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Gurugram News: एनएचआरसी ने हरियाणा और राजस्थान सरकार को जारी किया नोटिस
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- अंग प्रत्यारोपण रैकेट भंडाफोड़ का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अंग प्रत्यारोपण रैकेट हरियाणा और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें रैकेट के भंडाफोड़ से संबंधित रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर मांगी गई है। रिपोर्ट में मानव अंगों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए उठाए गए उपायों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है कि हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कथित तौर पर हरियाणा और राजस्थान राज्यों में चल रहे एक अंग प्रत्यारोपण रैकेट का भंडाफोड़ किया है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुग्राम के सेक्टर-39 के एक गेस्ट हाउस में दबिश दी थी। वहां टीम ने पाया कि एक बांग्लादेशी नागरिक वित्तीय सौदे के तहत जयपुर के एक अस्पताल में अपनी किडनी दान करने के बाद वहां मेडिकल रेस्ट ले रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया। आयोग ने पाया है कि समाचार रिपोर्ट की सामग्री, यदि सही है, तो यह मानव अधिकारों के उल्लंघन का यह गंभीर मुद्दा है। मानव अंगों के अवैध व्यापार के विषय से निपटने के लिए भारत में एक विशिष्ट कानून है। मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994, जिसे मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011 द्वारा संशोधित किया गया है। यह वर्ष 2014 में लागू हुआ है। हरियाणा और राजस्थान दोनों राज्यों ने भी इसे अपनाया है।
आयोग ने हरियाणा और राजस्थान सरकारों के मुख्य सचिवों और दोनों राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर की स्थिति, गिरफ्तारी और अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह भी जानकारी मांगी है कि मानव अंगों के गैरकानूनी और अवैध व्यापार के खतरे को रोकने के लिए अब तक दोनों सरकारों द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिक बांग्लादेश में एक मोबाइल की दुकान चला रहा था। उसे झारखंड के रांची स्थित एक एजेंट द्वारा भारत भेजा गया था। उसकी किडनी के लिए बांग्लादेशी मुद्रा में 4 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। उसने यह भी खुलासा किया है कि मरीज के साथ उसका कोई खून का रिश्ता नहीं है और किडनी उसने केवल वित्तीय लाभ के लिए दी थी।
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ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अंग प्रत्यारोपण रैकेट हरियाणा और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें रैकेट के भंडाफोड़ से संबंधित रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर मांगी गई है। रिपोर्ट में मानव अंगों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए उठाए गए उपायों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है कि हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कथित तौर पर हरियाणा और राजस्थान राज्यों में चल रहे एक अंग प्रत्यारोपण रैकेट का भंडाफोड़ किया है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुग्राम के सेक्टर-39 के एक गेस्ट हाउस में दबिश दी थी। वहां टीम ने पाया कि एक बांग्लादेशी नागरिक वित्तीय सौदे के तहत जयपुर के एक अस्पताल में अपनी किडनी दान करने के बाद वहां मेडिकल रेस्ट ले रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया। आयोग ने पाया है कि समाचार रिपोर्ट की सामग्री, यदि सही है, तो यह मानव अधिकारों के उल्लंघन का यह गंभीर मुद्दा है। मानव अंगों के अवैध व्यापार के विषय से निपटने के लिए भारत में एक विशिष्ट कानून है। मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994, जिसे मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011 द्वारा संशोधित किया गया है। यह वर्ष 2014 में लागू हुआ है। हरियाणा और राजस्थान दोनों राज्यों ने भी इसे अपनाया है।
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आयोग ने हरियाणा और राजस्थान सरकारों के मुख्य सचिवों और दोनों राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर की स्थिति, गिरफ्तारी और अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह भी जानकारी मांगी है कि मानव अंगों के गैरकानूनी और अवैध व्यापार के खतरे को रोकने के लिए अब तक दोनों सरकारों द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिक बांग्लादेश में एक मोबाइल की दुकान चला रहा था। उसे झारखंड के रांची स्थित एक एजेंट द्वारा भारत भेजा गया था। उसकी किडनी के लिए बांग्लादेशी मुद्रा में 4 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। उसने यह भी खुलासा किया है कि मरीज के साथ उसका कोई खून का रिश्ता नहीं है और किडनी उसने केवल वित्तीय लाभ के लिए दी थी।
ब्यूरो