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Gurugram News: अपराध शाखा भोंडसी, सेक्टर-40 व सिविल लाइंस थाने से रिपोर्ट तलब

Mon, 01 Jun 2026 08:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 08:46 PM IST
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Haryana Human Rights Commission takes cognizance of custodial torture case
हिरासत के दौरान यातना मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
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सीसीटीवी प्रणालियों की स्थापना, कार्यप्रणाली, रखरखाव और रिकॉर्डिंग संरक्षण संबंधी विस्तृत रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पुलिस हिरासत के दौरान यातना, शारीरिक उत्पीड़न, अपमानजनक व्यवहार पर संज्ञान लिया है। हरियाणा में पुलिस प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन का आकलन करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राज्य अपराध शाखा भोंडसी के पुलिस अधीक्षक, सीआईए शाखा सेक्टर-40 थाने के प्रभारी और सिविल लाइंस थाने के प्रभारी से सीसीटीवी प्रणालियों की स्थापना, कार्यप्रणाली, रखरखाव और रिकॉर्डिंग संरक्षण संबंधी विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।
शिकायतकर्ता खुशी शर्मा ने शिकायत में आरोप लगाया है कि पति राकेश शर्मा को 20 सितंबर 2024 को गुरुग्राम के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 158 से संबंधित मामले में कुछ पुलिस अधिकारियों उप निरीक्षक प्रवीण कुमार, राज्य अपराध शाखा भोंडसी के जांच अधिकारी योगेंद्र सिंह व एक अन्य अधिकारी सुशील ने हिरासतीय यातना व अमानवीय व्यवहार का शिकार बनाया गया।
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मारपीट व निर्वस्त्र करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, राकेश शर्मा का नाम उक्त एफआईआर में दर्ज नहीं था। इसके बावजूद उनको पुलिस हिरासत में लेकर 4 मई 2026 से 8 मई 2026 के दौरान कथित रूप से थर्ड डिग्री यातना दी गई। आरोप है कि उनके साथ मारपीट करके निर्वस्त्र किया गया। धमकाने व दबाव डालने के साथ ही खाली कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। इससे उन्हें गंभीर शारीरिक व मानसिक आघात पहुंचा। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान कथित यातना व उत्पीड़न के कारण पति की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई और उन्हें बेहोशी व दौरे जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर उपचार हेतु पीजीआई रोहतक ले जाया गया।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह मानव गरिमा, शारीरिक अखंडता व भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के संरक्षण से संबंधित गंभीर प्रश्न उत्पन्न करते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि हिरासतीय यातना व अपमानजनक व्यवहार विधि के शासन की मूल भावना पर प्रहार करते हैं और संवैधानिक सिद्धांतों व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार मानकों के प्रतिकूल हैं।

पुलिस आयुक्त को दिए फुटेज संरक्षित करने के निर्देश
शिकायत में राज्य अपराध शाखा भोंडसी, सीआईए शाखा सेक्टर-40 और सिविल लाइंस थाने से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया है। मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के महत्व को देखते हुए आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के तहत सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि वे राज्य अपराध शाखा भोंडसी, सीआईए शाखा सेक्टर-40 और सिविल लाइंस थाने से संबंधित 4 मई से 9 मई की सुबह तक अवधि की सभी सीसीटीवी फुटेज तत्काल प्राप्त करके सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए कहा है। पुलिस आयुक्त को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उक्त फुटेज में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो और शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट सहित उसे आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
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