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Gurugram News: कोचिंग सेंटरों में आग लगने के बाद बचाव के पर्याप्त साधन व व्यवस्था नहीं

Tue, 23 Jun 2026 11:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 11:03 PM IST
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Lack of adequate fire safety measures and arrangements in coaching centers.
बिना फायर एनओसी और सुरक्षा के संचालित किए जा रहे कोचिंग सेंटर
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इमारत में आग लेने से हो सकता है जान-माल का भारी नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद गुरुग्राम के कोचिंग संस्थान भी जिला प्रशासन के रडार पर आ गए हैं। साइबर सिटी में अधिकांश कोचिंग सेंटर आवश्यक फायर एनओसी और बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपकरणों के बिना ही संचालित किए जा रहे हैं।
अधिकतर कोचिंग सेंटरों में आग लगने जैसी घटना होने पर सुरक्षा संबंधी उपाय नहीं किए गए हैं। ऐसे में कोई हादसा होता है तो जान-माल का काफी नुकसान हो सकता है। हालांकि जिला फायर विभाग द्वारा गुरुग्राम में होटल, रेस्टोरेंट, पब, बार, पीजी, गेस्ट हाउस सहित अन्य इमारताें का ऑडिट किया जा रहा है। शहर में अधिकांश कोचिंग सेंटर में पहली या दूसरी मंजिल पर संचालित किए जा रहे हैं। इन सेंटर में चढ़ने व उतरने के लिए एक ही सीढ़ी बनाई गई है, जोकि करीब तीन फीट चौड़ी ही है। जबकि कोचिंग सेंटरों में एक क्लास में 40 से 60 से युवा पढ़ने आते हैं। इन कोचिंग सेंटरों को बिना फायर एनओसी ही संचालित किया जा रहा है। कोचिंग सेंटरों में स्टाफ व छात्रों की सुरक्षा के लिए उचित अग्निसुरक्षा उपकरणों, प्रशिक्षण की कमी, अग्निसुरक्षा ऑडिट का अभाव है। वहीं, फायर सेफ्टी मानकों के अनुसार उपकरण भी नहीं रखे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर आग बुझाने के लिए उनका प्रयोग किया जा सके।
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सेंटरों पर नहीं सुरक्षा मानक पूरे
अधिकांश कोचिंग सेंटर कम ऊंचाई वाली इमारत में पहली व दूसरी मंजिल पर बनाए गए हैं। इन सेंटरों में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरी सीढ़ी है। ऐसे में एक ही एंट्री-एग्जिट पॉइंट होने के कारण अगर आग लगने की घटना होती है तो कोचिंग लेने वाले युवाओं व स्टाफ को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाएगी। वहीं, कई कोचिंग सेंटर की कक्षाएं बिना अनुमति ही इमारतों की बेसमेंट में संचालित की जा रही हैं। जोकि आग लगने या जलभराव होने, दोनों ही स्थितियों में बेहद खतरनाक है।
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अग्निशामक यंत्रों पर ध्यान नहीं
अधिकतर कोचिंग सेंटर में फायर सेफ्टी मानकों के अनुसार अग्निशामक यंत्रों पर ध्यान नहीं है। कई कोचिंग सेंटरों में फायर एक्सटिंग्विशर ही गायब हैं या फिर पुराने हो चुके हैं। इसके अलावा ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर व स्मोक डिटेक्टर सिस्टम भी काम नहीं करते। इमारत में आग लगने जैसी समस्या होती है तो वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं है, ताकि खुली हवा अंदर आ सके व फंसे हुए लोग सांस ले सकें।
कम ऊंचाई वाली इमारतों को फायर एनओसी से छूट
दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में बिल्डिंग बायलॉज और नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत करीब 16.5 मीटर या 50 फीट से कम ऊंचाई वाली सामान्य रिहायशी इमारतों को फायर एनओसी से छूट दी गई है। ऐसे में कम ऊंचाई वाली इमारतों को संकरी सीढ़ियां, वेंटिलेशन की कमी और बिना फायर एस्टिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) ही बना दिया जाता है। इमारतों के मालिक इनको कोचिंग सेंटर या अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के लिए किराये पर दे देते हैं।
कोट
कोचिंग सेंटरों में युवा अपना भविष्य सुरक्षित करने की उम्मीद से आते हैं लेकिन इमारत में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण युवाओं का जीवन सुरक्षित नहीं है। -अमन प्रताप सिंह, छात्र
जिन कोचिंग सेंटरों में युवा कई-कई घंटे तक पढ़ाई करते हैं, उन संस्थानों में बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपाय भी नहीं हैं। यह चिंताजनक विषय है। -वैभव चौहान, छात्र
कोचिंग सेंटरों में फायर अलार्म, इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा हर कोचिंग सेंटर में समय-समय पर फायर सेफ्टी ऑडिट व मॉक ड्रिल होनी चाहिए। -फरदीन, छात्र

अधिकतर कोचिंग सेंटरों में बिना वेंटिलेशन वाले क्लासरूम में पढ़ाई कराई जा रही है, जोकि युवाओं के जीवन सुरक्षा को लेकर खिलवाड़ है। - चंद्रकला, छात्रा
वर्जन
रिहायशी इमारतों में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे कोचिंग सेंटरों पर नगर निगम या एचएसवीपी द्वारा कार्रवाई की जाएगी। जिला फायर विभाग की टीमों ने करीब 600 इमारतों का ऑडिट किया है, जिसमें कई इमारतों में फायर एनओसी या सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। उनको नोटिस जारी किए जाएंगे। - नरेंद्र यादव, वरिष्ठ फायर अधिकारी, गुरुग्राम
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