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Gurugram News: अंडरग्राउंड केबल फॉल्ट तलाशने में लगे 36 घंटे, बिना बिजली के रहे लोग
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चार जगह केबल फॉल्ट ढूंढेने के लिए कई स्थानों पर खोद डाली सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अंडरग्राउंड केबल में आए फॉल्ट को तलाशने में 36 घंटे लग गए। इस दौरान मिलेनियम सिटी में दो सोसाइटियों के लोग दो दिन तक बगैर बिजली के रहे। सेक्टर-109 स्थित एटीएस ककून सोसाइटी में रहने वाले करीब 400 परिवारों और कैलेडियम सोसाइटी के 150 परिवारों के लिए राखी का यह त्योहार बगैर बिजली के ही बीता। इतना ही नहीं चार स्थानों पर इस केबल में फॉल्ट तलाशने के दौरान कई जगह से सड़क को भी खोदा गया।
दो दिन पहले सोसाइटी की 11केवी की अंडर ग्राउंड लाइन में फॉल्ट आ गया था। इसे तलाशने के लिए डीएचबीवीएन की पालम विहार टीम को कई जगहों पर जेसीबी की मदद से जमीन की खुदाई करनी पड़ी। बिजली मंगलवार सुबह 6 बजे गई थी, बुधवार को शाम 5 बजे के बाद दोबारा बहाल हो पाई। लोगों को करीब 36 घंटे बगैर बिजली के रहना पड़ा। मंगलवार और बुधवार को पूरे दिन डीएचबीवीएन की टीम फॉल्ट तलाशने में जुटी रही। बिजली निगम के कर्मियों ने बताया कि एक फॉल्ट तलाशा जाता तो दूसरे फॉल्ट की जानकारी मिल जाती। अंडर ग्राउंड केबल के कारण फॉल्ट तलाशने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। कुल चार जगह केबल में फॉल्ट आया। कड़ी मशक्कत के बाद इन्हें दुरुस्त किया गया।
पालम विहार के बिजली निगम के एसडीओ सतवीर सिंह ने बताया कि बिजली निगम के कर्मियों ने अथक प्रयास कर फॉल्ट ढूंढे। इसके लिए कई जगह जमीन खोदनी पड़ी। कई जगह पानी भरा था, वहां पानी निकालकर मिट्टी भरनी पड़ी। इस कारण केबल दुरुस्त करने में वक्त लगा है।
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लचर बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण आई परेशानी
लोगों की शिकायत थी कि लचर और गुणवत्तापूर्ण केबल लाइन नहीं होने के कारण फॉल्ट आया। हालांकि जेनरेटर की मदद से सोसाइटियों में बिजली का काम चला, मगर जहां बिजली निगम की बिजली के लिए लोगों को प्रति यूनिट 5.25 रुपये बिल चुकाना पड़ता है, वहीं जेनरेटर से मिलने वाली बिजली के लिए 24.84 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल चुकाना होता है। जिन लोगाें का एक दिन का बिजली बिल 300 से 500 रुपये होता है, उनका एक दिन का बिल 1400 से 1500 रुपये आया। इसके साथ ही सड़क खोदने और भरने जैसी सरकारी संपत्ति का नुकसान अलग हुआ। निवासियों का सवाल था कि किस तरह केबल की पूरी लाइन में एक के बाद एक फॉल्ट निकल सकता है। चार फॉल्ट को दुरुस्त करने में 36 घंटे कैसे लगते हैं।
बिल्डर से 33 केवीए सबस्टेशन के लिए जमीन नहीं ले पाया बिजली विभाग
सोसाइटी के निवासी गौरव सलूजा ने बताया कि यह बहुत ही दुखद स्थिति है। बिल्डर प्रबंधन ने 33 केवीए सबस्टेशन के लिए बिजली निगम को दो साल पहले ही बैंक गारंटी दे दी थी मगर अभी तक डीएचबीवीएन बिल्डर से 33केवी सबस्टेशन की जमीन नहीं ले पाया है। सोसाइटी में करीब पांच किमी दूरी पर स्थित दौलताबाद फीडर से 11केवी की लाइन आ रही है। यह लाइन भी लचर है। 33 केवीए सबस्टेशन सोसाइटी के पास बन जाए तो लोड भी पूरा होगा और इस तरह बिजली के लिए परेशान भी नहीं होना पड़ेगा। सोसाइटी के नजदीक सबस्टेशन होने से केबल फॉल्ट ढूंढने की परेशानी नहीं होगी।
प्रतिक्रिया
मंगलवार सुबह 6 बजे से सोसाइटी के 400 परिवार एक जेनरेटर पर चले। हमारा एकमात्र जेनरेटर अगर खराब हो गया तो क्या होगा। यहां करीब 30 प्रतिशत बुजुर्ग और खास तौर पर अकेले बुजुर्ग रहते हैं। 23 मंजिली इमारत है। कोई वेंडर भी सहायता नहीं कर पाएगा।
-राज सिंघल, ग्रुप कैप्टन (सेवानिवृत), निवासी, एटीएस ककून सोसाइटी
बहुत ही दुखद स्थिति है। आम लोग अपनी हर सेवा प्राप्त करने के लिए अच्छी खासी रकम चुका रहे हैं मगर किस तरह की अनियोजित व्यवस्था है, जिसमें फॉल्ट ढूंढने में दो दिन लग रहे हैं। विभागीय लचर व्यवस्था लोगों की परेशानी का कारण ही बनती है।
