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Gurugram News: गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट में पर्यावरणीय और पुनर्वास मानकों पर जोर
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मेट्रो के पहले फेज का पर्यावरणीय और सामाजिक प्रतिबद्धता रिपोर्ट 5 मार्च 2026 जारी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम मेट्रो के पहले चरण में पर्यावरण, सामाजिक और पुनर्वास से जुड़े सभी मानकों को सख्ती से लागू करने पर जोर है। इस परियोजना को विश्व बैंक का वित्तीय सहयोग प्राप्त है। जीएमआरएल ने पहले फेज के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रतिबद्धता मूल्यांकन रिपोर्ट 5 मार्च 2026 जारी कर दी है।
परियोजना के लिए तैयार की गई पर्यावरण एवं सामाजिक प्रतिबद्धता योजना (ईएससीपी) की यह दूसरी रिपोर्ट है। इसमें जीएमआरएल को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कार्य विश्व बैंक के पर्यावरण और सामाजिक मानकों (ईएसएसएस) के अनुरूप हों। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ, संसाधन और तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध हो। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कंस्ट्रक्शन एनवायरनमेंट एंड सोशल मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है। पुनर्वास के लिए जीएमआरएल द्वारा पुनर्वास कार्य योजना (आरएपी) लागू की जाएगी।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण व राजस्व विभाग सहित संबंधित एजेंसियों सहयोग करेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, जिन हिस्सों में पहले ही जमीन खाली कराई जा चुकी है, वहां अनुपालन ऑडिट कराया जाएगा और सुधारात्मक कार्य योजना लागू की जाएगी। इसके अलावा, परियोजना के तहत विभिन्न अध्ययन, कंसल्टेंसी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम पर जोर हैं।
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जैव विविधता के संरक्षण पर जोर
कॉरिडोर में बसई क्षेत्र के प्रमुख पक्षी क्षेत्र और बसई तालाब की जैव विविधता के संरक्षण से जुड़े प्रबंधन उपाय भी किए जाएंगे। हालांकि कॉरिडोर या उसके साथ कोई पुरातात्विक स्मारक नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी पर्यावरण और सामाजिक जोखिमों की पहचान विश्व बैंक के मानकों के अनुसार की जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम मेट्रो के पहले चरण में पर्यावरण, सामाजिक और पुनर्वास से जुड़े सभी मानकों को सख्ती से लागू करने पर जोर है। इस परियोजना को विश्व बैंक का वित्तीय सहयोग प्राप्त है। जीएमआरएल ने पहले फेज के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रतिबद्धता मूल्यांकन रिपोर्ट 5 मार्च 2026 जारी कर दी है।
परियोजना के लिए तैयार की गई पर्यावरण एवं सामाजिक प्रतिबद्धता योजना (ईएससीपी) की यह दूसरी रिपोर्ट है। इसमें जीएमआरएल को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कार्य विश्व बैंक के पर्यावरण और सामाजिक मानकों (ईएसएसएस) के अनुरूप हों। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ, संसाधन और तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध हो। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कंस्ट्रक्शन एनवायरनमेंट एंड सोशल मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है। पुनर्वास के लिए जीएमआरएल द्वारा पुनर्वास कार्य योजना (आरएपी) लागू की जाएगी।
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हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण व राजस्व विभाग सहित संबंधित एजेंसियों सहयोग करेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, जिन हिस्सों में पहले ही जमीन खाली कराई जा चुकी है, वहां अनुपालन ऑडिट कराया जाएगा और सुधारात्मक कार्य योजना लागू की जाएगी। इसके अलावा, परियोजना के तहत विभिन्न अध्ययन, कंसल्टेंसी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम पर जोर हैं।
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जैव विविधता के संरक्षण पर जोर
कॉरिडोर में बसई क्षेत्र के प्रमुख पक्षी क्षेत्र और बसई तालाब की जैव विविधता के संरक्षण से जुड़े प्रबंधन उपाय भी किए जाएंगे। हालांकि कॉरिडोर या उसके साथ कोई पुरातात्विक स्मारक नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी पर्यावरण और सामाजिक जोखिमों की पहचान विश्व बैंक के मानकों के अनुसार की जाएगी।