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Gurugram News: एंटी करप्शन ब्यूरो में आधे से अधिक पद खाली
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मैन पावर बढ़ाने को एंटी करप्शन ब्यूरो ने सरकार को लिखा पत्र
साल भर में चार गुना हो गए भ्रष्टाचार के मामले
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने वालों की राह में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या न होना रोड़ा बन रही है। एंटी करप्शन ब्यूरो में आने वाली शिकायत और दर्ज होने वाले मामलों की जांच के लिए 103 पद सृजित है, मगर यहां पर 51 लोगों की तैनाती है। ऐसे में उन पर काम का दबाव बना रहता है। एंटी करप्शन ब्यूूूरो के प्रमुख की ओर से सरकार को इस समास्या से अवगत कराया जा चुका है। काम के बोझ का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि पहले ब्यूरो की ओर से साल भर में 10 से 11 मामले दर्ज किए जाते थे, अब यह बढ़कर 49 मामले हो गए हैं।
एंटी करप्शन ब्यूरो का नाम आते ही लोगों को पसीना आ जाता है मगर उसके पास आने वाली शिकायत और जांच पूरी होने के बाद मामला दर्ज किया जाता है। मामले में आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान देने तक लगा रहना होता है।
एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से होने वाली कार्रवाई के बाद आम लोगों में इसका विश्वास बढ़ा है। इसके चलते शिकायतें भी बढ़ी और उसकी जांच कर मामला दर्ज होने की संख्या भी बढ़ी है।
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75 मुकदमे की चल रही है तफ्तीश, 50 से अधिक शिकायतों की जांच
एंटी करप्शन ब्यूरो में 2018 में 16, वर्ष 2019 में 11, वर्ष 2020 में 05, वर्ष 2021 में 17, वर्ष 2022 में 49 मामले दर्ज हुए हैं। तीन माह में इस वर्ष अब तक 15 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। 75 मामले अनुसंधान हीन हैं। सरकारी विभागों में एसबीपी से लेकर नगर निगम व तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की बू सबसे अधिक है। प्लाट आवंटन में गोल-माल करने के हाल ही में तीन मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें हुडा के कर्मचारी भगोड़ा घोषित हो रहे हैं। तहसीलदार दर्पण कंबोज के कारनामे की गूंज मुख्यालय तक है।
भ्रष्टाचारियों के नेटवर्क को तोड़ने में होती है परेशानी
मामले की जांच के दौरान लाभ लेने वालों पर जब शिकंजा कसता है तो उसके नेटवर्क का पता चलता है। जिसे तोड़ने में एसीबी को परेशानी होती है। कोई हाईकमान की मदद लेता है तो कोई अदालत से राहत लेकर घूम रहा होता है। कई मामले तो ऐसे दर्ज है जिसमें आरोपी फरार है। उनकी गिरफ्तारी के बाद आने वाली क्लोजर रिपोर्ट पर अन्य को दबोचा जाता है।
वर्जन
भ्रष्टाचार को लेकर शिकायतों की संख्या अधिक है। उन पर तुरंत जांच कर मामला दर्ज किया जाता है। शिकायत व क्षेत्र के हिसाब से तैनात लोगों की संख्या कम है। इसके लिए सरकार को लिखा जा चुका है।
चन्द्रमोहन, प्रभारी एंटी करप्शन ब्यूरो, गुरुग्राम।
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साल भर में चार गुना हो गए भ्रष्टाचार के मामले
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने वालों की राह में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या न होना रोड़ा बन रही है। एंटी करप्शन ब्यूरो में आने वाली शिकायत और दर्ज होने वाले मामलों की जांच के लिए 103 पद सृजित है, मगर यहां पर 51 लोगों की तैनाती है। ऐसे में उन पर काम का दबाव बना रहता है। एंटी करप्शन ब्यूूूरो के प्रमुख की ओर से सरकार को इस समास्या से अवगत कराया जा चुका है। काम के बोझ का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि पहले ब्यूरो की ओर से साल भर में 10 से 11 मामले दर्ज किए जाते थे, अब यह बढ़कर 49 मामले हो गए हैं।
एंटी करप्शन ब्यूरो का नाम आते ही लोगों को पसीना आ जाता है मगर उसके पास आने वाली शिकायत और जांच पूरी होने के बाद मामला दर्ज किया जाता है। मामले में आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान देने तक लगा रहना होता है।
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एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से होने वाली कार्रवाई के बाद आम लोगों में इसका विश्वास बढ़ा है। इसके चलते शिकायतें भी बढ़ी और उसकी जांच कर मामला दर्ज होने की संख्या भी बढ़ी है।
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75 मुकदमे की चल रही है तफ्तीश, 50 से अधिक शिकायतों की जांच
एंटी करप्शन ब्यूरो में 2018 में 16, वर्ष 2019 में 11, वर्ष 2020 में 05, वर्ष 2021 में 17, वर्ष 2022 में 49 मामले दर्ज हुए हैं। तीन माह में इस वर्ष अब तक 15 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। 75 मामले अनुसंधान हीन हैं। सरकारी विभागों में एसबीपी से लेकर नगर निगम व तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की बू सबसे अधिक है। प्लाट आवंटन में गोल-माल करने के हाल ही में तीन मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें हुडा के कर्मचारी भगोड़ा घोषित हो रहे हैं। तहसीलदार दर्पण कंबोज के कारनामे की गूंज मुख्यालय तक है।
भ्रष्टाचारियों के नेटवर्क को तोड़ने में होती है परेशानी
मामले की जांच के दौरान लाभ लेने वालों पर जब शिकंजा कसता है तो उसके नेटवर्क का पता चलता है। जिसे तोड़ने में एसीबी को परेशानी होती है। कोई हाईकमान की मदद लेता है तो कोई अदालत से राहत लेकर घूम रहा होता है। कई मामले तो ऐसे दर्ज है जिसमें आरोपी फरार है। उनकी गिरफ्तारी के बाद आने वाली क्लोजर रिपोर्ट पर अन्य को दबोचा जाता है।
वर्जन
भ्रष्टाचार को लेकर शिकायतों की संख्या अधिक है। उन पर तुरंत जांच कर मामला दर्ज किया जाता है। शिकायत व क्षेत्र के हिसाब से तैनात लोगों की संख्या कम है। इसके लिए सरकार को लिखा जा चुका है।
चन्द्रमोहन, प्रभारी एंटी करप्शन ब्यूरो, गुरुग्राम।
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