{"_id":"60fd9da18ebc3e57f05937f5","slug":"millions-spent-on-sugar-machines-yet-no-cleaning-of-drains-gurgaon-news-noi5956442101","type":"story","status":"publish","title_hn":"शकर मशीनों पर लाखों खर्च फिर भी नालों की सफाई नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शकर मशीनों पर लाखों खर्च फिर भी नालों की सफाई नहीं
विज्ञापन
गुरुग्राम। बेहतर जलनिकासी के लिए निगमायुक्त पिछले दो माह में भले ही कई दौर की बैठकें कर चुके हों, लेकिन सच्चाई यह है कि निगम प्रशासन ठेकेदारों से अब तक सभी नालों की सफाई तक नहीं करा पाया है। यह स्थिति तब है जब किराये की शकर मशीनों पर अब तक लाखों खर्च किए जा चुके हैं लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है। यहां तक कि पार्षद खुद निगम प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि यदि मानसून से पहले ही निगम प्रशासन की तरफ से सभी नालों की सही तरीके से सफाई की गई होती तो शहर तालाब न बनता।
मानसून की दूसरी बारिश में शहर में व्यापक स्तर पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली थी। इस बारे में वार्ड 19 के पार्षद अश्वनी शर्मा ने बताया कि कोरोना काल से ही वह नालों की सफाई कराने के लिए अधिकारियों से आग्रह कर रहे थे लेकिन मामला सिर्फ बैठकों तक ही सीमित रहा। वहीं, निगमायुक्त के आदेश के बाद जब सफाई कराई भी गई तो वह कुछ जगहों तक ही सीमित रही। वहीं पूर्व पार्षद मंगतराम बागरी ने कहा कि वार्ड-10 के बाहरी इलाकों में तो पहले ही सफाई कराई जा चुकी है लेकिन अंदरूनी इलाकों में अब जाकर नालों की सफाई का कार्य किया जा रहा है।
निगम के पास नहीं है एक भी मशीन
हैरत की बात यह है कि विकास कार्यों पर मोटी धनराशि खर्च करने वाले नगर निगम गुरुग्राम के पास अब तक अपनी एक भी बड़ी शकर मशीन नहीं है, जिससे नालों की सफाई कराई जा सके। वार्ड-13 के पार्षद ब्रह्म प्रकाश यादव ने बताया कि निगम प्रशासन ने 6 शकर मशीनें ले रखी हैं। खास बात यह है कि इस मामले में ठेकेदारों ने भी अपना गठबंधन कर रखा है। ठेकेदारों ने अपना-अपना क्षेत्र बांट लिया है और एक-दूसरे के वार्डों से संबंधित ठेकों में कोई दखल नहीं देते। नगर निगम प्रशासन शकर मशीनों के लिए रोजाना के हिसाब से ठेकेदारों को 15-20 हजार रुपये का भुगतान करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मानसून की दूसरी बारिश में शहर में व्यापक स्तर पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली थी। इस बारे में वार्ड 19 के पार्षद अश्वनी शर्मा ने बताया कि कोरोना काल से ही वह नालों की सफाई कराने के लिए अधिकारियों से आग्रह कर रहे थे लेकिन मामला सिर्फ बैठकों तक ही सीमित रहा। वहीं, निगमायुक्त के आदेश के बाद जब सफाई कराई भी गई तो वह कुछ जगहों तक ही सीमित रही। वहीं पूर्व पार्षद मंगतराम बागरी ने कहा कि वार्ड-10 के बाहरी इलाकों में तो पहले ही सफाई कराई जा चुकी है लेकिन अंदरूनी इलाकों में अब जाकर नालों की सफाई का कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन
निगम के पास नहीं है एक भी मशीन
हैरत की बात यह है कि विकास कार्यों पर मोटी धनराशि खर्च करने वाले नगर निगम गुरुग्राम के पास अब तक अपनी एक भी बड़ी शकर मशीन नहीं है, जिससे नालों की सफाई कराई जा सके। वार्ड-13 के पार्षद ब्रह्म प्रकाश यादव ने बताया कि निगम प्रशासन ने 6 शकर मशीनें ले रखी हैं। खास बात यह है कि इस मामले में ठेकेदारों ने भी अपना गठबंधन कर रखा है। ठेकेदारों ने अपना-अपना क्षेत्र बांट लिया है और एक-दूसरे के वार्डों से संबंधित ठेकों में कोई दखल नहीं देते। नगर निगम प्रशासन शकर मशीनों के लिए रोजाना के हिसाब से ठेकेदारों को 15-20 हजार रुपये का भुगतान करता है।
विज्ञापन