-संजय अग्रवाल, एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत ), निवासी, एटीएस ककून सोसाइटी
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अंडरग्राउंड केबल में आए फॉल्ट को तलाशने में 36 घंटे लग गए। इस दौरान मिलेनियम सिटी में दो सोसाइटियों के लोग दो दिन तक बगैर बिजली के रहे। सेक्टर-109 स्थित एटीएस ककून सोसाइटी में रहने वाले करीब 400 परिवारों और कैलेडियम सोसाइटी के 150 परिवारों के लिए राखी का यह त्योहार बगैर बिजली के ही बीता। इतना ही नहीं चार स्थानों पर इस केबल में फॉल्ट तलाशने के दौरान कई जगह से सड़क को भी खोदा गया।
दो दिन पहले सोसाइटी की 11केवी की अंडर ग्राउंड लाइन में फॉल्ट आ गया था। इसे तलाशने के लिए डीएचबीवीएन की पालम विहार टीम को कई जगहों पर जेसीबी की मदद से जमीन की खुदाई करनी पड़ी। बिजली मंगलवार सुबह 6 बजे गई थी, बुधवार को शाम 5 बजे के बाद दोबारा बहाल हो पाई। लोगों को करीब 36 घंटे बगैर बिजली के रहना पड़ा। मंगलवार और बुधवार को पूरे दिन डीएचबीवीएन की टीम फॉल्ट तलाशने में जुटी रही। बिजली निगम के कर्मियों ने बताया कि एक फॉल्ट तलाशा जाता तो दूसरे फॉल्ट की जानकारी मिल जाती। अंडर ग्राउंड केबल के कारण फॉल्ट तलाशने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। कुल चार जगह केबल में फॉल्ट आया। कड़ी मशक्कत के बाद इन्हें दुरुस्त किया गया।
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पालम विहार के बिजली निगम के एसडीओ सतवीर सिंह ने बताया कि बिजली निगम के कर्मियों ने अथक प्रयास कर फॉल्ट ढूंढे। इसके लिए कई जगह जमीन खोदनी पड़ी। कई जगह पानी भरा था, वहां पानी निकालकर मिट्टी भरनी पड़ी। इस कारण केबल दुरुस्त करने में वक्त लगा है।
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लचर बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण आई परेशानी
लोगों की शिकायत थी कि लचर और गुणवत्तापूर्ण केबल लाइन नहीं होने के कारण फॉल्ट आया। हालांकि जेनरेटर की मदद से सोसाइटियों में बिजली का काम चला, मगर जहां बिजली निगम की बिजली के लिए लोगों को प्रति यूनिट 5.25 रुपये बिल चुकाना पड़ता है, वहीं जेनरेटर से मिलने वाली बिजली के लिए 24.84 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल चुकाना होता है। जिन लोगाें का एक दिन का बिजली बिल 300 से 500 रुपये होता है, उनका एक दिन का बिल 1400 से 1500 रुपये आया। इसके साथ ही सड़क खोदने और भरने जैसी सरकारी संपत्ति का नुकसान अलग हुआ। निवासियों का सवाल था कि किस तरह केबल की पूरी लाइन में एक के बाद एक फॉल्ट निकल सकता है। चार फॉल्ट को दुरुस्त करने में 36 घंटे कैसे लगते हैं।
बिल्डर से 33 केवीए सबस्टेशन के लिए जमीन नहीं ले पाया बिजली विभाग
सोसाइटी के निवासी गौरव सलूजा ने बताया कि यह बहुत ही दुखद स्थिति है। बिल्डर प्रबंधन ने 33 केवीए सबस्टेशन के लिए बिजली निगम को दो साल पहले ही बैंक गारंटी दे दी थी मगर अभी तक डीएचबीवीएन बिल्डर से 33केवी सबस्टेशन की जमीन नहीं ले पाया है। सोसाइटी में करीब पांच किमी दूरी पर स्थित दौलताबाद फीडर से 11केवी की लाइन आ रही है। यह लाइन भी लचर है। 33 केवीए सबस्टेशन सोसाइटी के पास बन जाए तो लोड भी पूरा होगा और इस तरह बिजली के लिए परेशान भी नहीं होना पड़ेगा। सोसाइटी के नजदीक सबस्टेशन होने से केबल फॉल्ट ढूंढने की परेशानी नहीं होगी।
प्रतिक्रिया
मंगलवार सुबह 6 बजे से सोसाइटी के 400 परिवार एक जेनरेटर पर चले। हमारा एकमात्र जेनरेटर अगर खराब हो गया तो क्या होगा। यहां करीब 30 प्रतिशत बुजुर्ग और खास तौर पर अकेले बुजुर्ग रहते हैं। 23 मंजिली इमारत है। कोई वेंडर भी सहायता नहीं कर पाएगा।
-राज सिंघल, ग्रुप कैप्टन (सेवानिवृत), निवासी, एटीएस ककून सोसाइटी
बहुत ही दुखद स्थिति है। आम लोग अपनी हर सेवा प्राप्त करने के लिए अच्छी खासी रकम चुका रहे हैं मगर किस तरह की अनियोजित व्यवस्था है, जिसमें फॉल्ट ढूंढने में दो दिन लग रहे हैं। विभागीय लचर व्यवस्था लोगों की परेशानी का कारण ही बनती है।
-संजय अग्रवाल, एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत ), निवासी, एटीएस ककून सोसाइटी