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Gurugram News: नगर निगम अब नहीं करेगा तोड़फोड़, केंद्रीय मंत्री ने दिया भरोसा
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नाथूपुर, सिकंदरपुर आदि के ग्रामीण दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत से मिले
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गांव नाथूपुर, सिंकदरपुर और चकरपुर में पुश्तैनी मकानों पर नगर निगम द्वारा की जा रही तोड़फोड़ के विरोध में ग्रामीणों का धरना लगातार जारी है। इसी क्रम में ग्रामीण सोमवार को दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद राव इंद्रजीत सिंह से मिले। केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि अब तोड़फोड़ नहीं होगी। इस संबंध में वह जल्द ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी बात करेंगे।
ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि गांव की आबादी का विस्तार हुआ लेकिन लाल डोरा नहीं बढ़ा। जब लाल डोरा था तब गांव की आबादी मात्र एक हजार थी। अब 20 हजार से ज्यादा है। पंचायत के समय गांव के पास देह शामलात जमीन पर मकान बना लिए गए थे। पूर्व में भाजपा-इनेलो की सरकार में एक कानून पास हुआ था। जिसमें कहा था कि पंचायत की जमीन पर जो मकान बने हुए हैं, उनके दो-दो सौ गज के रेग्यूलेशन पंचायत पास करके उस समय के जो भी सरकारी न्यूनतम रेट हैं, उसके तहत रुपया जमा करके उनको मालिकाना हक दिया जाए। इंदिरा गांधी आवास के तहत सौ-सौ गज के प्लाट 1977 में भी मिले थे वह भी यहीं पर हैं। अब नगर निगम इन मकानों को तोड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि नगर निगम का गठन 2008 में हुआ। जबकि उनके गांव सैकड़ों वर्षों से बसे हुए हैं। दशकों पुराने मकान हैं। तब गांव में मकान बनाने के लिए कोई नियम कानून नहीं था। नक्शा पास करवाने का प्रावधान नहीं था। गांव की आबादी के विस्तार के बाद भी लाल डोरे बढ़ाए नहीं गए हैं। गांवों की विस्तारित आबादी में जब भी कोई निवासी भवन निर्माण,पुनर्निर्माण, मरम्मत इत्यादि करता है,तो नगर निगम के अधिकारी नोटिस भेजते हैं। बाद में मकानों की तोड़फोड़ करके प्रताड़ित करते हैं। इससे पूरे समाज में भय व्याप्त है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गांव नाथूपुर, सिंकदरपुर और चकरपुर में पुश्तैनी मकानों पर नगर निगम द्वारा की जा रही तोड़फोड़ के विरोध में ग्रामीणों का धरना लगातार जारी है। इसी क्रम में ग्रामीण सोमवार को दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद राव इंद्रजीत सिंह से मिले। केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि अब तोड़फोड़ नहीं होगी। इस संबंध में वह जल्द ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी बात करेंगे।
ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि गांव की आबादी का विस्तार हुआ लेकिन लाल डोरा नहीं बढ़ा। जब लाल डोरा था तब गांव की आबादी मात्र एक हजार थी। अब 20 हजार से ज्यादा है। पंचायत के समय गांव के पास देह शामलात जमीन पर मकान बना लिए गए थे। पूर्व में भाजपा-इनेलो की सरकार में एक कानून पास हुआ था। जिसमें कहा था कि पंचायत की जमीन पर जो मकान बने हुए हैं, उनके दो-दो सौ गज के रेग्यूलेशन पंचायत पास करके उस समय के जो भी सरकारी न्यूनतम रेट हैं, उसके तहत रुपया जमा करके उनको मालिकाना हक दिया जाए। इंदिरा गांधी आवास के तहत सौ-सौ गज के प्लाट 1977 में भी मिले थे वह भी यहीं पर हैं। अब नगर निगम इन मकानों को तोड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने कहा कि नगर निगम का गठन 2008 में हुआ। जबकि उनके गांव सैकड़ों वर्षों से बसे हुए हैं। दशकों पुराने मकान हैं। तब गांव में मकान बनाने के लिए कोई नियम कानून नहीं था। नक्शा पास करवाने का प्रावधान नहीं था। गांव की आबादी के विस्तार के बाद भी लाल डोरे बढ़ाए नहीं गए हैं। गांवों की विस्तारित आबादी में जब भी कोई निवासी भवन निर्माण,पुनर्निर्माण, मरम्मत इत्यादि करता है,तो नगर निगम के अधिकारी नोटिस भेजते हैं। बाद में मकानों की तोड़फोड़ करके प्रताड़ित करते हैं। इससे पूरे समाज में भय व्याप्त है।
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