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एनजीटी ने वन भूमि आईओसीएल को देने के मामले में डीसी से रिपोर्ट मांगी
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नई दिल्ली/गुरुग्राम। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नियमों का उल्लंघन करने के आरोप वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपायुक्त गुरुग्राम और प्रभागीय वानिकी अधिकारी से ईमेल के माध्यम से दो महीने के अंदर रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की खंडपीठ ने जारी किए हैं।
मानव आवा ट्रस्ट द्वारा एक याचिका दायर की गई है जिसमें कहा है कि हरियाणा सरकार ने इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को गुरुग्राम स्थित अरावली रेंज की चक्करपुर गांव में 1500 वर्ग मीटर आवंटित की है। इसमें ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि वन विभाग ने उपायुक्त को बताया कि विचाराधीन स्थल जंगल का हिस्सा था। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में इसका उपयोग गैर-वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर वन विभाग, नगर निगम के उक्त स्टैंड के बावजूद, कानून लागू करने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई करने में विफल रहा है। अरावली रेंज के संबंध में गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि का उपयोग भी एमओईएफ अधिसूचना का उल्लंघन है।
इस प्रकरण में एनजीटी ने ट्रस्ट का तर्क सुनने के बाद आईओसीएल को वन भूमि के डायवर्जन का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट मांगी है।
एनजीटी के अध्यक्ष ने उपायुक्त, गुरुग्राम और प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया के बाद कानून लागू करें। उपायुक्त, गुरुग्राम और प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से एक कार्रवाई की रिपोर्ट ई-मेल द्वारा दो महीने के भीतर दायर करें। एनजीटी ने यह भी कहा है कि हमें किसी अन्य पक्ष से प्रतिक्रिया मांगने की जरूरत नहीं है।
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मानव आवा ट्रस्ट द्वारा एक याचिका दायर की गई है जिसमें कहा है कि हरियाणा सरकार ने इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को गुरुग्राम स्थित अरावली रेंज की चक्करपुर गांव में 1500 वर्ग मीटर आवंटित की है। इसमें ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि वन विभाग ने उपायुक्त को बताया कि विचाराधीन स्थल जंगल का हिस्सा था। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में इसका उपयोग गैर-वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर वन विभाग, नगर निगम के उक्त स्टैंड के बावजूद, कानून लागू करने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई करने में विफल रहा है। अरावली रेंज के संबंध में गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि का उपयोग भी एमओईएफ अधिसूचना का उल्लंघन है।
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इस प्रकरण में एनजीटी ने ट्रस्ट का तर्क सुनने के बाद आईओसीएल को वन भूमि के डायवर्जन का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट मांगी है।
एनजीटी के अध्यक्ष ने उपायुक्त, गुरुग्राम और प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया के बाद कानून लागू करें। उपायुक्त, गुरुग्राम और प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से एक कार्रवाई की रिपोर्ट ई-मेल द्वारा दो महीने के भीतर दायर करें। एनजीटी ने यह भी कहा है कि हमें किसी अन्य पक्ष से प्रतिक्रिया मांगने की जरूरत नहीं है।
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