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Gurugram News: रक्तदान से बचाई जा रही एनीमिया पीड़ित महिलाओं की जान
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हर माह 900 गर्भवती करा रही इलाज, 10 फीसदी कुपोषित
पीएमएसएमए का लाभ लेने वाली 10 फीसदी गर्भवती कुपोषित
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। ब्लड बैंक में रक्तदान से मिलने वाला खून सबसे ज्यादा महिलाओं को चढ़ाया जा रहा है। यह महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित हैं। रक्त ग्रहण करने वाली महिलाओं में ज्यादातर गर्भवती हैं। वह प्रसव व सिजेरियन डिलीवरी के दौरान खून की भारी कमी से जूझ रही हैं। ऐसे में इन महिलाओं को ब्लड बैंक में रक्तदाताओं की ओर से मिलने वाले खून से जिंदगी दी जा रही है। हालांकि इस दौरान संबंधित महिला के परिजन से भी खून के बदले रक्तदान कराया जाता है।
हर माह स्वास्थ्य जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचने वाली पांच गर्भवतियों को भर्ती करने तक की नौबत आ रही है। इसका असर गर्भवती के साथ ही गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। ऐसी गर्भवती कुपोषण और खून की कमी से पीड़ित होने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच रही हैं। ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के जरिए सुविधा दी जा रही है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत एक ही दिन में सभी जांच व इलाज की सुविधा मिल रही है। जिला अस्पताल में अप्रैल, मई और जून माह में एक दिन में कुल 170 गर्भवती जांच के लिए पहुंची। इसमें करीब दस फीसदी गर्भवती कुपोषित मिली। ऐसी गर्भवतियों को अस्पताल में भर्ती कर पोषित आहार खिलाया जा रहा है। उधर प्रसव के दौरान इन महिलाओं में खून की भारी कमी हो रही है। ऐसी महिलाओं के लिए सबसे अधिक ब्लड सप्लाई करने की नौबत आ रही है। जिले में औसतन ब्लड बैंक में तीन श्रेणी में खून की मांग पहुंच रही हैं। इसमें एनीमिया पीड़ित महिलाओं के लिए खून की मांग सबसे अधिक है। इसके बाद दुर्घटना में घायल व अन्य श्रेणी के लोगों को रक्त की जरूरत पड़ रही है।
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गर्भवतियों को देना पड़ रहा पोषाहार
सामान्य ओपीडी में हर माह औसतन 900 गर्भवती इलाज के लिए पहुंच रही हैं। इसमें से करीब पांच से छह गर्भवतियों को इलाज के साथ पोषाहार देने की जरूरत पड़ रही है। ऐसी गर्भवतियों को भर्ती कर सुविधा मुहैया कराई जा रही है। मातृत्व सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) योजना शुरू की है। अभियान के तहत हर माह नौ तारीख को हर माह करीब 55 गर्भवती इलाज के लिए पहुंच रही हैं।
पीएमएसएमए के तहत गर्भवतियों को एक दिन में एक ही छत के नीचे इलाज व जांच की सुविधा देते हैं। गर्भवतियां ज्यादा से ज्यादा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लें। यह मां बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर समस्या है। - डॉ. अलका सिंह, स्त्री रोग विभागाध्यक्ष, नागरिक अस्पताल।
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पीएमएसएमए का लाभ लेने वाली 10 फीसदी गर्भवती कुपोषित
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। ब्लड बैंक में रक्तदान से मिलने वाला खून सबसे ज्यादा महिलाओं को चढ़ाया जा रहा है। यह महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित हैं। रक्त ग्रहण करने वाली महिलाओं में ज्यादातर गर्भवती हैं। वह प्रसव व सिजेरियन डिलीवरी के दौरान खून की भारी कमी से जूझ रही हैं। ऐसे में इन महिलाओं को ब्लड बैंक में रक्तदाताओं की ओर से मिलने वाले खून से जिंदगी दी जा रही है। हालांकि इस दौरान संबंधित महिला के परिजन से भी खून के बदले रक्तदान कराया जाता है।
हर माह स्वास्थ्य जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचने वाली पांच गर्भवतियों को भर्ती करने तक की नौबत आ रही है। इसका असर गर्भवती के साथ ही गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। ऐसी गर्भवती कुपोषण और खून की कमी से पीड़ित होने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच रही हैं। ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के जरिए सुविधा दी जा रही है।
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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत एक ही दिन में सभी जांच व इलाज की सुविधा मिल रही है। जिला अस्पताल में अप्रैल, मई और जून माह में एक दिन में कुल 170 गर्भवती जांच के लिए पहुंची। इसमें करीब दस फीसदी गर्भवती कुपोषित मिली। ऐसी गर्भवतियों को अस्पताल में भर्ती कर पोषित आहार खिलाया जा रहा है। उधर प्रसव के दौरान इन महिलाओं में खून की भारी कमी हो रही है। ऐसी महिलाओं के लिए सबसे अधिक ब्लड सप्लाई करने की नौबत आ रही है। जिले में औसतन ब्लड बैंक में तीन श्रेणी में खून की मांग पहुंच रही हैं। इसमें एनीमिया पीड़ित महिलाओं के लिए खून की मांग सबसे अधिक है। इसके बाद दुर्घटना में घायल व अन्य श्रेणी के लोगों को रक्त की जरूरत पड़ रही है।
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गर्भवतियों को देना पड़ रहा पोषाहार
सामान्य ओपीडी में हर माह औसतन 900 गर्भवती इलाज के लिए पहुंच रही हैं। इसमें से करीब पांच से छह गर्भवतियों को इलाज के साथ पोषाहार देने की जरूरत पड़ रही है। ऐसी गर्भवतियों को भर्ती कर सुविधा मुहैया कराई जा रही है। मातृत्व सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) योजना शुरू की है। अभियान के तहत हर माह नौ तारीख को हर माह करीब 55 गर्भवती इलाज के लिए पहुंच रही हैं।
पीएमएसएमए के तहत गर्भवतियों को एक दिन में एक ही छत के नीचे इलाज व जांच की सुविधा देते हैं। गर्भवतियां ज्यादा से ज्यादा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लें। यह मां बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर समस्या है। - डॉ. अलका सिंह, स्त्री रोग विभागाध्यक्ष, नागरिक अस्पताल।