{"_id":"60e9d9f78ebc3ef84e539bec","slug":"hospitals-will-return-the-recovery-amount-more-than-the-fixed-rate-from-the-patients-gurgaon-news-noi592739194","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीजों से तय रेट से अधिक वसूली रकम लौटाएंगे अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीजों से तय रेट से अधिक वसूली रकम लौटाएंगे अस्पताल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम। कोविड-19 के मरीजों से तय रेट से अधिक राशि वसूलने वाले कुछ अस्पताल मरीजों को रिफंड देने को तैयार हैं। जांच कमेटी के सामने अस्पताल प्रबंधन ने इस बात को कबूल कर लिया है। ऐेसे मरीज या उनके तीमारदारों को जल्द ही कमेटी के माध्यम से तय रेट से वसूली गई अधिक राशि वापस लौटा दी जाएगी। इस बीच अस्पताल प्रबंधन ने यह भी स्वीकार किया है कि उनकी जानकारी के बगैर अकाउंट डिपार्टमेंट की ओर से कहीं न कहीं यह गलती की गई है, इसमें प्रबंधन का कोई जुड़ाव नहीं है।
कोविड-19 के फैलाव के बाद सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए कोरोना मरीजों के इलाज का रेट तय किया था। आईसीयू बेड से लेकर वेंटिलेटर और ऑक्सीजन बेड तक के लिए अलग-अलग रेट तय कर न्यूनतम आठ हजार तथा अधिकतम 18 हजार रुपये की राशि तय की गई थी। इनमें टेस्ट को छोड़कर ओपीडी, डॉक्टर की विजिट, दवाएं, बेड और दूसरी जरूरी सुविधाओं को शामिल किया गया था। अपनी मनमर्जी से रेट वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई का फरमान भी जारी किया गया। ऐसी शिकायतों के लिए नगाराधीश की अगुवाई में बाकायदा एक कमेटी भी बनाई गई।
आरोप है कि जैसे अस्पतालों में कोरोना के मरीज बढ़े, निजी अस्पताल अपनी मनमर्जी से रेट वसूलने लगे। इसकी शिकायत मरीजों और उनके तीमारदारों ने कमेटी के सामने की। कमेटी को अभी तक ऐसी 37 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के बाद नगराधीश सिद्धार्थ दहिया ने जांच की। जांच के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा और कार्रवाई की बात कही। कुछ अस्पतालों ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए तय रेट से अधिक वसूली राशि लौटाने की बात कही।
विज्ञापन
कुछ अस्पतालों ने अभी तक जवाब नहीं दिया
अभी कुछ मामलों की जांच की गई है। कुछ अस्पताल रिफंड देने को तैयार हो गए हैं। कुछ अस्पतालों ने अभी तक अपना जवाब नहीं दिया है। उन्हें जल्द जवाब देने को पुन: कहा गया है। ऐसे शिकायतकर्ताओं को बुलाकर उनसे भी मंत्रणा की गई है। मरीज और तीमारदार रिफंड से खुश हैं। कुछेक मामलों की जांच कर वैरिफिकेशन के लिए महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं के पास भेजी गई है। वहां से अभी वैरिफिकेशन नहीं हो पाया है। जल्द ही सभी मामलों का निपटारा कर लिया जाएगा। अगर बकाया अस्पताल रिफंड को तैयार होते हैं तो ठीक है अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन
कोविड-19 के फैलाव के बाद सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए कोरोना मरीजों के इलाज का रेट तय किया था। आईसीयू बेड से लेकर वेंटिलेटर और ऑक्सीजन बेड तक के लिए अलग-अलग रेट तय कर न्यूनतम आठ हजार तथा अधिकतम 18 हजार रुपये की राशि तय की गई थी। इनमें टेस्ट को छोड़कर ओपीडी, डॉक्टर की विजिट, दवाएं, बेड और दूसरी जरूरी सुविधाओं को शामिल किया गया था। अपनी मनमर्जी से रेट वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई का फरमान भी जारी किया गया। ऐसी शिकायतों के लिए नगाराधीश की अगुवाई में बाकायदा एक कमेटी भी बनाई गई।
विज्ञापन
आरोप है कि जैसे अस्पतालों में कोरोना के मरीज बढ़े, निजी अस्पताल अपनी मनमर्जी से रेट वसूलने लगे। इसकी शिकायत मरीजों और उनके तीमारदारों ने कमेटी के सामने की। कमेटी को अभी तक ऐसी 37 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के बाद नगराधीश सिद्धार्थ दहिया ने जांच की। जांच के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा और कार्रवाई की बात कही। कुछ अस्पतालों ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए तय रेट से अधिक वसूली राशि लौटाने की बात कही।
विज्ञापन
कुछ अस्पतालों ने अभी तक जवाब नहीं दिया
अभी कुछ मामलों की जांच की गई है। कुछ अस्पताल रिफंड देने को तैयार हो गए हैं। कुछ अस्पतालों ने अभी तक अपना जवाब नहीं दिया है। उन्हें जल्द जवाब देने को पुन: कहा गया है। ऐसे शिकायतकर्ताओं को बुलाकर उनसे भी मंत्रणा की गई है। मरीज और तीमारदार रिफंड से खुश हैं। कुछेक मामलों की जांच कर वैरिफिकेशन के लिए महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं के पास भेजी गई है। वहां से अभी वैरिफिकेशन नहीं हो पाया है। जल्द ही सभी मामलों का निपटारा कर लिया जाएगा। अगर बकाया अस्पताल रिफंड को तैयार होते हैं तो ठीक है अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।