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Gurugram News: अतिक्रमण की अलग-अलग रिपोर्ट पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग नाराज

Sat, 24 Jan 2026 04:41 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 04:41 PM IST
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Haryana Human Rights Commission upset over different reports of encroachment
सेक्टर-57 का मामला, अतिक्रमण पर पुलिस और एचएसवीपी की रिपोर्ट में विरोधाभास
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अमर उजाला ब्यूृरो
गुरुग्राम। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने सेक्टर-57 में अवैध अतिक्रमण एवं आवासीय क्षेत्र में भवन निर्माण सामग्री के अवैध भंडारण के मामले को गंभीरता से लिया है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि विभिन्न विभागों की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में तथ्यात्मक विरोधाभास है। एक ओर पुलिस रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया कि भवन निर्माण सामग्री की आपूर्ति एवं भंडारण की गतिविधियां अभी भी जारी हैं। दूसरी ओर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी की ओर से अतिक्रमण हटाए जाने की जानकारी दी गई है। आयोग ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
शिकायतकर्ता रोशन लाल यादव की ओर से आयोग को नवीनतम तस्वीरें भी प्रस्तुत की गई, जिनसे प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि स्थल पर अब भी अवैध रूप से भवन निर्माण सामग्री का डंपिंग एवं भंडारण किया जा रहा है। अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा द्वारा पूछे गए प्रश्न कि यदि अनधिकृत गतिविधियां अभी भी जारी हैं तो सेक्टर-57 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से प्रशासक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को छह जून 2025 और 8 दिसंबर 2025 को अतिक्रमण हटाए जाने की सराहना करते हुए प्रशंसा पत्र क्यों जारी किए गए। इस पर शिकायतकर्ता ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा पर्याप्त सख्त एवं निरंतर कार्रवाई नहीं की जाती है। यद्यपि एचएसवीपी द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाया जाता है। न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इस स्थिति को प्रशासनिक लापरवाही एवं कमजोर प्रवर्तन का परिणाम मानते हुए पुलिस उपायुक्त (पूर्व) गुरुग्राम और एचएसवीपी को ठोस एवं संरचनात्मक उपाय अपनाने के निर्देश दिए है।
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सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण न केवल कानून व्यवस्था की समस्या है, बल्कि नागरिकों के सुरक्षित, स्वच्छ एवं सम्मानजनक जीवन के अधिकार का भी उल्लंघन है। आयोग ने उपायुक्त, पुलिस आयुक्त, आयुक्त नगर निगम, जीएमडीए के सीईओ, एचएसवीपी के संपदा अधिकारी-II, जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन), पुलिस उपायुक्त (पूर्व) को निर्देश दिए हैं कि वे समन्वित रूप से कार्य कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करें। इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी, इससे एक सप्ताह पूर्व आयोग के सामने इस बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
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