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मुख्य नागरिक अस्पताल में अब तक नहीं शुरू हो सके कई विभाग
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गुरुग्राम। विश्व के फलक पर काबिज साइबर सिटी के मुख्य नागरिक अस्पताल में अब तक नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी समेत कई रोगों के विभाग शुरू नहीं हो सके हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक है कि इनके विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति तक नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को अदद चिकित्सकीय परामर्श मिल सके। ऐसे में इन मरीजों को अस्पताल प्रबंधन मजबूरी में दिल्ली एम्स या फिर शहर के निजी अस्पतालों में रेफर करता है।
वहीं, जो विभाग चल रहे हैं उनमें भी डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगती है। इससे निचले व मध्यवर्गीय तबके के मरीजों को काफी समस्या हो रही है। सेक्टर-10 स्थित जिले के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल से जवाब मिलने पर गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में कई बार तो एक बार में ही निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगीभर की कमाई को सोख लेते हैं। इसको देखते हुए सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में विभिन्न रोगों से जुड़े कई विभागों को शुरू किए जाने की सख्त जरूरत है। वहीं, जिले की बड़ी आबादी को देखते हुए जो विभाग चल रहे हैं, उनमें डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ाए जाने की दरकार है।
परामर्श के लिए चिकित्सक तक नहीं
हालत इतनी दयनीय है कि हरियाणा के सबसे हाईटेक कहे जाने वाले गुुरुग्राम जिले के मुख्य नागरिक अस्पताल में ह्रदय, गुर्दा, किडनी, मस्तिष्क, तंत्रिका व मूत्र रोग समेत कई अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को परामर्श देने के लिए एक कंसल्टेंट तक नहीं है। ऐसे में इन मरीजों को न चाहते हुए भी निजी अस्पतालों या फिर दिल्ली एम्स के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस बारे में पूछने पर जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से मना करते हैं।
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उच्चाधिकारी ही जानकारी दे पाएंगे : सीएमओ
जब इस बारे में जब स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये विभाग सिविल अस्पताल के स्तर के नहीं हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि इस पर स्वास्थ्य महानिदेशालय से ही योजनाएं बनती है तो उच्चाधिकारी ही इस बारे में जानकारी दे पाएंगे। सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में रोजाना ही बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें उचित इलाज न मिलने पर या तो वापस लौटना पड़ता है या फिर अस्पताल के फिजीशियन प्राथमिक तौर पर परामर्श देकर अन्य अस्पतालों के लिए स्थानांतरित कर देते हैं।
घबराहट होती है और पेट में तनाव रहता है। अस्पताल में इलाज के लिए आया हूं। डॉक्टरों ने एक्सरे कराने को कहा है। यहां मरीजों की भारी भीड़ है। गैस्ट्रो का कोई अलग से डिपार्टमेंट नहीं है। एक्सरे के बाद निजी अस्पताल में ही दिखाएंगे।
- अजय, मरीज
शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा है, कमजोरी रहती है। प्राथमिक तौर पर देखते ही डॉक्टर ने एक्सरे व अल्ट्रासाउंड के लिए बोला है। एक्सरे तो हो जाएगा लेकिन अल्ट्रासाउंड का पता नहीं। डॉक्टरों की कमी के कारण यहां पर घंटों तक खड़े रहने के बाद नंबर आता है।
- दीपांश, मरीज
अस्पताल में चिकित्सकों की कोई कमी नहीं है। जनरल फिजिशियन, स्त्री रोग, बाल रोग, त्वचा रोग, आंख-कान-गला समेत अन्य जो भी विभाग चल रहे हैं, उनमें डॉक्टरों की कोई कमी नहीं हैं। हमारे पास पूरा स्टाफ है लेकिन नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसे कुछ विभाग हैं जो नहीं शुरू हो सके हैं। ऐसे में इनके मरीजों को अन्य जगहों पर स्थानांतरित करना पड़ता है।
- डॉ. मनीष राठी, चिकित्सा अधीक्षक, सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल
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वहीं, जो विभाग चल रहे हैं उनमें भी डॉक्टरों की कमी है, जिसके कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगती है। इससे निचले व मध्यवर्गीय तबके के मरीजों को काफी समस्या हो रही है। सेक्टर-10 स्थित जिले के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल से जवाब मिलने पर गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में कई बार तो एक बार में ही निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगीभर की कमाई को सोख लेते हैं। इसको देखते हुए सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में विभिन्न रोगों से जुड़े कई विभागों को शुरू किए जाने की सख्त जरूरत है। वहीं, जिले की बड़ी आबादी को देखते हुए जो विभाग चल रहे हैं, उनमें डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ाए जाने की दरकार है।
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परामर्श के लिए चिकित्सक तक नहीं
हालत इतनी दयनीय है कि हरियाणा के सबसे हाईटेक कहे जाने वाले गुुरुग्राम जिले के मुख्य नागरिक अस्पताल में ह्रदय, गुर्दा, किडनी, मस्तिष्क, तंत्रिका व मूत्र रोग समेत कई अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को परामर्श देने के लिए एक कंसल्टेंट तक नहीं है। ऐसे में इन मरीजों को न चाहते हुए भी निजी अस्पतालों या फिर दिल्ली एम्स के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस बारे में पूछने पर जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से मना करते हैं।
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उच्चाधिकारी ही जानकारी दे पाएंगे : सीएमओ
जब इस बारे में जब स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये विभाग सिविल अस्पताल के स्तर के नहीं हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि इस पर स्वास्थ्य महानिदेशालय से ही योजनाएं बनती है तो उच्चाधिकारी ही इस बारे में जानकारी दे पाएंगे। सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में रोजाना ही बड़ी संख्या में ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें उचित इलाज न मिलने पर या तो वापस लौटना पड़ता है या फिर अस्पताल के फिजीशियन प्राथमिक तौर पर परामर्श देकर अन्य अस्पतालों के लिए स्थानांतरित कर देते हैं।
घबराहट होती है और पेट में तनाव रहता है। अस्पताल में इलाज के लिए आया हूं। डॉक्टरों ने एक्सरे कराने को कहा है। यहां मरीजों की भारी भीड़ है। गैस्ट्रो का कोई अलग से डिपार्टमेंट नहीं है। एक्सरे के बाद निजी अस्पताल में ही दिखाएंगे।
- अजय, मरीज
शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा है, कमजोरी रहती है। प्राथमिक तौर पर देखते ही डॉक्टर ने एक्सरे व अल्ट्रासाउंड के लिए बोला है। एक्सरे तो हो जाएगा लेकिन अल्ट्रासाउंड का पता नहीं। डॉक्टरों की कमी के कारण यहां पर घंटों तक खड़े रहने के बाद नंबर आता है।
- दीपांश, मरीज
अस्पताल में चिकित्सकों की कोई कमी नहीं है। जनरल फिजिशियन, स्त्री रोग, बाल रोग, त्वचा रोग, आंख-कान-गला समेत अन्य जो भी विभाग चल रहे हैं, उनमें डॉक्टरों की कोई कमी नहीं हैं। हमारे पास पूरा स्टाफ है लेकिन नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसे कुछ विभाग हैं जो नहीं शुरू हो सके हैं। ऐसे में इनके मरीजों को अन्य जगहों पर स्थानांतरित करना पड़ता है।
- डॉ. मनीष राठी, चिकित्सा अधीक्षक, सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल