्च की गई राशि की जानकारी मांगी थी। लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला। आकिब ने बताया कि 21 अगस्त 2024 को आरटीआई दाखिल कर वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में पंचायत के खाते में जमा राशि, खर्च की गई रकम, नालों की सफाई पर हुए खर्च और सड़कों के निर्माण के लिए खरीदी गई सामग्री का ब्योरा मांगा था। लेकिन तीन महीने तक कोई जवाब नहीं मिला। तब उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 17 जनवरी 2024 को उन्होंने राज्य सूचना आयोग से गुहार लगाई। दो बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद सूचना आयोग ने भी कोई सुनवाई नहीं की है। शिकायतकर्ता ने कहा कि सात महीने बाद भी अबतक जवाब नहीं मिला है। उसका कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। सड़कों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायती विभाग के कर्मचारी और सरपंच प्रतिनिधि उनपर फैसले का दबाव बना रहे हैं। जबरन समझौता करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। संवाद
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तावडू। ग्राम पंचायत निजामपुर के निवासी आकिब ने करीब सात महीने पहले तावडू पंचायत विकास एवं खंड अधिकारी से पंचायत में किए गए विकास कार्यों और खर्च की गई राशि की जानकारी मांगी थी। लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला। आकिब ने बताया कि 21 अगस्त 2024 को आरटीआई दाखिल कर वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में पंचायत के खाते में जमा राशि, खर्च की गई रकम, नालों की सफाई पर हुए खर्च और सड़कों के निर्माण के लिए खरीदी गई सामग्री का ब्योरा मांगा था। लेकिन तीन महीने तक कोई जवाब नहीं मिला। तब उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 17 जनवरी 2024 को उन्होंने राज्य सूचना आयोग से गुहार लगाई। दो बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद सूचना आयोग ने भी कोई सुनवाई नहीं की है। शिकायतकर्ता ने कहा कि सात महीने बाद भी अबतक जवाब नहीं मिला है। उसका कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। सड़कों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायती विभाग के कर्मचारी और सरपंच प्रतिनिधि उनपर फैसले का दबाव बना रहे हैं। जबरन समझौता करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। संवाद