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Gurugram News: कन्या पूजन कर नवरात्रों के व्रत किये संपन्न
Wed, 01 Oct 2025 11:09 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Wed, 01 Oct 2025 11:09 PM IST
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कंजिकाओं से आशीर्वाद लेते लोग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। शक्ति उपासना के नौ दिवसीय पर्व नवरात्रों का समापन मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। इस अवसर पर घर-घर में धार्मिक अनुष्ठान हुए और भक्तों ने माता रानी के जयकारों के बीच कन्या पूजन कर नवरात्रि का व्रत संपन्न किया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। देवी भक्तों ने मां दुर्गा को भोग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
परंपरा के अनुसार, नवमी और अष्टमी तिथि को कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। महिलाओं ने सवेरे ही घरों में पकवान बनाए और सात से ग्यारह वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित कर पूजन किया। कन्याओं के पांव धोकर उन्हें चुनरी ओढ़ाई गई और रोली-चावल से तिलक कर थाली सजाई गई। इसके बाद पूड़ी, हलवा और चने का भोग परोसा गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और परिवार पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं।
मंदिरों और घरों में पूरे दिन भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। भक्तों ने व्रत समाप्ति के बाद प्रसाद वितरित कर धार्मिक उल्लास को साझा किया। जगह-जगह भक्त मंडलियों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन यज्ञ का आयोजन कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। नवरात्रि के समापन के साथ ही विजयदशमी की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक उत्सव का रंग देखने को मिला। लोग मानते हैं कि नवरात्रि का पर्व जहां आत्मशुद्धि और भक्ति का प्रतीक है, वहीं कन्या पूजन से समाज में बेटियों के प्रति सम्मान का संदेश भी जाता है।
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पुन्हाना। शक्ति उपासना के नौ दिवसीय पर्व नवरात्रों का समापन मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। इस अवसर पर घर-घर में धार्मिक अनुष्ठान हुए और भक्तों ने माता रानी के जयकारों के बीच कन्या पूजन कर नवरात्रि का व्रत संपन्न किया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। देवी भक्तों ने मां दुर्गा को भोग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
परंपरा के अनुसार, नवमी और अष्टमी तिथि को कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। महिलाओं ने सवेरे ही घरों में पकवान बनाए और सात से ग्यारह वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित कर पूजन किया। कन्याओं के पांव धोकर उन्हें चुनरी ओढ़ाई गई और रोली-चावल से तिलक कर थाली सजाई गई। इसके बाद पूड़ी, हलवा और चने का भोग परोसा गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और परिवार पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं।
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मंदिरों और घरों में पूरे दिन भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। भक्तों ने व्रत समाप्ति के बाद प्रसाद वितरित कर धार्मिक उल्लास को साझा किया। जगह-जगह भक्त मंडलियों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन यज्ञ का आयोजन कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। नवरात्रि के समापन के साथ ही विजयदशमी की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक उत्सव का रंग देखने को मिला। लोग मानते हैं कि नवरात्रि का पर्व जहां आत्मशुद्धि और भक्ति का प्रतीक है, वहीं कन्या पूजन से समाज में बेटियों के प्रति सम्मान का संदेश भी जाता है।
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