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Gurugram News: 13 साल पहले व्यावसायिक साइट देने के नाम पर 50 लाख की ठगी
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13 साल पहले व्यवसायिक साइट देने के नाम पर 50 लाख की ठगी
बिल्डर ने भरोसा देकर कराया था निवेश, मानक न पूरा होने पर प्रोजेक्ट हुआ सील
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सोहना रोड पर स्थित एक बिल्डर कंपनी पर एक बिल्डिंग में कारपोरेट जगह देने के नाम पर 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। डीसीपी मानेसर की ओर से जांच के हुए आदेश के बाद पीड़ित की शिकायत पर खेड़कीदौला थाने में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार डीएलएफ के हेरिटेज सिटी निवासी फिरोज खान ने शिकायत में कहा कि उन्होंने 2011 में एक बिल्डर कंपनी द्वारा दी गई सलाह पर एक बिल्डिंग में कारपोरेट कार्यालय के नाम पर 50 लाख रुपये निवेश किया था। कंपनी ने उन्हें भूमि मालिक व सरकारी कार्यालयों द्वारा दी गई एनओसी भी दिखाई थी। कंपनी ने व्यक्ति को तीन साल के भीतर कार्यालय की जगह देने व उसे पट्टे पर चढ़ाने के बदले में रुपये वापस मिलने की बात कही थी। कंपनी द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी की कमी के कारण सरकारी विभाग की ओर से 2017 में बिल्डिंग को सील कर दिया गया। वही 2018 में यह भी पता चला कि भूमि मालिक ने पावर आफ अटार्नी के समझौते को भी रद्द कर दिया गया। इस कारण उन्हें भवन निर्माण का कोई अधिकार नहीं रहा। इससे उनके दिए रुपये फंस गए। आरोपियों ने साजिश के तहत उनसे ये रुपये ले लिए।
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बिल्डर ने भरोसा देकर कराया था निवेश, मानक न पूरा होने पर प्रोजेक्ट हुआ सील
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सोहना रोड पर स्थित एक बिल्डर कंपनी पर एक बिल्डिंग में कारपोरेट जगह देने के नाम पर 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। डीसीपी मानेसर की ओर से जांच के हुए आदेश के बाद पीड़ित की शिकायत पर खेड़कीदौला थाने में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार डीएलएफ के हेरिटेज सिटी निवासी फिरोज खान ने शिकायत में कहा कि उन्होंने 2011 में एक बिल्डर कंपनी द्वारा दी गई सलाह पर एक बिल्डिंग में कारपोरेट कार्यालय के नाम पर 50 लाख रुपये निवेश किया था। कंपनी ने उन्हें भूमि मालिक व सरकारी कार्यालयों द्वारा दी गई एनओसी भी दिखाई थी। कंपनी ने व्यक्ति को तीन साल के भीतर कार्यालय की जगह देने व उसे पट्टे पर चढ़ाने के बदले में रुपये वापस मिलने की बात कही थी। कंपनी द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी की कमी के कारण सरकारी विभाग की ओर से 2017 में बिल्डिंग को सील कर दिया गया। वही 2018 में यह भी पता चला कि भूमि मालिक ने पावर आफ अटार्नी के समझौते को भी रद्द कर दिया गया। इस कारण उन्हें भवन निर्माण का कोई अधिकार नहीं रहा। इससे उनके दिए रुपये फंस गए। आरोपियों ने साजिश के तहत उनसे ये रुपये ले लिए।
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