फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Interim Budget: Pollution is very troublesome...Finance Minister should take concrete measures this time

अंतरिम बजट: प्रदूषण बहुत ही सताए ...वित्तमंत्री इस बार करना ठोस उपाय

Thu, 01 Feb 2024 12:01 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 01 Feb 2024 12:01 AM IST
विज्ञापन
Interim Budget: Pollution is very troublesome...Finance Minister should take concrete measures this time
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

गुरुग्राम। हर साल दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण जीना मुहाल कर देता है। दिवाली के आसपास तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र जैसे किसी गैस चैंबर में तब्दील हो जाता है। सांस लेना तक मुश्किल होता है। लोगों का कहना है कि इस बार सरकार को दिल्ली-एनसीआर के इस प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए अंतरिम बजट में निश्चित ही काेई ठोस उपाय करना होगा।
उद्यमियों ने वित मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि पर्यावरण को लेकर सिर्फ छोटा-मोटा बजट जारी करने से कुछ नहीं होगा। सरकार को चाहिए कि नासूर बनती जा रही इस समस्या के लिए जमीनी स्तर पर काम किया जाए। बजट में पर्यावरण के लिए अच्छा खासा पैकेज हो और उसे खर्चने के लिए ठोस कार्य योजना भी हो। इसके साथ ही बजट में उद्यमों के लिए आसान सुविधाजनक व्यवस्था के प्रावधान हों। केंद्रीय बजट में पिछले सालों के दौरान गुरुग्राम, मानेसर में उद्यमियों के लिए परिवहन संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के बजट प्रावधानों का लाभ मिला है। गुरुग्राम और मानेसर के उद्यमियों की मांग है कि उद्योगों की बेहतरी में अगर इसे जल्द ही पूरा कर दिया जाए तो नए कॉरिडोर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रदूषण के कारण ग्रैप लगाने से बचा जा सके, इसके लिए उपाय हो। दिल्ली एनसीआर से सभी टोल हटाए जाएं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने व्यवस्था हो।
विज्ञापन

उद्यमियों ने कहा

सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के उपाय के लिए बजट में प्रावधान करना चाहिए। पिछले पांच वर्षों से प्रदूषण बढ़ा है और ग्रैप नियमों के कारण दिल्ली एनसीआर में उद्योगों को इस दौरान 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार धूल, धुआं, पक्के फुटपाथ, पेड़ लगाने जैसी सभी योजनाओं पर बजट बनाकर प्रदूषण के कारण ग्रैप नहीं लगाना पड़े इसके उपाय करने होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

- दीपक मैनी, अध्यक्ष, प्रोगेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री

सरकार को वस्त्र और परिधान उद्योग में जीएसटी कम करना चाहिए। इससे निर्यातकों को बेहतर अवसर मिलेगा। कैपिटल गेन्स टैक्स (पूंजीगत लाभ कर) को नए सिरे से परिवर्तन किए जाने की बात सामने आ रही है। वस्त्र और परिधान उद्योगों के निर्यातकों को किसी नए करारोपण से मुक्त रखा जाना चाहिए। परिधान निर्यातकों पर ध्यान देने की जरूरत है।
- राज सिंगला, संरक्षक, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज उद्योग विहार

पिछले सालों के दौरान बजट में अध:संरचनात्मक (इंफ्रास्ट्रक्चर) सुविधाओं के विकास के लिए बजट रखा गया तो इसका फायदा उद्यमियों को मिला और भविष्य में इससे उम्मीदे हैं। आगे लंबित प्रोजेक्ट को मुक्कमल किया जाए। केवल केएमपी से काम नहीं चलेगा। आरआरटीसी (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) ऑरबिट कॉरिडोर के विकास पर ध्यान दें। दिल्ली एनसीआर में सारे टोल हटाए जाएं।

- मनोज त्यागी, महासचिव आईएमटी मानेसर उद्योग संघ

उद्योगों पर जीएसटी का बोझ कम किया जाना चाहिए। जीएसटी के कारण उद्योगों पर वर्किंग कैपिटल का बोझ बढ़ गया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक सात ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का है तो इसमें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एमएसएमई के ऋण की प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए। कोरोना काल में जो उद्योग चरमरा गए हैं। उन्हें फिर खड़ा करने लिए नियमों के बदलाव और सहायता की जरूरत है।
- राजेश गुप्ता, अध्यक्ष मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed