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Gurugram News: रात श्याम सपने में आए...
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सिविल लाइंस स्थित पांडुपाेल मंदिर में झूला झुलते लड्डू गोपाल
पारंपरिक गीतों और देसी व्यंजनों के साथ गुरुग्राम में मची लल्ला के छठी की धूम
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। यशोदा जी ने जायो लल्ला, मोहल्ला में हल्ला सो मच गयो... जैसे पारंपरिक सोहर और लोकगीतों की गूंज के साथ बुधवार को मिलेनियम सिटी गुरुग्राम का माहौल पूरी तरह ग्रामीण परिवेश और कृष्ण भक्ति के रंग में रंग गया। शहर के विभिन्न मंदिरों और सोसाइटियों में भगवान श्री कृष्ण का छठी महोत्सव बेहद पारंपरिक और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
बुधवार की शाम शहर के प्राचीन घंटेश्वर मंदिर, सेक्टर-4 और सेक्टर-15 स्थित श्री कृष्ण मंदिर, भूतेश्वर मंदिर तथा सिद्धेश्वर मंदिर समेत तमाम धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ी। भजन मंडलियों के साथ भक्तों ने भी सुर में सुर मिलाया। रात श्याम सपने में आए, खा गए दहिया..., मनिहारी का भेष बनाया श्याम चूड़ी बेचने आया... और छोटी-छोटी गइया, छोटे-छोटे ग्वाल जैसे भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे।
इस अवसर पर महिलाओं ने ढोलक की थाप पर शिशु जन्म के समय गाए जाने वाले पारंपरिक सोहर और बधाई गीत गाकर माहौल को जीवंत कर दिया। उत्सव की खास बात यह रही कि आधुनिकता के बीच महिलाओं ने पूरी तरह देसी लहजे में लड्डू गोपाल की छठी मनाई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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छठी के इस विशेष मौके पर एक अनूठी परंपरा देखने को मिली। महिलाएं अपने-अपने घरों से पारंपरिक और देसी व्यंजन बनाकर लाईं। प्रसाद के रूप में मुख्य रूप से कढ़ी, चावल, गुलगुले, साग और हरी सब्जियां भगवान को भोग लगाने के बाद आपस में वितरित की गईं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। यशोदा जी ने जायो लल्ला, मोहल्ला में हल्ला सो मच गयो... जैसे पारंपरिक सोहर और लोकगीतों की गूंज के साथ बुधवार को मिलेनियम सिटी गुरुग्राम का माहौल पूरी तरह ग्रामीण परिवेश और कृष्ण भक्ति के रंग में रंग गया। शहर के विभिन्न मंदिरों और सोसाइटियों में भगवान श्री कृष्ण का छठी महोत्सव बेहद पारंपरिक और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
बुधवार की शाम शहर के प्राचीन घंटेश्वर मंदिर, सेक्टर-4 और सेक्टर-15 स्थित श्री कृष्ण मंदिर, भूतेश्वर मंदिर तथा सिद्धेश्वर मंदिर समेत तमाम धार्मिक स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ी। भजन मंडलियों के साथ भक्तों ने भी सुर में सुर मिलाया। रात श्याम सपने में आए, खा गए दहिया..., मनिहारी का भेष बनाया श्याम चूड़ी बेचने आया... और छोटी-छोटी गइया, छोटे-छोटे ग्वाल जैसे भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे।
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इस अवसर पर महिलाओं ने ढोलक की थाप पर शिशु जन्म के समय गाए जाने वाले पारंपरिक सोहर और बधाई गीत गाकर माहौल को जीवंत कर दिया। उत्सव की खास बात यह रही कि आधुनिकता के बीच महिलाओं ने पूरी तरह देसी लहजे में लड्डू गोपाल की छठी मनाई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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छठी के इस विशेष मौके पर एक अनूठी परंपरा देखने को मिली। महिलाएं अपने-अपने घरों से पारंपरिक और देसी व्यंजन बनाकर लाईं। प्रसाद के रूप में मुख्य रूप से कढ़ी, चावल, गुलगुले, साग और हरी सब्जियां भगवान को भोग लगाने के बाद आपस में वितरित की गईं।

सिविल लाइंस स्थित पांडुपाेल मंदिर में झूला झुलते लड्डू गोपाल