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सुशांत लोक में गरीबों के प्लाट हड़प गए बिल्डर और अफसर
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गुरुग्राम। सुशांतलोक एक और दो में अंसल बिल्डवेल द्वारा 500 एकड़ जमीन में बनाई गई कॉलोनी में निर्बल आय वर्ग (ईडब्लूएस) के परिवारों को प्लॉट न देने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमित्रा कादियान ने डीटीपी आरएस वाठ को तलब किया है। उन्हें इस प्रकरण से जुड़े सभी अभिलेख छह अप्रैल को अदालत में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
अदालत ने उनसे यह जानकारी मांगी है कि गरीबों के लिए दिए गए प्लॉट के नंबर क्या-क्या हैं। उनका साइज और सुशांत लोक-2 एवं 3 में कहां-कहां स्थित हैं। पिछले माह सुशांतलोक में गरीब परिवारों को मकान के लिए प्लाट न देने का आरोप लगाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की थी। जिसमें आरोप लगाया है कि बिल्डर ने बिल्डर लाइसेंस की शर्त और सरकार के आदेशानुसार ईडब्लूएस परिवारों के लिए 20 फीसदी यानी कि 100 एकड़ जमीन में सस्ते दामों पर प्लाट नहीं दिए हैं।
बल्कि पूरी जमीन पर प्लाट काटकर अधिक दाम में संपन्न परिवारों को बेच दिए हैं। ऐसा करके कई हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है। प्रशासन ने इस शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। विजिलेंस जांच में भी रिकार्ड नहीं दिखाया गया है। एसटीपी ऑफिस में जानकारी की जाती है तो बता दिया जाता है कि रिकॉर्ड है ही नहीं।
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इस प्रकरण को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए डीटीपी आरएस वाठ को रिकार्ड के साथ तलब किया है। इस मुकदमे की पैरवी कर रहे वकील यतीश कुमार गोयल का कहना है कि नियमानुसार पात्रों को प्लॉट दिलाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक कमेटी बनाई है जिसमें डीसी, एसडीएम, एडमिनिस्ट्रेटर हुड्डा और डीटीपी आदि शामिल हैं लेकिन इस कमेटी ने सरकार के आदेशों का पालन नहीं किया है।
चीफ सेक्रेटरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच विजिलेंस से कराने के आदेश भी जारी किए हैं। इससे पहले इस मामले की शिकायत सीएम विंडो पर भी की गई थी। उस शिकायत को भी स्थानीय अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया है। अब मामला अदालत तथा विजिलेंस टीम तक पहुंचा तो एसटीपी आफिस में सरगर्मी तेज हो गई है। रिकार्ड तलाशा जा रहा है। फाइल में पूरे प्रपत्र नहीं मिल रहे हैं। यह तो छह अप्रैल को पता चलेगा कि क्या क्या अभिलेख अदालत में पेश होंगे।
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अदालत ने उनसे यह जानकारी मांगी है कि गरीबों के लिए दिए गए प्लॉट के नंबर क्या-क्या हैं। उनका साइज और सुशांत लोक-2 एवं 3 में कहां-कहां स्थित हैं। पिछले माह सुशांतलोक में गरीब परिवारों को मकान के लिए प्लाट न देने का आरोप लगाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की थी। जिसमें आरोप लगाया है कि बिल्डर ने बिल्डर लाइसेंस की शर्त और सरकार के आदेशानुसार ईडब्लूएस परिवारों के लिए 20 फीसदी यानी कि 100 एकड़ जमीन में सस्ते दामों पर प्लाट नहीं दिए हैं।
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बल्कि पूरी जमीन पर प्लाट काटकर अधिक दाम में संपन्न परिवारों को बेच दिए हैं। ऐसा करके कई हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत है। प्रशासन ने इस शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। विजिलेंस जांच में भी रिकार्ड नहीं दिखाया गया है। एसटीपी ऑफिस में जानकारी की जाती है तो बता दिया जाता है कि रिकॉर्ड है ही नहीं।
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इस प्रकरण को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए डीटीपी आरएस वाठ को रिकार्ड के साथ तलब किया है। इस मुकदमे की पैरवी कर रहे वकील यतीश कुमार गोयल का कहना है कि नियमानुसार पात्रों को प्लॉट दिलाने के लिए हरियाणा सरकार ने एक कमेटी बनाई है जिसमें डीसी, एसडीएम, एडमिनिस्ट्रेटर हुड्डा और डीटीपी आदि शामिल हैं लेकिन इस कमेटी ने सरकार के आदेशों का पालन नहीं किया है।
चीफ सेक्रेटरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच विजिलेंस से कराने के आदेश भी जारी किए हैं। इससे पहले इस मामले की शिकायत सीएम विंडो पर भी की गई थी। उस शिकायत को भी स्थानीय अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया है। अब मामला अदालत तथा विजिलेंस टीम तक पहुंचा तो एसटीपी आफिस में सरगर्मी तेज हो गई है। रिकार्ड तलाशा जा रहा है। फाइल में पूरे प्रपत्र नहीं मिल रहे हैं। यह तो छह अप्रैल को पता चलेगा कि क्या क्या अभिलेख अदालत में पेश होंगे।