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Gurugram News: पिंक बस के बारे में पता नहीं, कैसे मिलेंगी महिला सवारियां
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गुरुग्राम मेट्रोपोलिटन बस सर्विस ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुरू की थी बस सेवा
पिंक बस में अधिकतम किराया 20 रुपये है
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम मेट्रोपोलिटन बस सर्विस ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर की महिलाओं के लिए पिंक बस की सेवा शुरू की थी। यह बस मिलेनियम सिटी मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन और मुद्रिका रूट पर चलाई गई। जागरूकता की कमी और स्टॉपेज की जानकारी नहीं होने से चार महीने बाद भी बसें खाली ही दौड़ रही हैं।
मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन रूट नंबर 116 पर मंगलवार दोपहर 2:20 बजे बस में संवाददाता समेत दो महिला यात्री, एक महिला कंडक्टर और ड्राइवर मौजूद थे। बस कंडक्टर ने बताया कि रोजाना यह बस सात फेरे लगाती है। चार फेरे हो चुके हैं और किराया अबतक केवल 500 रुपो प्राप्त हुआ है। इस बस का अधिकतम किराया 20 रुपये प्रति यात्री होता है। बस में ड्राइवर और कंडक्टर समेत 55 सीटें होती हैं। खड़े होने की सुविधा है लेकिन पिंक बसें अक्सर खाली दौड़ती हैं। पिक आवर में भी गिनी चुनी महिलाएं इसमें सफर करती हैं। ड्राइवरों का कहना है कि केवल महिला यात्री को बैठाने की इजाजत है। अगर कोई महिला अपने पति और बच्चों या किसी पुरुष के साथ होती है तो उसे नहीं बैठाते। इस बात की इजाजत हो कि महिला परिवार सहित हो तो उसे बैठाया जाए तो कुछ यात्री बढ़ेंगे। रूट संख्या 111 यानी मुद्रिका जो मेट्रो स्टेशन से शहर पुराने शहर की लगभग परिक्रमा करती है। इसमें भी गिनी चुनी महिलाएं रहती हैं।
स्टॉपेज में सुधार की जरूरत
महिलाओं का कहना है कि पिंक बस को लेकर महिलाओं के बीच खास तौर पर स्कूल-कॉलेज की लड़कियों में जागरूकता की जरूरत है। मेट्रो तक जाने वाली महिलाएं कैब, ऑटो का सहारा लेती हैं क्योंकि उन्हें बस के बारे में पता नहीं है। मुख्य जगहों पर स्टॉपेज नहीं बनाए गए हैं। जहां बस शेल्टर हैं वहां आम बसें भी नहीं रुकती हैं। रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड के बीच स्टॉपेज के लिए लगे बोर्ड गायब गायब हैं।
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पिंक बसों की जानकारी अधिकतर महिलाओं को नहीं है। स्टॉपेज के दिशा निर्देश स्पष्ट नहीं हैं। जहां बस शेल्टर बने हैं वहां अव्यवस्था रहती है।
- रश्मि, छात्रा, गुरुग्राम विश्वविद्यालय
पिंक बसें किन रूटों पर चल रही है इसके बारे में महिलाओं को पता होना चाहिए। सिटी बस सेवा को बस स्टॉपेज की जगह पर विचार करना चाहिए।
- मीना गर्ग, महासचिव अखिल भारतीय वैश्य महिला महासंघ
गुरुग्राम की सड़कों पर बहुत गड्ढे हैं। बसों को चलाना बहुत मुश्किल है। हमारी 200 नई बसें अक्टूबर तक आ जाएंगी तो नए गुरुग्राम में भी सभी रुटों पर बसें उतारी जाएंगी। सड़के नई नहीं बन सकती हैं लेकिन जो गड्ढे बड़े हो गए हैं उन्हें भरा जान चाहिए।
-- राजीव नागपाल, जीएम,जीएमबीसीएल
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पिंक बस में अधिकतम किराया 20 रुपये है
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम मेट्रोपोलिटन बस सर्विस ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर की महिलाओं के लिए पिंक बस की सेवा शुरू की थी। यह बस मिलेनियम सिटी मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन और मुद्रिका रूट पर चलाई गई। जागरूकता की कमी और स्टॉपेज की जानकारी नहीं होने से चार महीने बाद भी बसें खाली ही दौड़ रही हैं।
मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन रूट नंबर 116 पर मंगलवार दोपहर 2:20 बजे बस में संवाददाता समेत दो महिला यात्री, एक महिला कंडक्टर और ड्राइवर मौजूद थे। बस कंडक्टर ने बताया कि रोजाना यह बस सात फेरे लगाती है। चार फेरे हो चुके हैं और किराया अबतक केवल 500 रुपो प्राप्त हुआ है। इस बस का अधिकतम किराया 20 रुपये प्रति यात्री होता है। बस में ड्राइवर और कंडक्टर समेत 55 सीटें होती हैं। खड़े होने की सुविधा है लेकिन पिंक बसें अक्सर खाली दौड़ती हैं। पिक आवर में भी गिनी चुनी महिलाएं इसमें सफर करती हैं। ड्राइवरों का कहना है कि केवल महिला यात्री को बैठाने की इजाजत है। अगर कोई महिला अपने पति और बच्चों या किसी पुरुष के साथ होती है तो उसे नहीं बैठाते। इस बात की इजाजत हो कि महिला परिवार सहित हो तो उसे बैठाया जाए तो कुछ यात्री बढ़ेंगे। रूट संख्या 111 यानी मुद्रिका जो मेट्रो स्टेशन से शहर पुराने शहर की लगभग परिक्रमा करती है। इसमें भी गिनी चुनी महिलाएं रहती हैं।
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स्टॉपेज में सुधार की जरूरत
महिलाओं का कहना है कि पिंक बस को लेकर महिलाओं के बीच खास तौर पर स्कूल-कॉलेज की लड़कियों में जागरूकता की जरूरत है। मेट्रो तक जाने वाली महिलाएं कैब, ऑटो का सहारा लेती हैं क्योंकि उन्हें बस के बारे में पता नहीं है। मुख्य जगहों पर स्टॉपेज नहीं बनाए गए हैं। जहां बस शेल्टर हैं वहां आम बसें भी नहीं रुकती हैं। रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड के बीच स्टॉपेज के लिए लगे बोर्ड गायब गायब हैं।
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पिंक बसों की जानकारी अधिकतर महिलाओं को नहीं है। स्टॉपेज के दिशा निर्देश स्पष्ट नहीं हैं। जहां बस शेल्टर बने हैं वहां अव्यवस्था रहती है।
- रश्मि, छात्रा, गुरुग्राम विश्वविद्यालय
पिंक बसें किन रूटों पर चल रही है इसके बारे में महिलाओं को पता होना चाहिए। सिटी बस सेवा को बस स्टॉपेज की जगह पर विचार करना चाहिए।
- मीना गर्ग, महासचिव अखिल भारतीय वैश्य महिला महासंघ
गुरुग्राम की सड़कों पर बहुत गड्ढे हैं। बसों को चलाना बहुत मुश्किल है। हमारी 200 नई बसें अक्टूबर तक आ जाएंगी तो नए गुरुग्राम में भी सभी रुटों पर बसें उतारी जाएंगी। सड़के नई नहीं बन सकती हैं लेकिन जो गड्ढे बड़े हो गए हैं उन्हें भरा जान चाहिए।