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Gurugram News: विधायक की जमीन को भी मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर अपने नाम चढ़ाया

Sun, 30 Jul 2023 10:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jul 2023 10:45 PM IST
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MLA's land was also offered in his name on Meri Fasal-Mera Byora portal
सैकड़ों किसानों की जमीन को माफियाओं ने पोर्टल पर अपने नाम किया
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अब तक 7394 किसानों ने एतराज जताया कि उनकी जमीन को अन्य लोगों ने अपने नाम से पोर्टल पर चढ़ाया

शेरसिंह डागर
नूंह। मेरी फसल, मेरा ब्यौरा योजना इन दिनों किसानों के गले की फांस बन गई है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ माफिया सक्रिय हैं। जो किसानों की जमीन को पोर्टल पर पट्टे पर दिखाकर फसल को अपने नाम से चढ़ा रहे हैं। ये माफिया आम किसान के साथ-साथ बड़े लोगों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं चूक रहे हैं। नूंह जिले में तो स्थिति यह है कि पूर्व मंत्री एवं नूंह से विधायक आफताब अहमद की जमीन को भी किसी अन्य व्यक्ति ने मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल पर किसी अन्य व्यक्ति ने अपने नाम चढ़ाकर उस पर बाजरे की फसल दर्शा दी है। जब विधायक आफताब अहमद ने अपनी जमीन को पोर्टल पर चढ़वाना चाहा तो उस समय इसका खुलासा हुआ। इस सदंर्भ में जब फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्ति से संपर्क किया तो उसका जवाब भी संतोषजनक नहीं था। ऐसे में विधायक ने उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कराने की बात कही है। ऐसे सैकड़ों किसान हैं, जिनकी जमीन को ऐसे ही कुछ माफियाओं ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पट्टे पर लिया हुआ अपने नाम दर्शाया है। यह सब सरकार द्वारा किसानों को मिलने वाली भावांतर राशि को हड़पने के लिए किया जा रहा है। हर गांव से बीस से तीस शिकायतें ऐसी हैं। खास बात यह है कि कृषि विभाग द्वारा भी इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। काफी शिकायतें विभाग के पास हैं। ऐसे में किसान अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
अभी तक जिले में विभाग ने 193594 एकड़ का पंजीकरण किया हुआ है। साथ ही 7394 किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन पर अन्य किसानों ने अपने नाम किया हुआ है। इनमें से महज 1615 किसानों की शिकायत को राजस्व विभाग द्वारा ठीक किया गया है। जो रह गए हैं वो बाकी हैं। किसानों ने अन्य किसान जयराम छपेड़ा, सुखीराम देशवाल, भगत सिंह तंवर, इलियास, अख्तर हुसैन का कहना है कि सरकार आए दिन नए-नए प्रयोग कर किसान के लिए मुश्किल पैदा कर रही है। सरकार ऐसे पोर्टल को बंद करे और किसानों के बाजरे व अन्य फसलों को एमएसपी पर खरीदे। हर गांव में यह समस्या आ रही है। पोर्टल पर आपत्ति जताई जाती है तो भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। अब किसान अपनी ही जमीन पर अपनी फसल को नहीं चढ़ा पा रहा है और कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
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यह सरकार पोर्टल की सरकार है। हम किसानों को भरोसा देते हैं, भाजपा के साथ-साथ पोर्टल को भी विदा कर देंगे। आम किसान दुखी है, उसकी जमीन को दूसरे व्यक्ति ने अपने नाम चढ़ाया हुआ है। खुद मेरी जमीन को भी अन्य व्यक्ति ने अपने नाम पट्टे पर चढ़ाया हुआ है। ऐसे माफियाओं पर कार्रवाई होनी चाहिए। -आफताब अहमद, पूर्व मंत्री एवं विधायक नूंह
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फोटो- बाजरे की फसल।

-आफताब अहमद।
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